बांदा में बारिश का कहर: मझीबा सानी में 100 से अधिक मकान गिरे, बेघर हुए ग्रामीण
बांदा में बारिश का कहर: मझीबा सानी में 100 से अधिक मकान गिरे, बेघर हुए ग्रामीण

बांदा में बारिश का कहर: मझीबा सानी में 100 से अधिक मकान गिरे, बेघर हुए ग्रामीण।
योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी
मुआवजे की मांग: डीएम कार्यालय पहुंचे पीड़ित, लेखपाल पर लगाया 200-500 रुपये की अवैध वसूली का आरोप।
राहत सामग्री वितरण में धांधली: ग्रामीणों का दावा- पक्के मकान वालों को मिली मदद, वास्तविक पीड़ित परिवार भूखे-प्यासे।
विस्तृत खबर
बांदा जिले की तहसील बबेरू के थाना बिसंडा क्षेत्र की चौकी ओरन अंतर्गत ग्राम मझीबा सानी में लगातार हो रही बारिश से भारी तबाही मची है। जलभराव और बारिश के कारण गांव में 100 से अधिक मकान गिर गए हैं, जिससे कई परिवारों के सामने रहने और खाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अपनी समस्याओं को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर नुकसान का सर्वे कराने, मुआवजे और शासन की ओर से राहत सहायता दिलाने की मांग की।
लेखपाल पर अवैध वसूली और अनियमितता के गंभीर आरोप
डीएम कार्यालय पहुंचे ग्रामीण हिमांशु शुक्ला और राम बाबू वर्मा ने बताया कि बाढ़ और जलभराव से सैकड़ों घर ढह गए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से दी जा रही राहत सामग्री में भारी अनियमितता बरती जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव में तैनात लेखपाल द्वारा हर काम के बदले 200 से 500 रुपये की अवैध वसूली की जाती है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि डीएम द्वारा भेजी गई राहत सामग्री उन लोगों को नहीं दी गई जिनके मकान गिरे हैं, बल्कि टाइल्स लगे पक्के मकान वालों को मदद बांटी गई है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर दोषी लेखपाल के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और उसका तत्काल स्थानांतरण करने की मांग की है।
मलबे में दबा राशन और बच्चे, प्रशासन बेखबर
मकान गिरने से सबसे अधिक प्रभावित लोगों में शामिल राजरानी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पड़ोसी की दीवार उनके घर पर गिरने से उनका पूरा घर मलबे में तब्दील हो गया। घर में रखा दाना-पानी, गल्ला सब दब गया है। हादसे के वक्त बच्चे भी मलबे में दब गए थे, जिन्हें गांव वालों ने ढूंढकर निकाला। महिला ने आरोप लगाया कि कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने या निरीक्षण करने नहीं आया। लेखपाल द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों का नाम लिखा गया, लेकिन राजरानी जैसे वास्तविक पीड़ितों को कोई सरकारी राशन या मदद नहीं मिली है, जिससे उनका 4-5 बच्चों का परिवार दाने-दाने को मोहताज है।
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