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जनता दल यूनाइटेड के पदाधिकारियों वा ग्रामीणों ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की मनाई पुण्यतिथि

जनता दल यूनाइटेड के पदाधिकारियों वा ग्रामीणों ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की मनाई पुण्यतिथि

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जनता दल यूनाइटेड के पदाधिकारियों वा ग्रामीणों ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की मनाई पुण्यतिथि

 

आज बांदा जिले के ब्लॉक तिंदवारी ग्राम पंचायत मुगूस में करीब दो सैकड़ा लोगो ने
राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि जनता दल यूनाइटेड। के पदाधिकारियों ने मनाया।

प्रदेश अध्यक्ष जनता दल श्रमिक प्रकोष्ठ यूपी रवींद्र कुमार भारतीय ने बताया की राम मनोहर लोहिया सच्चे समाजवादी सोच के नेता थे आज सभी को ऐसे महापुरुष के विचारो से चलने की जरूरत है वही
शालिनी सिंह पटेल प्रदेश अध्यक्ष जनता दल यूनाइटेड महिला मोर्चा यूपी ने बताया लोहिया के बारे में विस्तार से बताया राम मनोहर लोहिया एक स्वंतत्रता सेनानी, सिद्धांतवादी, गंभीर चिंतक, और समाजवादी नेता के रूप में ससम्मान पहचाने जाते हैं. उनका जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में, एक बनिया परिवार में हुआ था. दो साल की उम्र में उनकी माता का देहांत हो गया था. लेकिन उनके पिता ने दूसरी शादी नहीं की. उन्हें घर की एक नौकरानी ने पाला. 8 साल की उम्र में उनके पिता उन्हें बंबई ले गए जहां उन्होंने शुरुआती पढ़ाई में होशियार
लोहिया बचपन से ही पढाई में बहुत होशियार से बंबई में हाई स्कूल करने के बाद वे इंटरमीडिएट की की पढ़ाई पूरी करने के लिए वे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी भी गए. कोलकत्ता यूनिवर्सिटी से बीए करने के बाद उन्होंने जर्मनी मे आगे की पढ़ाई की और वहां पीएचडी भी की उनकी थीसिस का विषय भारत में नमक का कर था. जो गांधी जी की सामाजिक आर्थिक विचार धारा पर था.
कांग्रेस में सोशलिस्ट पार्टी में के संस्थापक
भारत लौटने के कुछ समय बाद गांधी जी से मिलने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए. नौकरी उन्हें कभी रास नहीं आती थी. लेकिन कांग्रेस में रह कर वे पक्के समाजवादी बन रहे . कांग्रेस के अंदर ही कांग्रेस सोशिलिस्ट पार्टी की स्थापना हुई तो लोहिया उसके संस्थापक सदस्य थे. कांग्रेस में रहकर भी कई मौके ऐसे आए जब वे गांधी जी और कांग्रेस की मुख्य धारा के नेताओं से असहमत या विरोधी दिखाई दिए.
आजादी के बाद कांग्रेस से पूरी तरह से अलग
गांधी जी से एक स्वतंत्र विचारधार पनपने के दौरान लोहिया मार्कवादियों से भी दूरे बना कर रखते चले थे. विश्व युद्ध को लेकर उनका भी रूख युद्ध विरोधी का ही था. लेकिन बाद में भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने अन्य समाजवादियों की तरह खुल कर भाग लिया और जेल भी गए. लेकिन आजादी के बाद उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के साथ जाना पसंद किया. 1951 में सोशलिस्ट पार्टी का विलय किसान मजदूर प्रजा पार्टी से हुआ और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी बनी.
कांग्रेस के खिलाफ
लोहिया को अपने आदर्शों के लिए साथियों का उनके मुताबिक साथ नहीं मिला इसी लिए उन्होंने खुद की पार्टी तक बनाई. और हमेशा अपने लिए एक नया रास्ता बनाया. उनकी सोशलिस्ट पार्टी से कई बार विलय और अलगाव होते रहे. उन्होंने नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़ा और हारे भी. लेकिन बाद में वे उपचुनाव में जीत कर लोकसभा में पहुंचे. 1967 में उत्तर प्रदेश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनने में उनकी प्रमुख भूमिका थी.
राममनोहर लोहिया ने गांधी का विरोध तो खूब किया लेकिन उनके कई नेक कार्यों में उनका बहुत साथ भी दिया.
अपने उसूलों के पक्के
लोहिया समजावाद के लिए हमेशा लड़ते रहे और इसके लिए उन्हें कांग्रसे से सीधे विरोध करने में कभी गुरेज नहीं किया. वे अपने उसूलों के बहुत पक्के रहे. भारत विभाजन के समय हिंदू मुस्लिम एकता के लिए उन्होंने गांधी जी का खूब साथ दिया और कई जगह दंगाइयों को खुद जा कर शांत किया. गोवा मुक्ति आंदोलन में उनकी बहुत तारीफ हुई. 1961 में उन्होंने अंग्रेजी हटाओ आंदोलन किया. वे हमेशा गांधीवादी तरीको से विरोध करते दिखे और कई मौकों पर गिरफ्तार होते रहे 12 अक्टूबर 1967 को उनका दिल्ली में निधन हो गया. उनके राजनैतिक शुचिता के आदर्श का संघर्ष जीवन उनके साथ चला लेकिन उनके बाद आगे ना बढ़ सका. उनके आदर्शों का नाम लेकर देश में आगे कर कई राजनेता चमके, लेकिन वे उनके आदर्शों पर चलने कभी सफल नहीं हुए. सच्चे समाजवाद का उनका सपना भी सामाजिक न्याय के नारे में बदला लेकिन उसके भी नतीजे नहीं मिले. उन्हें कांग्रेस और गैर कांग्रेसवाद के नजरिए से देखने उनकी हस्ती के साथ अन्याय बन कर रह जाता है.

कार्यक्रम के उपस्थिति लोग शालिनी सिंह पटेल प्रदेश अध्यक्ष जनता दल यूनाइटेड महिला मोर्चा उत्तर प्रदेश, रवींद्र कुमार भारतीय प्रदेश अध्यक्ष जनता दल यूनाइटेड श्रमिक प्रकोष्ठ यूपी
राजेश कुमार अनुरागी कार्यवाहक जिला अध्यक्ष बांदा , राज कुमार मिश्रा जिला अध्यक्ष बौद्धिक प्रकोष्ठ जदयू बांदा, कालका प्रसाद यादव ब्लॉक अध्यक्ष जदयू तिंदवारी, गीता देवी,सीमा वर्मा, शिव चंद्र अवस्थी ,मनोज शर्मा, सुशीला वर्मा,कमलिया,गोधानिया वर्मा वीना वर्मा, नत्थू वर्मा,प्रभुदयाल वर्मा,।चंद्र शेखर, अर्चना विशकर्मा , आकाश पटेल, आदि लोग उपस्थिति रहे ।

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anupam

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