महोबा जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घुसे तीन सांड़, मची भगदड़; टला बड़ा हादसा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
महोबा जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घुसे तीन सांड़, मची भगदड़; टला बड़ा हादसा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

महोबा जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घुसे तीन सांड़, मची भगदड़; टला बड़ा हादसा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
महोबा (उत्तर प्रदेश): योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी 
उत्तर प्रदेश के महोबा स्थित जिला पुरुष चिकित्सालय में उस वक्त भारी अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब तीन बेकाबू सांड़ दौड़ते हुए सीधे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घुस आए। तेज रफ्तार से वार्ड के भीतर दाखिल हुए इन भारी-भरकम जानवरों को देखकर इलाज करा रहे मरीजों, उनके तीमारदारों और ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों में चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि सांड़ों के इस हमले में कोई मरीज या तीमारदार हताहत नहीं हुआ, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का खौफनाक मंजर
इमरजेंसी वार्ड में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल में सामान्य दिनों की तरह मरीजों का इलाज चल रहा था। कई गंभीर मरीज ड्रिप और ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। इसी दौरान बाहर मुख्य परिसर से लड़ते और दौड़ते हुए तीन सांड़ तेजी से इमरजेंसी गेट से भीतर घुस आए।
वार्ड के संकरे गलियारों और बेडों के बीच जानवरों की तेज धमाचौकड़ी से बेड हिलने लगे। जान बचाने के लिए तीमारदार अपने बीमार परिजनों को बेड से खींचकर सुरक्षित कोनों में छिपने लगे, तो कुछ लोग वार्ड से बाहर की तरफ भागे। अस्पताल कर्मियों और तीमारदारों ने कड़ी मशक्कत और सूझबूझ दिखाते हुए डंडों व तेज आवाज के सहारे करीब 15-20 मिनट के भीतर तीनों जानवरों को बाहर खदेड़ा। इस दौरान कुछ देर के लिए इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं।
सुरक्षा और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही
संवेदनशील और 24 घंटे सक्रिय रहने वाले इमरजेंसी वार्ड तक सांड़ों का बेरोकटोक पहुंच जाना सीधे तौर पर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है:
गेट पर गार्ड्स की अनुपस्थिति: अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और इमरजेंसी गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड्स की मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी भीड़-भाड़ वाले संवेदनशील वार्ड तक भारी जानवर बिना किसी रोक-टोक के कैसे दाखिल हो गए।
मरीजों की जान से खिलवाड़: यदि जानवर बेड पर चढ़ जाते या आक्रामक होकर हमला करते, तो गंभीर रूप से भर्ती मरीजों की जान जा सकती थी। वार्ड में लगा मेडिकल उपकरण भी क्षतिग्रस्त हो सकता था।
प्रशासनिक चुप्पी: घटना के बाद मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अस्पताल प्रबंधन परिसर की सुरक्षा चारदीवारी और मवेशियों की रोकथाम को लेकर उदासीन बना रहता है।
आवारा पशुओं की समस्या पर गहराता रोष
बुंदेलखंड समेत पूरे प्रदेश में अन्ना और आवारा मवेशियों की समस्या लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। गौशालाओं और मवेशी नियंत्रण के तमाम सरकारी दावों व बजट आवंटनों के बावजूद धरातल पर आवारा पशु सड़कों, चौराहों और अब सीधे सरकारी दफ्तरों व अस्पतालों में विचरण कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बीते वर्षों में आवारा पशुओं के नियंत्रण को लेकर कई योजनाएं शुरू की गईं, लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय बदतर होती जा रही है। सड़कों पर इन जानवरों के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, फसलें बर्बाद हो रही हैं और अब जीवन रक्षक संस्थानों (अस्पतालों) के भीतर भी आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं। लोगों ने जिला प्रशासन और शासन से अस्पताल परिसर में तत्काल सख्त सुरक्षा बैरिकेडिंग और आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए ठोस अभियान चलाने की मांग की है।
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