सड़क हादसे में घायलों को डेढ़ लाख रुपये तक मुफ्त इलाज, मददगार को 25 हजार तक पुरस्कार
सड़क हादसे में घायलों को डेढ़ लाख रुपये तक मुफ्त इलाज, मददगार को 25 हजार तक पुरस्कार

सड़क हादसे में घायलों को डेढ़ लाख रुपये तक मुफ्त इलाज, मददगार को 25 हजार तक पुरस्कार
जिला परिवहन पदाधिकारी ने की अपील, दुर्घटना पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुंचाने से बच सकती है जान
सहरसा। विकास कुमार प्रभारी 
सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और इलाज के खर्च के कारण होने वाली देरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री राहत योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत पात्र दुर्घटना पीड़ितों को अधिकृत अस्पतालों में सात दिनों तक डेढ़ लाख रुपये तक का नकदरहित उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। वहीं, दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद कर अस्पताल पहुंचाने वाले पात्र नागरिकों को 25 हजार रुपये तक पुरस्कार दिया जा सकता है।
इस संबंध में जिला परिवहन पदाधिकारी सुजीत कुमार बरनवाल ने जिलेवासियों से दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद का शुरुआती समय घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए घायल को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सेवा तथा पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
अधिकृत अस्पतालों में मिलेगा नकदरहित उपचार:
जिला परिवहन पदाधिकारी के अनुसार, योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अधिकृत अस्पतालों में अधिकतम सात दिनों तक डेढ़ लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिल सकती है। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद पीड़ित और उसके परिवार पर पड़ने वाले अचानक चिकित्सा खर्च के बोझ को कम करना है।
जिला परिवहन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सहरसा जिले में जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल सिमरी बख्तियारपुर, सूर्या अस्पताल, प्रांजल श्री अस्पताल, लॉर्ड बुद्धा कोसी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, श्री नारायण चिकित्सा संस्थान एवं अस्पताल, एसआरबी अस्पताल, महावीर सबलाइम अस्पताल, नयन ज्योति नेत्र चिकित्सा केंद्र तथा प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार की सुविधा के संबंध में जानकारी दी गई है। संबंधित अस्पताल में योजना के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध होने की पुष्टि कर लेना जरूरी है।
घायल की मदद करने वालों को मिलेगा पुरस्कार:
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए नेक राहगीर पुरस्कार की व्यवस्था है। निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार, मददगार नागरिक को 25 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जा सकती है। ऐसे नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिला स्तर पर सम्मानित करने का भी प्रावधान है।
जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि दुर्घटनास्थल पर भीड़ लगाने या वीडियो बनाने के बजाय घायल व्यक्ति की सहायता को प्राथमिकता देनी चाहिए। आपात स्थिति में 112 नंबर पर फोन कर सहायता मांगी जा सकती है। यदि घायल की गर्दन या रीढ़ में चोट लगने की आशंका हो, तो उसे अनावश्यक रूप से नहीं हिलाना चाहिए तथा आपातकालीन सेवा के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
दुर्घटना में मृत्यु पर मुआवजे का प्रावधान:
जिला परिवहन कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों और मृतकों के आश्रितों के लिए विभिन्न सहायता एवं मुआवजा योजनाएं भी लागू हैं। ऐसे मामलों में, जहां दुर्घटना करने वाले वाहन की पहचान नहीं हो पाती है, निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार मृतक के आश्रितों को दो लाख रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान है।
यदि दुर्घटना करने वाले वाहन की पहचान हो जाती है, तो मृतक के पात्र आश्रित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, बिहार में सामूहिक सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर लागू सरकारी नियमों के अनुसार मृतक के आश्रितों को चार लाख रुपये तक अनुग्रह अनुदान देने की व्यवस्था बताई गई है।
योजना के अंतर्गत अपंजीकृत अस्पताल में उपचार तथा अन्य सहायता के मामलों में राशि, पात्रता और भुगतान की प्रक्रिया संबंधित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के अनुसार होगी। सहायता के लिए दुर्घटना संबंधी प्रतिवेदन, चिकित्सकीय अभिलेख, मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील:
जिला परिवहन पदाधिकारी सुजीत कुमार बरनवाल ने वाहन चालकों से दोपहिया वाहन चलाते समय मानक हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सुरक्षा पट्टी लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने तथा नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने की अपील की। उन्होंने वाहन चलाते समय चलभाष का उपयोग नहीं करने और नाबालिग बच्चों को मोटर वाहन नहीं चलाने देने की भी सलाह दी।
उन्होंने कहा कि वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और वाहन चलाने का अनुज्ञप्ति पत्र सहित सभी जरूरी दस्तावेज अद्यतन रखने चाहिए। यातायात संकेतों का पालन करना और सावधानीपूर्वक वाहन चलाना दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण है।
जिला परिवहन पदाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करना मानवता की सेवा है। समय पर अस्पताल पहुंचाने का एक छोटा-सा प्रयास किसी की जान बचा सकता है और एक परिवार को उजड़ने से रोक सकता है।
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