बबेरू CHC में NHM संविदा कर्मचारियों की तीन दिवसीय पूर्ण बंदी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप; मरीज बेहाल
बबेरू CHC में NHM संविदा कर्मचारियों की तीन दिवसीय पूर्ण बंदी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप; मरीज बेहाल

बांदा: बबेरू CHC में NHM संविदा कर्मचारियों की तीन दिवसीय पूर्ण बंदी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप; मरीज बेहाल
सब-हेडिंग: समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण सहित चार सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे एएनएम, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और आयुष डॉक्टर।
बबेरू (बांदा): योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी 
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बबेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत तैनात संविदा कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर तीन दिवसीय पूर्ण बंदी हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों के इस सामूहिक कार्य बहिष्कार से अस्पताल की पूरी व्यवस्था पटरी से उतर गई है और दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ओपीडी से लेकर लैब तक कामकाज ठप
एनएचएम के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल में एएनएम, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और आयुष डॉक्टरों सहित लगभग सभी संविदा स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। मंगलवार को कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में कामकाज पूरी तरह बंद कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सामान्य ओपीडी, पैथोलॉजी जांच, दवा वितरण और टीकाकरण जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है।
”सिर्फ आश्वासन मिला, ठोस समाधान नहीं”
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी वाजिब मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के सामने गुहार लगाते आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठा आश्वासन ही थमा दिया जाता है। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें:
समान कार्य, समान वेतन: नियमित कर्मचारियों के बराबर काम करने के आधार पर समान वेतनमान लागू किया जाए।
नियमितीकरण: वर्षों से सेवा दे रहे सभी एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी (रेगुलर) किया जाए।
गृह जनपद स्थानांतरण: कर्मचारियों के लिए गृह जिले में तबादले (होम डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर) की स्पष्ट नीति बनाई जाए।
सामाजिक सुरक्षा: सभी संविदा कर्मियों को ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) का पूरा कानूनी लाभ सुनिश्चित किया जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं के अचानक चरमराने से क्षेत्रीय जनता में रोष है, वहीं प्रशासन की ओर से अब तक कर्मचारियों से वार्ता कर गतिरोध समाप्त करने की दिशा में कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।
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