अयोध्यावासी वैश्य समाज को OBC में शामिल करने की मांग तेज, 30 वर्षों से हो रही अनदेखी।
अयोध्यावासी वैश्य समाज को OBC में शामिल करने की मांग तेज, 30 वर्षों से हो रही अनदेखी।

अयोध्यावासी वैश्य समाज को OBC में शामिल करने की मांग तेज, 30 वर्षों से हो रही अनदेखी।
पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के बावजूद राजनीतिक कारणों से अटका है फैसला
85% आबादी रोज कमाने-खाने पर निर्भर, समाज ने दिया अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का हवाला
कसौधन, साहू और हलवाई जैसी जातियों की तर्ज पर मांगा जा रहा है अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा
उत्तर प्रदेश: अयोध्यावासी वैश्य समाज (जिन्हें अवध बनिया, गुप्ता और कौशल भी कहा जाता है) ने राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में शामिल होने की अपनी मांग को एक बार फिर से मुखर कर दिया है। पूरे उत्तर प्रदेश में निवास करने वाले इस समाज का कहना है कि वे आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से बेहद पिछड़े हुए हैं, लेकिन पिछले 30 वर्षों से उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है।
दयनीय है आर्थिक और सामाजिक स्थिति
समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, अयोध्यावासी वैश्य समाज की लगभग 85 प्रतिशत आबादी रोज कमाने और खाने वाले वर्ग से आती है। इनमें से अधिकांश लोग फुटपाथ पर रेहड़ी और ठेला लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। हालत यह है कि 90 प्रतिशत परिवार क्रीमी लेयर की सीमा से बहुत नीचे जीवन यापन कर रहे हैं और 85 फीसदी लोगों के पास रहने के लिए मात्र एक कोठरी है।
आयोग की संस्तुति के बावजूद फाइलों में दबा है मामला
समाज की मांग पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने सर्वेक्षण किया था और 14 मार्च 2012 को अयोध्यावासी वैश्य को ओबीसी सूची में शामिल करने की आधिकारिक संस्तुति भी की थी। समाज का आरोप है कि आयोग की संस्तुतियां बाध्यकारी होने के बावजूद राजनीतिक कारणों से इसे अब तक लागू नहीं किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि इस रिपोर्ट को कभी मंत्री परिषद या राज्यपाल महोदय के समक्ष रखा ही नहीं गया।
समानता के अधिकार का हनन
समाज का तर्क है कि वैश्य वर्ग की अन्य उपजातियां जैसे— कसौधन, शिवहरे, मोदनवाल, साहू और हलवाई आदि को पहले ही ओबीसी सूची में शामिल किया जा चुका है। इन जातियों के साथ अयोध्यावासी वैश्य समाज की रिश्तेदारियां (रोटी-बेटी का संबंध) होती हैं और उनका सामाजिक स्तर भी इन्हीं के समतुल्य है। संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए समाज ने कहा है कि जन्म और जाति के आधार पर उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
वर्ष 2021-22 में इस समाज को ओबीसी में शामिल किए जाने की उम्मीद जगी थी, लेकिन मानक पूरे करने के बावजूद उन्हें निराशा ही हाथ लगी। अब समाज ने सरकार से मांग की है कि पूर्व में आयोग द्वारा पारित निर्णयों का सम्मान करते हुए अयोध्यावासी वैश्य समाज को अविलंब अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया जाए ताकि उन्हें भी मुख्यधारा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
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