आपूर्ति विभाग नरैनी बना मयखाना! दफ्तर में ‘प्राइवेट युवकों’ का कब्जा, राशन कार्ड के नाम पर गरीबों से वसूली
आपूर्ति विभाग नरैनी बना मयखाना! दफ्तर में 'प्राइवेट युवकों' का कब्जा, राशन कार्ड के नाम पर गरीबों से वसूली

बांदा: आपूर्ति विभाग नरैनी बना मयखाना! दफ्तर में ‘प्राइवेट युवकों’ का कब्जा, राशन कार्ड के नाम पर गरीबों से वसूली ।
योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी
नरैनी तहसील के सप्लाई ऑफिस में बाहरी युवकों पर मनमानी और दबंगई का आरोप।
दफ्तर में शराब पीने, गाली-गलौज करने और 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की शिकायत।
कोटेदारों को धमकाने और अधिकारियों के नाम पर पैसे मांगने का भी गंभीर आरोप।
जिलाधिकारी (डीएम) से कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।
नरैनी/बांदा:
तहसील नरैनी स्थित आपूर्ति विभाग (सप्लाई ऑफिस) इन दिनों अपने कामकाज के बजाय कथित भ्रष्टाचार और वहां सक्रिय ‘प्राइवेट युवकों’ की मनमानी को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि सरकारी कार्यालय पर कुछ अनधिकृत बाहरी युवकों ने कब्जा जमा लिया है। ये युवक कथित तौर पर कार्यालय में शराब पीकर हंगामा करते हैं और गरीब व जरूरतमंद लोगों से राशन कार्ड बनवाने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं।
गरीबों और कोटेदारों से अवैध वसूली का खेल
शिकायतकर्ताओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, दफ्तर में बैठे ये निजी युवक राशन कार्ड बनवाने आने वाले ग्रामीणों से सुविधा शुल्क के नाम पर 2,000 रुपये तक की मांग करते हैं। मामला सिर्फ आम जनता तक ही सीमित नहीं है; कोटेदारों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने भी आरोप लगाया है कि ये युवक फोन कर उच्च अधिकारियों का नाम लेते हैं और कोटेदारों पर अवैध वसूली के लिए दबाव बनाते हैं। विरोध या शिकायत करने पर उन्हें सीधे तौर पर धमकियां दी जाती हैं।
सरकारी कार्यालय की गरिमा तार-तार
कार्यालय के भीतर शराब पीने और अभद्रता करने के आरोपों ने सरकारी कार्यस्थल की गरिमा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आम जनता का कहना है कि इन बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है और उन्हें बिना वजह परेशानी उठानी पड़ रही है। वायरल हो रहे कुछ वीडियो भी कार्यालय के भीतर की कथित अव्यवस्था और अनुशासनहीनता की ओर इशारा कर रहे हैं।
*डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर कई बार जिलाधिकारी समेत संबंधित विभागीय अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आरोप है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं ने
*प्रशासन से निम्नलिखित मांगे की हैं:
1.मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच की जाए।
2.सरकारी कार्यालय में अनधिकृत रूप से बैठे निजी लोगों की भूमिका की पड़ताल हो।
3.राशन कार्ड और कोटेदारों से संबंधित कार्यों में अवैध वसूली करने वाले दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
*विभागीय अधिकारियों के पक्ष का इंतजार
फिलहाल, लगाए गए इन गंभीर आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले में संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी।
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