बांदा में भारी जलभराव: अतिक्रमण हटाओ, नाले चौड़े करो, वरना पूरा शहर डूबेगा!
बांदा में भारी जलभराव: अतिक्रमण हटाओ, नाले चौड़े करो, वरना पूरा शहर डूबेगा!

बांदा में भारी जलभराव: अतिक्रमण हटाओ, नाले चौड़े करो, वरना पूरा शहर डूबेगा!
योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी
नगर पालिका परिषद और माननीयों को तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता, नहीं तो भविष्य में मचेगा विनाश!
नगर पालिका परिषद बांदा के सभी वार्डों में लगातार हो रहे भारी जलभराव से चारों तरफ त्राहि-त्राहि मची है। माननीयों, जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद, सभासदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। जलभराव की सबसे बड़ी वजह यह है कि वर्तमान और दूरगामी चीजों की लगातार अनदेखी की जा रही है और जानबूझकर आम जनता को परेशान किया जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक वर्ष बारिश के चार महीनों में आम जनता और सरकार को करोड़ों-अरबों रुपए की लगातार क्षति होना हमारी पर्सनालिटी, क्षमता और प्लान पर भारी प्रश्नचिन्ह लगाता है।
भारी जलभराव के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला जाए तो पिछले 15-20 वर्षों में 5-7 दर्जन से अधिक नए मोहल्ले आबाद हुए और कई किलोमीटर तक प्लाटिंग करके जमीनों को बराबर कर दिया गया, जिसके कारण हजारों की संख्या में छोटे-बड़े तालाब, पोखरे, गड्ढे और बारिश के पानी को समा लेने वाले स्रोत खत्म हो गए। अनियोजित प्लाटिंग के कारण पानी इकट्ठा होने के सभी स्रोतों को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जिसका नतीजा बारिश के मौसम में लगातार हो रहा जलभराव है।
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब केवल एक ही उपाय है कि मोहल्लों से निकलने वाले सभी नालों का चौड़ीकरण 15 से 20 फीट और सभी बड़े नालों का चौड़ीकरण 30 से 40 फीट अनिवार्य रूप से किया जाए। शहर में प्लेटिंग होने के कारण बारिश का पानी नालियों के माध्यम से ही नालों में जाता है। 25-30 वर्षों पहले बने हुए नगर के सभी नाले वर्तमान समय में पूरी तरह से अपर्याप्त हैं क्योंकि उनमें बारिश का पानी समा जाने की क्षमता ही नहीं है। 10 से 15 मिनट की तेज बारिश में ही जनपद के अधिकतर नाले ओवरफ्लो होकर शहर को अपनी चपेट में ले लेते हैं और शहर का अधिकांश हिस्सा टापू की तरह नजर आने लगता है।
इसमें सबसे बड़ा दोष नगर पालिका परिषद का है। नगर के किसी भी वार्ड में पानी की पाइपलाइन सभी गलियों में नहीं है, नतीजा 5-10 फीट गहरी नालियां भी पूरी तरह से सिल्ट से भरी हैं और पानी के पाइप जाने के कारण उनकी सफाई पिछले कई वर्षों से नहीं हो पा रही है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि सभी वार्डों में नागरिकों के द्वारा नाले और नालियों पर भारी अतिक्रमण कर लिया गया है। नगर पालिका परिषद के द्वारा अतिक्रमण न तोड़ने के कारण लोगों ने अब नालों पर बड़े-बड़े मकान, कमरे, गेस्ट हाउस, दुकानें और कारखाने बनाकर पानी की निकासी को पूरी तरह से बंद कर दिया है। 200-400 लोगों के अवैध अतिक्रमण के कारण हजारों की आबादी जलभराव का दंश झेल रही है।
प्रयागराज में हुए भारी जलभराव के बाद युद्ध स्तर पर अतिक्रमण तोड़ा जा रहा है और नालों की मशीनों द्वारा सफाई कराई जा रही है, परंतु बांदा जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद उससे सीख नहीं ले रहा है। सबसे खराब स्थिति लोहिया पुल की है, जहां पर दर्जनों वार्डों का पानी आकर तीन-चार दर्जन उप-मोहल्लों को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लेता है। जिस लोहिया पुल को 35-40 फीट चौड़ा होना चाहिए था, वहां पर रेलवे द्वारा दोहरीकरण करने के बाद स्थिति और भी भयानक हो गई है।
जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद और माननीयों को यह समझना पड़ेगा कि हजारों तालाबों को खत्म करके प्लाटिंग कर दी जाएगी, तो बिना नालों का चौड़ीकरण किए पानी की निकासी आखिर कहां से होगी? यदि आज नालों का चौड़ीकरण नहीं किया गया, तो अगले 5-10 वर्षों के बाद 10000 से अधिक मकान इसकी चपेट में आएंगे और करोड़-अरबों रुपए की हानि होगी। तेज और मूसलाधार बारिश में पानी निकासी के लिए जगह चाहिए और अगर यह जगह उसे न मिली तो यह बांदा जनपद के लिए आने वाले समय की एक बहुत बड़ी मुसीबत और आपदा होगी।
इस समस्या से निजात पाने के लिए सभी माननीयों, सांसद, विधायक, अध्यक्ष और सभासदों को आगे आकर इस पर काम करना पड़ेगा। केवल जिलाधिकारी और अधिशासी अधिकारी को दोष देना पूरी तरह से गलत है क्योंकि वे कुछ समय के लिए आते हैं, जबकि हमारे जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता इसी बांदा की मिट्टी में पैदा हुए हैं। आज बांदा नगर वासियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि जलभराव के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, सड़कें टूट रही हैं, घरों में पानी भरने से भारी नुकसान हो रहा है, बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचने में कठिनाई हो रही है और चारों तरफ गंदगी, कीचड़ और बीमारियां फैल रही हैं।
अब समय आ गया है कि नालों का चौड़ीकरण अनिवार्य रूप से बड़े पैमाने पर किया जाए जिससे शहरीकरण, व्यापार और बांदा का विकास प्रभावित न हो। अगर अब भी हमारे कानों पर जूं नहीं रेंगीं और नालों का चौड़ीकरण अगले 40-50 वर्षों की कार्य योजना बनाकर नहीं किया गया, तो निश्चित रूप से आने वाले समय में पूरा बांदा डूबेगा। प्रकृति छेड़छाड़ करने वालों को हमेशा सिखाती रही है।
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