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रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत कब से हुई

रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत कब से हुई

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*रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत कब से हुई*

*आलोक बादल आवाज़ इंडिया लाइव कोसी प्रमंडल सहरसा*

रक्षाबंधन की शुरुआत कब से हुई, ये तो निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता,
लेकिन इसके पीछे कई पौराणिक कथाएँ और कहानिया सुनने को मिलती है। ऐसे भी कहा जाता है कि महा भारत काल मे इस पर्व का वर्णन है।
भविष्य पुराण मे भी रक्षाबंधन का वर्णन मिलता है, जिसमें बताया गया है कि एक बार देव और दानवो में युद्ध हुआ, तो दानव हावी होने लगे। तब भगवान इंद्र घबराकर बृहस्पति के पास पहुचे। इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने रेशम का धागा अपने पति के हाथ पर बांध दिया था। और वह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। रक्षाबंधन का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्यता से जुड़ा हुआ भी बताया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है इस त्यौहार की शुरुआत लगभग छह हजार साल पहले हुई थी। ये भी सुनने को मिलता है। कि रक्षाबंधन की शुरुआत सबसे पहले रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूं ने की थी। इस त्योहार एक और पौराणिक साक्ष्य मिलता है। जो बताता है कि रक्षाबंधन का त्योहार भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ा हुआ है। अगर देखा जाए तो रक्षाबंधन पर्व के इतिहास से जुड़े हुए कई प्रसंग हमारे सामने आते हैं।

*पवित्र प्रेम का प्रतीक है रक्षाबंधन*

रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के बीच पवित्र प्रेम के प्रति को सदियों से दर्शाता हुआ चला आ रहा है।
रक्षाबंधन का अर्थ होता है। रक्षा का बंधन। जब एक भाई रक्षासूत्र के समान राखी अपनी कलाई में बांध लेता है, तो वह इस पवित्र प्रेम बंधन से बंध जाता है। और अपने प्राणों की चिंता किए बिना भी हर-हाल में अपनी बहन की रक्षा करता है।
रक्षाबंधन भाई और बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक के साथ-साथ भाई-बहन के रिश्ते की अटूट डोर का भी प्रतीक है।
रक्षाबंधन का त्योहार भावनाओं और संवेदनाओ का त्योहार है, जिसमे हर भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन उसे देता है।
रक्षाबंधन का त्योहार इसलिए मनाया जाता है। क्योंकि ये हर भाई को अपनी बहन के प्रति उसके कर्तव्य को याद दिलाता है। रक्षाबंधन के मौके पर हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसको हमेशा खुश रहने और स्वस्थ रहने की कामना करती हैं।
भाई भी अपनी बहन को बदले मे वचन देता है। कि कोई भी विपत्ति आ जाये वो भी अपनी बहन की हमेशा रक्षा करेगा।

बहन :- आरती कुमारी, संजन कुमारी, कोमल कुमारी, मौसम कुमारी, गुंजन कुमारी,मधुचंदा कुमारी
इत्यादि बिहार की सभी बहनो को मैं आलोक बादल वादा करता हूँ। कि हर दु:ख सु:ख में आप सभी बहन का साथ खड़ा रहूँगा।

anupam

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