बाँदा पवई गौशाला में नहीं थम रहा गौवंशों की मौत का सिलसिला कुम्भकर्णी नींद में सोया प्रशासन

योगेंद्र प्रताप सिंह ब्यूरो चीफ
बाँदा जनपद के अतर्रा तहसील अंतर्गत के ग्राम पंचायत पवई स्थित गौशाला में व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण लगातार गौवंशों की मौत हो रही है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब तक आधा सैकड़ा गौवंश भूंख,बीमारी,ठंड से दम तोड़ चुकी है।ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि गौशाला संचालकों की लापरवाही से आए दिन गौवंश की मौत हो रही है।स्थानीय प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।गायों की मौत से ग्रामीण भी प्रशासन से नाराज है।ग्रामीण इससे भी नाराज है कि गौवंशों की मौत हो जाने पर गौशाला में इनके शव को छोड़ दिया जाता है जिसे कुत्ते और कौवे नोंच- नोंच कर खाते है और सारे इलाके में दुर्गंध फैलती है।पवई गौशाला में एक डेढ़ माह के भीतर 60-70 गाय-गौवंश प्रबंधकीय अव्यवस्थाओं के चलते मौत का ग्रास बन चुके है।
*बदइंतजामी के कारण प्रतिदिन दम तोड़ रही 2-3 गाय*
प्रशासन की कथित अनदेखी के चलते पवई ग्राम पंचायत स्थित स्थाई गौशाला में गायों की हालत दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है।गौशाला में बदइंतजामी के कारण प्रतिदिन 2-3 गाय लगातार दम तोड़ रही है और उनका कुशल क्षेम जानने के लिए कोई नहीं है।कड़कड़ाती ठंड व सारा दिन कीचड़ में खड़े रहने के चलते गौवंश बीमारी की चपेट में आकर वहीं तड़प-तड़प कर मजबूरन प्राण त्याग देते है।
*गौवंश के प्रति सरकार व प्रशासन का बेरुखा रवैया चिंताजनक*
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के लोगों से गऊ संरक्षण हेतु गौशाला के माध्यम से करोड़ों रुपए इकठ्ठा करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार इस पैसे का कितना कारगर इस्तेमाल गौधन की संभाल हेतु कर रही है इस बात का अंदाजा उक्त गौशाला की दयनीय हालत को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है जोकि प्रशासन यानी सरकारी अधिकारियों के अधीन चल रही हैं। पर्याप्त धन राशि होने के बावजूद गाँव पवई में प्रबंधकीय अव्यवस्थाओं के चलते आश्रित गौवंशों के प्रति सरकार व प्रशासन का बेरुखा रवैया बहुत ही चिंताजनक है।
*गौशाला को जाने वाला मार्ग भी अनदेखी का शिकार*
गौरतलब है कि पवई गौशाला को जाता मार्ग भी सरकार तथा प्रशासन की कथित अनदेखी का शिकार है।क्योंकि वहाँ जमा कीचड़ के कारण किसी के लिए भी गौशाला तक पहुंचना बड़ी चुनौती है।गौशाला तक जाने वाला मार्ग लंबे अरसे से जर्जर व खस्ताहाल बना हुआ है जिसके कारण गौशाला के पशुओं के लिए बरसात होने पर भूसा, पयार नहीं पहुंचाया जा सकता।उक्त मार्ग निर्माण के लिए प्रशासनिक आदेशों का ग्राम प्रधान को इंतजार है।

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