फिरोजाबाद : *वैदिक रहस्य*

*वैदिक रहस्य*
पंडित श्याम शर्मा मंडल प्रभारी
* बदहजमी से निजात पानें के लिए टमाटर के जूस में सेंधा नमक और सौंठ मिलाकर पीने से बदहजमी की समस्या से राहत मिलती है।
* टमाटर के जूस में काली मिर्च और इलायची के दानों का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से दिल घबराना जी मिचलाना में आराम मिलता है।
* पाचन क्रिया को बेहतर रखने के लिए टमाटर के जूस में अदरक और नींबू का जूस मिलाकर, थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर पीने से पाचन सही रहता है।
* टमाटर के जूस का यदि रोज सेवन किया जाएं तो पेट संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है।
* टमाटर के सूप में काली मिर्च डालकर नियमित पीने से कब्ज की समस्या से निजात मिलती है। साथ ही चेहरे पर चमक और शरीर में चुस्ती बरकरार रहती है।
* कफ, खांसी से परेशान है, तो टमाटर के सूप में पिसी हुई काली मिर्च का पाउडर मिलाएं या लाल मिर्च का इसे गर्म-गर्म रोजाना पीने से कफ, खांसी, बलगम की परेशानी से राहत मिलती है।
[20/07, 6:52 PM] Savitanand: *आयुर्वेदिक सलाह / उपाय*
दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए। सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसे मुक्त होने का आपको अनुभव होगा। यह स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके शरीर की नसे मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा।
हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं। पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पुरी तरह से ठीक हो जाएगी। पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।
बहुत से लोगों के लाखों रुपए इस उपाय से बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डेड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं। और इसके पीछे जो विज्ञान है और जो आयुर्वेद है
*यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू ये दो चीजें चाहिए। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो। उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें। फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर चलेगा। कपूर की तीन गोली बारीक पीसकर उसका पाउडर बना लें। यह भी उस पानी में मिला लें। फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।*
जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसे मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में २७२ प्रकार के प्रेशर पॉइंट होते हैं जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं।
*यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन २७२ प्रकार के प्रेशर पॉइंट्स को मुक्त कर देता है और इससे शरीर की सारी नसे एकदम से री–एक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से मुक्त हो जाती हैं ऐसा अनुभव होता है।*
इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डालकर रखने है। और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते है।
*इससे हाथ*, *पैर में होने* *वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं*।
*और*
*कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह खुल जाएगी। और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है। जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी बंद हो जाएगी, पानी में पैर रखने के साथ ही। अगर स्नायु अकड़ गये हो या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।*
इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है और यह सरल रूप से किया जा सकता है।
पांच दिन यह उपाय करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है।
[20/07, 6:52 PM] Savitanand: *8 तरह के तेल और उनके आश्चर्यजनक फायदे…*
अलसी का तेल : इसके तेल में विटामिन ‘ई’ पाया जाता है। कुष्ठ रोगियों को इसके तेल का सेवन करने से अत्यंत लाभ होता है। आग से जले हुए घाव पर इसके तेल का फाहा लगाने से जलन और दर्द में तुरंत आराम मिलता है। अलसी को भूनकर बकरी के दूध में पकाकर पुल्टिस बांधने से फोड़े का दर्द बंद हो जाता है और फोड़ा फूट जाता है।
एरंड का तेल : एरंड के तेल को एरंड और केस्टर ऑइल कहते हैं। इस तेल का सेवन हृदय रोग, पुराना बुखार, पेट के वायु संबंधी रोग, अफरा, वायुगोला, शूल, कब्जियत और कृमि को दूर कर देता है। यह भूख को बढ़ाने वाला तथा यौवन को स्थिर रखने वाला होता है। शुद्ध तेल को एक छंटाक अथवा आधी छंटाक पीने से यह जुलाब का काम करता है। बेसन में इसके तेल को मिलाकर शरीर पर उबटन करने से चमड़ी का रंग साफ हो जाता है।
जैतून का तेल : जैतून के तेल को ऑलिव ऑइल कहते हैं। शरीर पर इसकी मालिश सर्दी को दूर करने वाली, सूजन मिटाने वाली, लकवा, गठिया, कृमि और वात रोगों से छुटकारे के लिए अत्यंत हितकारी होती है। नारियल का तेल : नारियल के तेल में भी विटामिन ‘ई’ पाया जाता है। यह तेल ठंडा, मधुर, भारी, ग्राही, पित्त नाशक तथा बालों को बढ़ाने वाला होता है। इसे बालों में लगाने से बाल चिकने, काले, लंबे हो जाते हैं।
सरसों का तेल : सरसों के तेल में विटामिन ए, बी व ई पाए जाते हैं। यह गर्म होता है। इसमें नमक मिलाकर दांतों में मलने से दाँत दर्द, पायरिया रोग दूर होता है और दांत मजबूत होते हैं।
बिनौला तेल : इसके सेवन से स्तनों में अधिक दूध उत्पन्न होता है। फोड़ा, फुँसी, खुजली, सूजन, जोड़ों का दर्द, गठिया आदि रोगों को यह दूर करता है।
राई का तेल : यह चर्म रोग को दूर करने वाला होता है। इसे सरसों के तेल की तरह ही खाने के उपयोग में लिया जाता है।
तिल का तेल : तिल का तेल स्वास्थ्य के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। यह मधुर, सूक्ष्म, कसैला, कामशक्ति बढ़ाने वाला होता है। इसके तेल में हींग और सौंठ मिलाकर गर्म करके शरीर पर मालिश करने से कमर, जोड़ों का दर्द, लकवा रोग मिट जाता है। यह खाने से ज्यादा मालिश में गुणकारी होता है।
[20/07, 6:52 PM] Savitanand: 🔆🔅🔆🔅🔆🔅🔆🔅🔆
*💥उड़द दाल क्या है? (What is Urad Dal in Hindi?)*
उड़द काली तथा हरी आदि कई तरह की होती है। सब प्रकार के उड़दों में काले रंग की उड़द उत्तम मानी जाती है। *वैद्यक ग्रन्थों में अनेक पौष्टिक प्रयोगों में उड़द की प्रशंसा की गई है। वास्तव में आमिष भोजियों के लिए जिस प्रकार मांस पुष्टिदायक माना जाता है, उसी प्रकार या उससे बढ़कर निरामिष भोजियों के लिए माष अर्थात् उड़द मांसवर्धक और पुष्टिकर होता है।*
उड़द दाल के फायदों (benefits of urad dal) के बारे में जितना बोले कम होगा, क्योंकि इसमें कैल्शियम, पोटाशियम, आयरन, फैट, जिंक जैसे अनेक पौष्टिक तत्व हैं जो न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बल्कि यौन स्वास्थ्य के परेशानियों को सुधारने में भी मदद करते हैं।
*उड़द प्रकृति से मधुर, गर्म तासीर की होती है। 👉✅➖उड़द की दाल वात कम करने वाली, शक्तिवर्द्धक, खाने में रुची बढ़ाने वाली, 👉➕कफपित्तवर्धक, शुक्राणु बढ़ाने वाली, वजन बढ़ाने वाली,रक्तपित्त के प्रकोप को कम करने वाली, मूत्र संबंधी समस्या में फायदेमंद, तथा परिश्रम करने वालों के लिए उपयुक्त आहार होता है। इसका प्रयोग पाइल्स, सांस की परेशानी में लाभप्रद होता है। इसके अलावा उड़द की जड़ अनिद्रा की बीमारी में बहुत फायदेमंद होती है क्योंकि इसके सेवन से नींद आती है।*
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[20/07, 6:52 PM] Savitanand: *क्या आप खाली पेट निकलते हैं घर से, जानिए 5 नुकसान*
1.एसिडिटी- जी हां, बहुत अधिक देर तक भूखे पेट रहने से पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या होने लगती है। समस्या अधिक होने पर हार्ट पर भी असर होने लगता है। इसलिए घर से हमेशा कुछ खाकर ही जाना चाहिए, ताकि भूख लगने पर कहीं भटकना नहीं पड़ें।
2. जी घबराना- कुछ लोग होते हैं जिन्हें भूख बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होती है। जल्दबाजी में वे बिना कुछ खाए ही घर से निकल जाते हैं। कभी अचानक से भूख लगने लग जाती है। कुछ नहीं खाने पर जी घबराने लगता है, तो कभी उपके भी आने लगते हैं। इसलिए हमेशा कुछ खाकर ही घर से निकलें।
3. लू की चपेट में आना- कभी जरूरी काम से बाहर जाने पर सोचते हैं कि थोड़ी देर में आकर खा लेंगे। लेकिन घर आने तक उसका असर उल्टा हो जाता है। जी हां, खाली पेट दिन में बाहर निकलने से आपको लू भी लग सकती है। लू लगने से ही लोगों की जान भी चली जाती है।
4. ब्ल्ड प्रेशर लो- खाली पेट बाहर जाने से आपका बीपी भी कम हो सकता है। कई लोग पानी पी कर अपनी भूख मिटाने की कोशिश करते हैं। लेकिन शरीर को पानी के साथ कैलोरीज की भी जरूरत होती है। ऐसे में सिर्फ पानी से अपनी भूख नहीं मिटाएं।
5.बेहोश होना- आपने भी देखा होगा कई बार लोग खड़े-खड़े ही बेहोश हो जाते हैं क्योंकि खाली पेट गर्मी रहने से कमजोरी आ जाती है। ऐसे में शरीर को सही मानक में फाइबर और कार्ब्स की भी जरूरत होती है।
[20/07, 6:52 PM] Savitanand: मक्का के फायदे
घरेलू नुस्खे
भुट्टा या मक्का सेहत का खजाना है। भुट्टे को पोषण के हिसाब से बेहतरीन माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता बढ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है।
कार्न को एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत अच्छा है। आइए हम देखते हैं भुट्टे के फायदे के बारे में ओर जानकारी ।
भुट्टा या मक्का सेहत का खजाना है। भुट्टे को पोषण के हिसाब से बेहतरीन माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता बढ जाती है। पके हुए भुट्टे में पाया जाने वाला कैरोटीनायड विटामिन-ए का अच्छा स्रोत होता है। जो हमारी नजर के लिए काफी फायदेमंद होता है।
भुट्टे को पकाने के बाद उसके 50 प्रतिशत एंटी-ऑक्सीअडेंट्स बढ़ जाते हैं। पके हुए भुट्टे में फेरूलिक एसिड होता है जो कि कैंसर जैसी बीमारी में लड़ने में बहुत मददगार होता है। मक्के में कैरोटीन होता है जिसके कारण इसका रंग पीला होता है। इसके अलावा भुट्टे में मिनरल्स और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।
भुट्टे के लाभ
अनीमिया से बचाये
अनीमिया की बड़ी वहज विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की कमी होना है। मक्का में दोनों की भरपूर मात्रा तो होती ही है, साथ ही इसमें आयरन भी काफी मात्रा में होता है। आयरन नयी लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में बेहद जरूरी होता है। आयरन की कमी भी अनीमिया का कारण हो सकती है।
ऊर्जा बढ़ाये
कॉर्न को स्टार्च युक्त सब्जी माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है, जो आपको शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म ऊर्जा देता है। इसके साथ ही यह मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है। एक कप मक्का में 29 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होता है, जो अधिक शारीरिक गतिविधियां करते हैं। ऐसे लोगों को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। और तो और मक्का में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के पचने की गति धीमी होती है, इसलिए यह आपको ऊर्जा का संतुलित स्तर मुहैया कराता है। अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए व्यायाम से एक-दो घंटे पहले मक्का का सेवन करना चाहिए।
बैड कोलेस्ट्रॉल कम करे
अधिक वसायुक्त आहार से हमारे रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। इससे हमारे दिल की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है और हमें दिल की बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वीट कॉर्न यानी मक्का में विटामिन सी, केरोटेनोइड्स और बायोफ्लेवोनॉयड काफी मात्रा में होता है, जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करके रक्त प्रवाह को सुचारू बनाता है।
वजन बढ़ाने में मददगार
जिन लोगों का वजन कम है, उनके लिए मक्का बेहद फायदेमंद होता है। कम वजन वाले लोगों को सही प्रकार से अपना वजन बढ़ाने के लिए अधिक मात्रा में कैलोरी का सेवन करना पड़ता है। मक्का में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी भी पर्याप्त मात्रा में होती है। तो अगर आपका वजन कम है, तो आपका मक्का का सेवन जरूर करना चाहिए। याद रखिए एक कप मक्का में 130 कैलोरी होती है।
कैंसर से बचाये
कई शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि मक्का में पाये जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट्स कैंसर से बचाने में मददगार होते हैं। यह कैंसर फैलाने वाले फ्री-रेडिकल्स से लड़ते हैं और व्यक्ति की सेहत दुरुस्त रखने का काम करते हैं। और तो और इसमें मौजूद तत्व लिवर और स्तन कैंसर में विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।
मक्का के अन्य लाभ
खांसी के मरीजों के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद होता है। भुट्टा जलाकर उसकी राख पीस लीजिए। इसमें स्वादानुसार सेंधा नमक मिला लीजिए। हर रोज कम से कम चार बार एक चौथाई चम्मच हल्का गरम पानी के साथ फांक लीजिए। खांसी समाप्त हो जाती है।बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत फायदेमंद माना जाता है। ताजे दूधिया (जो कि पूरी तरह से पका न हो) मक्का के दाने पीसकर एक खाली शीशी में भरकर उसे धूप में रखिए। जब उसका दूध सूख कर उड़ जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए तो उसे छान लीजिए। इस तेल को बच्चों के पैरों में मालिश कीजिए। इससे बच्चों का पैर ज्यादा मजबूत होगा और बच्चा जल्दी चलने लगेगा।इस तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली होता है। हर रोज एक चम्मच तेल को चीनी के बने शर्बत में मिलाकर पीने से बल बढ़ता है।ताजा मक्का के भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमजोरी समाप्त हो जाती है।पथरी निकालने के लिए भी मक्का फायदेमंद है। भुट्टे और जौ को जलाकर राख कर लीजिए। दोनों को अलग-अलग पीस कर अलग-अलग शीशियों में भर लीजिए। एक कप पानी में एक-एक चम्मच मक्का और जौ की राख घोलें फिर छानकर इस पानी को पी लीजिए। इससे पथरी गल जाएगी और पेशाब में जलन नहीं होगी।टीबी के मरीजों के लिए मक्का बहुत फायदेमंद है। टीबी के मरीजों को हर रोज मक्के की रोटी खाना चाहिए। इससे टीबी के इलाज में फायदा होगा।
बरसात के मौसम में भुट्टा खाने का अपना अलग ही मजा होता है। मूवी देखते वक्त पॉपकार्न खाने से मूवी का मजा बढ जाता है। कार्न की विभिन्न प्रकार की रेसेपीज बनाई जाती है।
[20/07, 7:02 PM] Savitanand: 🌹🌹
*चंचल मन और भटकती बुद्धि*
★ एक समय की बात है कि एक आदमी के पास बहुत कीमती घोड़ा था। उसको प्रतिपल यह चिन्ता लगी रहती थी कि कहीं कोई उस घोड़े को चुरा न ले जाए।
एक दिन वह ऐसे नौकर की खोज में निकला जो कि रात भर जाग कर घोड़े का पहरा दे सके।
रास्ते में उसे एक व्यक्ति मिला जिसने उस आदमी से कहा कि आपके घोड़े की रक्षा के लिए मुझ जैसा उपयुक्त नौकर आपको और कोई नहीं मिल सकता। क्योंकि मैं रात भर सोता नहीं हूँ। मुझे सोचने की आदत है। मैं हर समय कुछ न कुछ सोचता ही रहता हूँ। घोड़े का मालिक प्रसन्न हुआ और उस व्यक्ति को अपने घर ले आया। उसने घोड़े को कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया और चाबी नौकर को दे दी।
रात्रि के 12 बजे मालिक ने सोचा कि कहीं नौकर सो तो नहीं गया। इस बात की पुष्टि कर लेने के लिए वह नौकर के पास पहुंचा और पूछा- “क्या कर रहे हो भाई, सो तो नहीं रहे हो।” नौकर ने कहा कि नहीं, मैं सोया नहीं, मैं तो सोच रहा हूँ। मालिक आश्वस्त हुआ और बोला- “क्या सोच रहे हो?” नौकर ने कहा कि मैं यह सोच रहा हूँ कि जब दीवार में कील ठोकी जाती हैं तो जिस स्थान पर कील लगती है वहाँ की मिट्टी कहाँ चली जाती हैं? मालिक उसकी मूर्खता पर मुस्कुराया और साथ ही साथ आश्वस्त भी हुआ कि चलो नौकर तो ठीक मिल गया जो सोचता ही रहेगा, सोयेगा नहीं। मालिक ने कहा- ठीक है सोचते रहो। और वह वापस अपने घर में आ गया।
रात्रि के दूसरे पहर मालिक पुनः उस नौकर के पास यह देखने के लिए पहुंचा कि कहीं वह अब तो नहीं सो गया। परन्तु मालिक ने पाया कि नौकर अभी भी किसी गहन चिंतन में डूबा हुआ है। मालिक ने पूछा- “अरे भाई, अब क्या सोच रहे हो?” नौकर बोला- “मैं यह सोच रहा हूँ कि जब टूथपेस्ट को दबाया जाता है तब पेस्ट बाहर क्यों आ जाता है, भीतर की ओर क्यों नहीं जाता? मालिक ने कहा- हाँ, ठीक है। इसी तरह सोचते रहो।
सुबह चार बजे मालिक फिर आया और व्यक्ति से उसके चिन्तन का विषय पूछा। तो व्यक्ति ने कहा कि अब मैं एक अत्यंत गंभीर विषय पर विचार कर रहा हूँ। मालिक बोला- “वह कौन सा गंभीर विषय हैं?” नौकर ने कहा- “मैं यहाँ सारी रात बैठा रहा, सोया भी नहीं, कमरे को ताला भी लगा हुआ था, फिर घोड़ा गायब हुआ तो हुआ कैसे?”_
मालिक ने अंदर देखा तो घोडा वहां नहीं था।
शिक्षा :-
*● कहीं हम भी उस व्यक्ति की तरह सोचते ही न रह जायें और कहीं हमें पछताना न पड़े।*
*कहीं हम , कर्मों का हिसाब किताब चुकतु किये बिना इस दुनिया से विदा न हो जाएं*
*आइये, मन बुद्धि की एकाग्रता से अपने कर्मों का हिसाब किताब चुकता करें*
🌹🙏
[20/07, 7:02 PM] Savitanand: 🙏🏻🌹💞🌹🙏🏻
*16 जुलाई संक्रान्ति से:-सावन महीने के व्रत*
पहला सोमवार-19 -जुलाई
दूसरा सोमवार – 26-जुलाई
तीसरा सोमवार- 2- अगस्त
चौथा सोमवार. – 9- अगस्त
पांचवा सोमवार- 16 अगस्त
*24जुलाई गुरु पूर्णिमा से:-सावन महीने के व्रत*
पहला सोमवार- 26 जुलाई
दूसरा सोमवार- 02 अगस्त
तीसरा सोमवार- 09 अगस्त
चौथा सोमवार- 16 अगस्त
*जुलाई से दिसंबर तक के तयोहार*
12 जुलाई सोमवार जगन्नाथ यात्रा
24 जुलाई शनिवार गुरु पूर्णिमा
11 अगस्त बुधवार तीज
13 अगस्त शुक्रवार नाग पंचमी
22 अगस्त रवीवार रक्षाबंधन
30 अगस्त सोमवार जन्माष्टमी
10 सितंबर सोमवार गणेश चतुर्थी
07 अक्तुबर वीरवार नवरात्रे शुरू
13 अक्तुबर बुधवार अष्टमी
14 अक्तुबर वीरवार नवमी
15 अक्तुबर शुक्रवार दशहरा
24 अक्तुबर रवीवार करवाचौथ
28 अक्तुबर वीरवार अहोईअष्टमी
02 नवंबर मंगलवार धन्तेरस
04 नवंबर वीरवार दीपावली
05 नवंबर शुक्रवार गोवर्धन पूजा
05 नवंबर शुक्रवार विश्वकर्मा दिवस
06 नवंबर शनिवार भाई दूज
10 नवंबर शनिवार छठ पूजा
19 नवंबर शुक्रवार गुरु नानक जयंती
25 दिसम्बर शनिवार तुलसी पूजन दिवस
🙏🏻🌹💞🌹🙏🏻
[20/07, 7:12 PM] Savitanand: ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
आत्मीय परिजन,आप सभी को सादर प्रणाम 🙏!
*आज का सद्चिंतन*
*सत्य का अवलंबन*
ऐ अंधियारे का दीप, जा छोड़ना चाहे साथ छोड़ दें, बिना साथीयों के भी लोगों ने जिंदगी जीकर दिखाई है। किसी का प्यार, सहयोग और सहानुभूति न मिले तो भी काम चल जाएगा, क्योंकि ऐसे लोग भी दुनिया में बहुत है, जिन्हें इनमें से एक भी चीज न मिली और उनके बिना भी किसी प्रकार ज़िन्दगी पार कर लेने में समर्थ हुए।
सम्पदा के बिना कितनों का ही काम चल जाता है। तन ढकने और पेट भरने में जिन्हें कमी पड़ती रही, ऐसे लोग भी इस दुनियां में कम नहीं है।
मेरी चाह है कि हाथ से सत्य जाने न पाये । जिस सत्य को तलाशने और पाने के लिए मैंने कंकरीले, रेतीले रास्ते पर चलना स्विकार किया है , वह आत्म स्वीकृति किसी भी मूल्य पर, किसी भी संकट के समय डगमगाने न पाये।
सत्य का अवलंबन बना रहे क्योंकि उसकी शक्ति असीम है, मैं उसी के सहारे अपनी हिम्मत संजोये रहुंगा।
✍️ पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 पृष्ठ संख्या ३, अखण्ड ज्योति, मई – १९८५.
[20/07, 7:12 PM] Savitanand: सच कहा जाय तो अच्छे व्यवहार की शिक्षा हमें स्वयं से प्राप्त होती है।
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साधारण छोटी शिष्टतायें या शिष्टतापूर्ण व्यवहार जीवन के परिवर्तन का आधार बनती है। सच पूछा जाय तो अच्छे व्यवहार की शिक्षा हमें स्वयं से प्राप्त होती है।
यदि हम समझदार हैं, तो अपना ही अनुभव हमें इस स्वप्राप्त शिक्षा प्रदान कर देगा। यह शिक्षा किसी स्कूल-कॉलेज या पुस्तक से इतनी अच्छी तरह नहीं सीखी जा सकती, जितनी कि स्वयं की बुद्धि से।
सर्वप्रथम आप अच्छे श्रोता बनिये। हर मनुष्य अपनी ही कहना चाहता है, कोई किसी की बात सुनना नहीं चाहता।
आप पहले समझदारी से, दिल के साथ उसकी पूरी बात सुन तो लीजिये, उसे सब कुछ कह तो लेने दीजिये, उसे अपना हृदय तो हल्का कर लेने दीजिये, फिर तो वह व्यक्ति आपका बिना मोल का गुलाम हो जायेगा और तब आप उससे चाहे जो कुछ कहेंगे, वह ध्यान और प्रेम से आपकी बातें सुनेगा और मानेगा।
उसी प्रकार आप दूसरों की सम्मति का भी आदर कीजिये। कुछ लोग दूसरों की सम्मति सुनना ही नहीं चाहते। आपको उस व्यक्ति से मतभेद हो सकता है, पर आप में सहनशीलता तो होनी ही चाहिये।
“सुनें सबकी- करें मन की” उक्ति में भी यही बात बताई गई है। आपको विरोध ही, मत-भेद ही प्रकट करना है, तो खूबसूरती से, मिठास से, समझदारी से प्रकट करना चाहिये, यह तो आपके हाथ में है।
अपने सिद्धान्तों और सम्मतियों पर दृढ़ता के साथ स्थिर रहना बुरा नहीं है, लेकिन यह काम विनम्रता और प्रेमपूर्वक भी किया जा सकता है, न कि जोर-जबरदस्ती, लड़-झगड़ कर, गालियों के बल पर।
दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए हम उसके निकट पहुँच सकते हैं। उसकी आत्मीयता के कारण हम उसके वास्तविक, सच्चे स्वरूप को पहचानने में अधिक समर्थ होंगे।
विनम्र, दयालु, श्रेष्ठ, परोपकारी होने में हमें कौन सा पैसा खर्च करना पड़ता है? केवल इच्छा मात्र की आवश्यकता है। मनुष्य के चरित्र की सबसे बड़ी परीक्षा इसी के द्वारा सम्भव है, कि उसका व्यवहार दूसरों के प्रति कैसा होता है?
गरीब-अमीर, मूर्ख, राजा, पुरोहित, व्यापारी, विद्यार्थी, स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध, युवा सभी के लिए यह सुगम है, कि वे सरल, सरस, सहानुभूतिपूर्ण सच्चा और खुला हुआ हृदय सबके लिए रखें।
यह ईश्वरीय वरदान है। जो दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहते हैं, उनमें यह गुण स्वतः ही आ जाते हैं।
( संकलित व सम्पादित)
– अखण्ड ज्योति मई 1960 पृष्ठ 30
[20/07, 7:12 PM] Savitanand: *भारतीय संस्कृति के संस्मरण सुमन*
*देने का आनंद*
एक बार एक शिक्षक संपन्न परिवार से सम्बन्ध रखने वाले एक युवा शिष्य के साथ कहीं टहलने निकले उन्होंने देखा कि रास्ते में पुराने हो चुके एक जोड़ी जूते उतरे पड़े हैं, जो संभवतः पास के खेत में काम कर रहे गरीब मजदूर के थे जो अब अपना काम ख़त्म कर घर वापस जाने की तयारी कर रहा था।
शिष्य को मजाक सूझा उसने शिक्षक से कहा, गुरु जी क्यों न हम ये जूते कहीं छिपा कर झाड़ियों के पीछे छिप जाएं; जब वो मजदूर इन्हें यहाँ नहीं पाकर घबराएगा तो बड़ा मजा आएगा !!
शिक्षक गंभीरता से बोले, किसी गरीब के साथ इस तरह का भद्दा मजाक करना ठीक नहीं है क्यों ना हम इन जूतों में कुछ सिक्के डाल दें और छिप कर देखें कि इसका मजदूर पर क्या प्रभाव पड़ता है !!
शिष्य ने ऐसा ही किया और दोनों पास की झाड़ियों में छुप गए।
मजदूर जल्द ही अपना काम ख़त्म कर जूतों की जगह पर आ गया उसने जैसे ही एक पैर जूते में डाले उसे किसी कठोर चीज का आभास हुआ, उसने जल्दी से जूते हाथ में लिए और देखा कि अन्दर कुछ सिक्के पड़े थे, उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और वो सिक्के हाथ में लेकर बड़े गौर से उन्हें पलट -पलट कर देखने लगा फिर उसने इधर -उधर देखने लगा, दूर -दूर तक कोई नज़र नहीं आया तो उसने सिक्के अपनी जेब में डाल लिए अब उसने दूसरा जूता उठाया, उसमे भी सिक्के पड़े थे …मजदूर भावविभोर हो गया, उसकी आँखों में आंसू आ गए, उसने हाथ जोड़ ऊपर देखते हुए कहा – हे भगवान समय पर प्राप्त इस सहायता के लिए उस अनजान सहायक का लाख -लाख धन्यवाद, उसकी सहायता और दयालुता के कारण आज मेरी बीमार पत्नी को दवा और भूखें बच्चों को रोटी मिल सकेगी।
मजदूर की बातें सुन शिष्य की आँखें भर आयीं शिक्षक ने शिष्य से कहा – क्या तुम्हारी मजाक वाली बात की अपेक्षा जूते में सिक्का डालने से तुम्हे कम ख़ुशी मिली ?
*शिष्य बोला, आपने आज मुझे जो पाठ पढाया है, उसे मैं जीवन भर नहीं भूलूंगा आज मैं उन शब्दों का मतलब समझ गया हूँ जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पाया था कि लेने की अपेक्षा देना कहीं अधिक आनंददायी है देने का आनंद असीम है, देना देवत्व है।*
*प्रस्तुति -गौरवशाली गुरुकुल* http://gouravshaligurukul.blogspot.com
[20/07, 7:20 PM] Savitanand: चुना और शहद असली मिलांकागज पर चिपका दे ।
दालचीनी पाउडर चुना मिला लगा दे ।
कसौंदी पात या पत्ती और मेथी दाना पीस बांध दे मत छुड़ाए । ठीक हो तब भिगो भिगो गुनगुने पानी से छुड़ा देना।
कसौंदी पत्ता + गोरख पान कंद पीस बांधे तीन दिन में कोई सूजन गुल्टी ठीक हो जाती है। यह बहुत ही कारगर है।।
[20/07, 7:25 PM] Savitanand: चातुर्मास किसे कहते हैं?????
व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के 4 महीने को हिन्दू धर्म में ‘चातुर्मास’ कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये माह महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शारीरिक और मानसिक स्थिति तो सही होती ही है, साथ ही वातावरण भी अच्छा रहता है। चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है।
#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:
जिन दिनों में भगवान् विष्णुजी शयन करते हैं उन चार महीनों को चातुर्मास एवं चौमासा भी कहते हैं, देवशयनी एकादशी से हरिप्रबोधनी एकादशी तक चातुर्मास हैं, इन चार महीनों की अवधि में विभिन्न धार्मिक कर्म करने पर मनुष्य को विशेष पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है, क्योंकि इन दिनों में किसी भी जीव की ओर से किया गया कोई भी पुण्यकर्म खाली नहीं जाता।
वैसे तो चातुर्मास का व्रत देवशयनी एकादशी से शुरु होता है, परंतु जैन धर्म में चतुर्दशी से प्रारंभ माना जाता है, द्वादशी, पूर्णिमा से भी यह व्रत शुरु किया जा सकता है, भगवान् को पीले वस्त्रों से श्रृंगार करे तथा सफेद रंग की शैय्या पर सफेद रंग के ही वस्त्र द्वारा ढककर उन्हें शयन करायें।
पदमपुराण के अनुसार जो मनुष्य इन चार महीनों में मंदिर में झाडू लगाते हैं तथा मंदिर को धोकर साफ करते है, कच्चे स्थान को गोबर से लीपते हैं, उन्हें सात जन्म तक ब्राह्मण योनि मिलती है, जो भगवान को दूध, दही, घी, शहद, और मिश्री से स्नान कराते हैं, वह संसार में वैभवशाली होकर स्वर्ग में जाकर इन्द्र जैसा सुख भोगते हैं।
#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:
धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्प आदि से पूजन करने वाला प्राणी अक्षय सुख भोगता है, तुलसीदल अथवा तुलसी मंजरियों से भगवान का पूजन करने, स्वर्ण की तुलसी ब्राह्मण को दान करने पर परमगति मिलती है, गूगल की धूप और दीप अर्पण करने वाला मनुष्य जन्म जन्मांतरों तक धनवान रहता है, पीपल का पेड़ लगाने, पीपल पर प्रति दिन जल चढ़ाने, पीपल की परिक्रमा करने, उत्तम ध्वनि वाला घंटा मंदिर में चढ़ाने, ब्राह्मणों का उचित सम्मान करने वाले व्यक्ति पर भगवान् श्री हरि की कृपा दृष्टि बनी रहती है।
किसी भी प्रकार का दान देने जैसे- कपिला गो का दान, शहद से भरा चांदी का बर्तन और तांबे के पात्र में गुड़ भरकर दान करने, नमक, सत्तू, हल्दी, लाल वस्त्र, तिल, जूते, और छाता आदि का यथाशक्ति दान करने वाले जीव को कभी भी किसी वस्तु की कमीं जीवन में नहीं आती तथा वह सदा ही साधन सम्पन्न रहता है।
जो व्रत की समाप्ति यानि उद्यापन करने पर अन्न, वस्त्र और शैय्या का दान करते हैं वह अक्षय सुख को प्राप्त करते हैं तथा सदा धनवान रहते हैं, वर्षा ऋतु में गोपीचंदन का दान करने वालों को सभी प्रकार के भोग एवं मोक्ष मिलते हैं, जो नियम से भगवान् श्री गणेशजी और सूर्य भगवान् का पूजन करते हैं वह उत्तम गति को प्राप्त करते हैं, तथा जो शक्कर का दान करते हैं उन्हें यशस्वी संतान की प्राप्ति होती है।
#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:
माता लक्ष्मी और पार्वती को प्रसन्न करने के लिए चांदी के पात्र में हल्दी भर कर दान करनी चाहिये तथा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बैल का दान करना श्रेयस्कर है, चातुर्मास में फलों का दान करने से नंदन वन का सुख मिलता है, जो लोग नियम से एक समय भोजन करते हैं, भूखों को भोजन खिलाते हैं, स्वयं भी नियमवद्घ होकर चावल अथवा जौं का भोजन करते हैं, भूमि पर शयन करते हैं उन्हें अक्षय कीर्ती प्राप्त होती है।
इन दिनों में आंवले से युक्त जल से स्नान करना तथा मौन रहकर भोजन करना श्रेयस्कर है, श्रावण यानि सावन के महीने में साग एवम् हरि सब्जियां, भादों में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दालें खाना वर्जित है, किसी की निंदा चुगली न करें तथा न ही किसी से धोखे से उसका कुछ हथियाना चाहियें, चातुर्मास में शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिये और कांसे के बर्तन में कभी भोजन नहीं करना चाहियें।
जो अपनी इन्द्रियों का दमन करता है वह अश्वमेध यज्ञ के फल को प्राप्त करता है, शास्त्रानुसार चातुर्मास एवं चौमासे के दिनों में देवकार्य अधिक होते हैं जबकि विवाह आदि उत्सव नहीं किये जाते, इन दिनों में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा दिवस तो मनाए जाते हैं परंतु नवमूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व नवनिर्माण कार्य नहीं किये जाते, जबकि धार्मिक अनुष्ठान, श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ, श्री रामायण और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, हवन यज्ञ आदि कार्य अधिक होते हैं।
#डॉ0_विजय_शंकर_मिश्र:
गायत्री मंत्र के पुरश्चरण व सभी व्रत सावन मास में सम्पन्न किए जाते हैं, सावन के महीने में मंदिरों में कीर्तन, भजन, जागरण आदि कार्यक्रम अधिक होते हैं, स्कन्दपुराण के अनुसार संसार में मनुष्य जन्म और विष्णु भक्ति दोनों ही दुर्लभ हैं, परंतु चार्तुमास में भगवान विष्णु का व्रत करने वाला मनुष्य ही उत्तम एवं श्रेष्ठ माना गया है।
चौमासे के इन चार मासों में सभी तीर्थ, दान, पुण्य, और देव स्थान भगवान् विष्णु जी की शरण लेकर स्थित होते हैं तथा चातुर्मास में भगवान विष्णु को नियम से प्रणाम करने वाले का जीवन भी शुभफलदायक बन जाता है, भाई-बहनों! चौमासे के इन चार महीनों में नियम से रहते हुयें, शुभ कार्य करते हुये, भगवान् श्री हरि विष्णुजी की भक्ति से जन्म जन्मांतरों के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करें।
जय श्री हरि!
हरि ओऊम् तत्सत्
[20/07, 7:28 PM] Savitanand: ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
आत्मीय परिजन,आप सभी को सादर प्रणाम 🙏!
*आज का सद्चिंतन*
*सत्य का अवलंबन*
ऐ अंधियारे का दीप, जा छोड़ना चाहे साथ छोड़ दें, बिना साथीयों के भी लोगों ने जिंदगी जीकर दिखाई है। किसी का प्यार, सहयोग और सहानुभूति न मिले तो भी काम चल जाएगा, क्योंकि ऐसे लोग भी दुनिया में बहुत है, जिन्हें इनमें से एक भी चीज न मिली और उनके बिना भी किसी प्रकार ज़िन्दगी पार कर लेने में समर्थ हुए।
सम्पदा के बिना कितनों का ही काम चल जाता है। तन ढकने और पेट भरने में जिन्हें कमी पड़ती रही, ऐसे लोग भी इस दुनियां में कम नहीं है।
मेरी चाह है कि हाथ से सत्य जाने न पाये । जिस सत्य को तलाशने और पाने के लिए मैंने कंकरीले, रेतीले रास्ते पर चलना स्विकार किया है , वह आत्म स्वीकृति किसी भी मूल्य पर, किसी भी संकट के समय डगमगाने न पाये।
सत्य का अवलंबन बना रहे क्योंकि उसकी शक्ति असीम है, मैं उसी के सहारे अपनी हिम्मत संजोये रहुंगा।
✍️ पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 पृष्ठ संख्या ३, अखण्ड ज्योति, मई – १९८५.
[20/07, 7:28 PM] Savitanand: सच कहा जाय तो अच्छे व्यवहार की शिक्षा हमें स्वयं से प्राप्त होती है।
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साधारण छोटी शिष्टतायें या शिष्टतापूर्ण व्यवहार जीवन के परिवर्तन का आधार बनती है। सच पूछा जाय तो अच्छे व्यवहार की शिक्षा हमें स्वयं से प्राप्त होती है।
यदि हम समझदार हैं, तो अपना ही अनुभव हमें इस स्वप्राप्त शिक्षा प्रदान कर देगा। यह शिक्षा किसी स्कूल-कॉलेज या पुस्तक से इतनी अच्छी तरह नहीं सीखी जा सकती, जितनी कि स्वयं की बुद्धि से।
सर्वप्रथम आप अच्छे श्रोता बनिये। हर मनुष्य अपनी ही कहना चाहता है, कोई किसी की बात सुनना नहीं चाहता।
आप पहले समझदारी से, दिल के साथ उसकी पूरी बात सुन तो लीजिये, उसे सब कुछ कह तो लेने दीजिये, उसे अपना हृदय तो हल्का कर लेने दीजिये, फिर तो वह व्यक्ति आपका बिना मोल का गुलाम हो जायेगा और तब आप उससे चाहे जो कुछ कहेंगे, वह ध्यान और प्रेम से आपकी बातें सुनेगा और मानेगा।
उसी प्रकार आप दूसरों की सम्मति का भी आदर कीजिये। कुछ लोग दूसरों की सम्मति सुनना ही नहीं चाहते। आपको उस व्यक्ति से मतभेद हो सकता है, पर आप में सहनशीलता तो होनी ही चाहिये।
“सुनें सबकी- करें मन की” उक्ति में भी यही बात बताई गई है। आपको विरोध ही, मत-भेद ही प्रकट करना है, तो खूबसूरती से, मिठास से, समझदारी से प्रकट करना चाहिये, यह तो आपके हाथ में है।
अपने सिद्धान्तों और सम्मतियों पर दृढ़ता के साथ स्थिर रहना बुरा नहीं है, लेकिन यह काम विनम्रता और प्रेमपूर्वक भी किया जा सकता है, न कि जोर-जबरदस्ती, लड़-झगड़ कर, गालियों के बल पर।
दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए हम उसके निकट पहुँच सकते हैं। उसकी आत्मीयता के कारण हम उसके वास्तविक, सच्चे स्वरूप को पहचानने में अधिक समर्थ होंगे।
विनम्र, दयालु, श्रेष्ठ, परोपकारी होने में हमें कौन सा पैसा खर्च करना पड़ता है? केवल इच्छा मात्र की आवश्यकता है। मनुष्य के चरित्र की सबसे बड़ी परीक्षा इसी के द्वारा सम्भव है, कि उसका व्यवहार दूसरों के प्रति कैसा होता है?
गरीब-अमीर, मूर्ख, राजा, पुरोहित, व्यापारी, विद्यार्थी, स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध, युवा सभी के लिए यह सुगम है, कि वे सरल, सरस, सहानुभूतिपूर्ण सच्चा और खुला हुआ हृदय सबके लिए रखें।
यह ईश्वरीय वरदान है। जो दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहते हैं, उनमें यह गुण स्वतः ही आ जाते हैं।
( संकलित व सम्पादित)
– अखण्ड ज्योति मई 1960 पृष्ठ 30
[21/07, 6:40 AM] Savitanand: *जया पार्वती व्रत मूहूर्त*
जयापार्वती व्रत बृहस्पतिवार,
जुलाई 22, 2021 को
जयापार्वती प्रदोष पूजा मूहूर्त – 07:18 पी एम से 09:22 पी एम
अवधि – 02 घण्टे 04 मिनट्स
जया पार्वती व्रत सोमवार, जुलाई 26, 2021 को समाप्त
गौरी व्रत मंगलवार, जुलाई 20, 2021 को
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – जुलाई 21, 2021 को 04:26 पी एम बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त – जुलाई 22, 2021 को 01:32 पी एम बजे
2021 जया पार्वती व्रत
जयापार्वती व्रत देवी जया को समर्पित एक महत्वपूर्ण उपवास दिवस है। देवी जया, देवी पार्वती के विभिन्न रूपों में से एक हैं। जयापार्वती व्रत मुख्य रूप से गुजरात में मनाया जाता है। जयापार्वती का व्रत अविवाहित कन्याओं के साथ-साथ विवाहित स्त्रियों द्वारा भी किया जाता है। अविवाहित कन्याएँ जयापार्वती व्रत का पालन सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिये करती हैं तथा विवाहित स्त्रियाँ इस व्रत को अपने पति की दीर्घायु एवं सुखी वैवाहिक जीवन के लिये करती हैं।
जयापार्वती व्रत आषाढ़ मास में पाँच दिनों तक मनाया जाता है। यह व्रत शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से आरम्भ होता है तथा पाँच दिवस पश्चात कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर समाप्त होता है। जयापार्वती व्रत को पाँच, सात, नौ, ग्यारह तथा अधिकतम बीस वर्षों तक करने का सुझाव दिया गया है।
जयापार्वती व्रत विधि
जयापार्वती व्रत पालन के समय भक्तगण, विशेष रूप से नमकीन भोजन ग्रहण करने से बचते हैं। इन पाँच दिनों की उपवास अवधि के दौरान नमक का प्रयोग पूर्ण रूप से वर्जित है। कुछ भक्तगण इन पाँच दिनों की उपवास अवधि के दौरान अनाज तथा सभी प्रकार की सब्जियों के उपयोग से भी बचते हैं।
उपवास के प्रथम दिवस पर, एक छोटे पात्र में ज्वार/गेहूँ के दानों को बोया जाता है तथा पूजन स्थान पर रखा जाता है। पाँच दिन तक इस पात्र की पूजा की जाती है। पूजा के समय, सूती ऊन से बने एक हार को कुमकुम अथवा सिन्दूर से सजाया जाता है। सूती ऊन से बने इस हार को नगला के नाम से जाना जाता है। यह अनुष्ठान पाँच दिनों तक निरन्तर चलता है तथा प्रत्येक सुबह ज्वार/गेहूँ के दानों को जल अर्पित किया जाता।
गौरी तृतीया पूजा के एक दिन पहले, अर्थात उपवास के अन्तिम दिन, जब प्रातःकाल की पूजा के पश्चात् उपवास तोड़ा जाता है, उस रात स्त्रियां जागरण करती हैं व पूरी रात भजन-कीर्तन करते हुए माँ की आराधना व ध्यान करती हैं। धार्मिक भजनों तथा रात्रि जागरण की इस प्रथा को जयापार्वती जागरण के नाम से जाना जाता है।
अगले दिन, प्रातःकाल में, गेहूँ अथवा ज्वार की बढ़ी हुई घास को पात्र से निकालकर पवित्र जल अथवा नदी में प्रवाहित किया जाता है। प्रातःकाल की पूजा के पश्चात, नमक, सब्जियों तथा गेहूँ से बनी रोटियों के भोजन से उपवास तोड़ा जाता है।
🌺🌷🌺♈♈🌺🌷🌺
[21/07, 6:40 AM] Savitanand: 🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉
🌄सुप्रभातम🌄
🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
🌻बुधवार, २१ जुलाई २०२१🌻
सूर्योदय: 🌄 ०५:४०
सूर्यास्त: 🌅 ०७:१०
चन्द्रोदय: 🌝 १६:५०
चन्द्रास्त: 🌜२७:१२
अयन 🌕 दक्षिणायने (उत्तरगोलीय)
ऋतु: 🌦️ वर्षा
शक सम्वत: 👉 १९४३ (प्लव)
विक्रम सम्वत: 👉 २०७८ (राक्षस)
मास 👉 आषाढ़
पक्ष 👉 शुक्ल
तिथि 👉 द्वादशी (१६:२६ तक)
नक्षत्र 👉 ज्येष्ठा (१८:३० तक)
योग 👉 ब्रह्म (१६:१२ तक)
प्रथम करण 👉 बव (०५:५२ तक)
द्वितीय करण 👉 बालव (१६:२६ तक)
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॥ गोचर ग्रहा: ॥
🌖🌗🌖🌗
सूर्य 🌟 कर्क
चंद्र 🌟 धनु (१८:१९ से)
मंगल 🌟 सिंह (उदित, पूर्व, मार्गी)
बुध 🌟 मिथुन (अस्त, पूर्व, मार्गी)
गुरु 🌟 कुम्भ (उदय, पूर्व, वक्री)
शुक्र 🌟 सिंह (उदय, पश्चिम, मार्गी)
शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, वक्री)
राहु 🌟 वृष
केतु 🌟 वृश्चिक
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शुभाशुभ मुहूर्त विचार
⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳
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अभिजित मुहूर्त 👉 ❌❌❌
अमृत काल 👉 १०:२७ से ११:५५
विजय मुहूर्त 👉 १४:४१ से १५:३६
गोधूलि मुहूर्त 👉 १९:०३ से १९:२७
निशिता मुहूर्त 👉 २४:०३ से २४:४४
राहुकाल 👉 १२:२३ से १४:०७
राहुवास 👉 दक्षिण-पश्चिम
यमगण्ड 👉 ०७:१३ से ०८:५६
होमाहुति 👉 शनि
दिशाशूल 👉 उत्तर
नक्षत्र शूल 👉 पूर्व (१८:३० तक)
अग्निवास 👉 आकाश
चन्द्रवास 👉 उत्तर (पूर्व १८:३० से)
शिववास 👉 कैलाश पर (१६:२६ से नन्दी पर)
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – लाभ २ – अमृत
३ – काल ४ – शुभ
५ – रोग ६ – उद्वेग
७ – चर ८ – लाभ
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – उद्वेग २ – शुभ
३ – अमृत ४ – चर
५ – रोग ६ – काल
७ – लाभ ८ – उद्वेग
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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शुभ यात्रा दिशा
🚌🚈🚗⛵🛫
उत्तर-पूर्व (गुड़ अथवा दूध का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
🗓📆🗓📆
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प्रदोष व्रत, बुध अस्त पूर्व में २७:०९ से, वामन पूजा, विवाहदी मुहूर्त (पंजाब, हिमाचल, कश्मीर, हरियाणा आदि के लिये) मकर-कुंम्भ लग्न सायं ०७:१० से प्रातः ०५:३८ तक आदि।
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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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आज १८:३० तक जन्मे शिशुओ का नाम
ज्येष्ठा नक्षत्र के द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (या, यी, यू) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम मूल नक्षत्र के प्रथम एवं द्वितीय चरण अनुसार क्रमश (ये, यो) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है।
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उदय-लग्न मुहूर्त
कर्क – २९:१२ से ०७:३४
सिंह – ०७:३४ से ०९:५३
कन्या – ०९:५३ से १२:१०
तुला – १२:१० से १४:३१
वृश्चिक – १४:३१ से १६:५१
धनु – १६:५१ से १८:५४
मकर – १८:५४ से २०:३५
कुम्भ – २०:३५ से २२:०१
मीन – २२:०१ से २३:२५
मेष – २३:२५ से २४:५८
वृषभ – २४:५८ से २६:५३
मिथुन – २६:५३ से २९:०८
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पञ्चक रहित मुहूर्त
अग्नि पञ्चक – ०५:२९ से ०७:३४
शुभ मुहूर्त – ०७:३४ से ०९:५३
रज पञ्चक – ०९:५३ से १२:१०
शुभ मुहूर्त – १२:१० से १४:३१
चोर पञ्चक – १४:३१ से १६:२६
शुभ मुहूर्त – १६:२६ से १६:५१
रोग पञ्चक – १६:५१ से १८:३०
शुभ मुहूर्त – १८:३० से १८:५४
मृत्यु पञ्चक – १८:५४ से २०:३५
अग्नि पञ्चक – २०:३५ से २२:०१
शुभ मुहूर्त – २२:०१ से २३:२५
मृत्यु पञ्चक – २३:२५ से २४:५८
अग्नि पञ्चक – २४:५८ से २६:५३
शुभ मुहूर्त – २६:५३ से २९:०८
रज पञ्चक – २९:०८ से २९:३०
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आज का राशिफल
🐐🐂💏💮🐅👩
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज का दिन आपके लिए अशुभ फलदायी रहेगा। मध्यान के बाद में शारीरिक एवं मानसिक स्थूलता अनुभव होगी लेकिन फिर भी लापरवाही बरतेंगे जिसके कारण बाद में स्थिति गंभीर भी हो सकती है खास कर आज मध्यान बाद किसी प्रकार का जोखिम ना लें। भावुकता की भी अधिकता रहने से मामूली बातों को प्रतिष्ठा से जोड़ेंगे। नकारात्मक भावनाओ से बचे अन्यथा धन और कीर्ति की हानि हो सकती है। संतान के उद्दंड व्यवहार से पारिवारिक वातावरण दूषित हो सकता है। कार्य क्षेत्र पर कम समय मे अधिक धन कमाने के प्रलोभन मिलेंगे इनसे दूर रहे अन्यथा निराश होना पड़ेगा।
वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए आनंददायक रहेगा। आज प्रत्येक क्षेत्र में विरोधी परास्त होंगे। सामाजिक मान-सम्मान भी बढेगा। व्यापार विस्तार अथवा नए कार्य के आरंभ की योजना बनेगी जो कि भविष्य के लिये लाभदायक सिद्ध होगा परंतु आज कोई नया कार्य आरंभ ना करें। आस-पास के धार्मिक स्थान की यात्रा से मन को शान्ति मिलेगी। किसी परिचित से लंबे समय बाद भेंट से हर्ष एवं लाभ होगा। स्त्री एवं संतान के ऊपर खर्च करेंगे परंतु आज इनसे किसी न किसी कारण मानसिक क्लेश ही मिलेगा। संध्या बाद परिस्थिति पहले से बेहतर बनेगी।
मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आपके आज के दिन का पूर्वार्ध अत्यन्त व्यस्त रहने वाला है लेकिन व्यस्तता बे फिजूल के कार्यो को लेकर रहेगी। इस समय कार्य क्षेत्र पर कम समय दे पाएंगे। आज किसी पुराने मामले को लेकर सरकारी दस्तावेजो को पूर्ण करने में अधिकांश समय व्यतीत होगा परंतु इसमें विघ्नों के बाद आंशिक सफलता मिलेगी। कार्य क्षेत्र पर लाभ के अवसर निकल सकते है लेकिन यहाँ धैर्य से काम लेना जरूरी है अन्यथा आपके हिस्से का लाभ किसए प्रतिद्वंदी को मिल सकता है। संध्या के समय अत्यधिक थकान परंतु फिर भी शांति अनुभव करेंगे। सेहत नरम होने पर भी लापरवाही करेंगे।
कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिये शुभ फलदायी रहेगा। आज नौकरी एवं व्यवसाय में थोड़े परिश्रम से अधिक लाभ मिल सकेगा अधिकारी आप पर प्रसन्न रहेंगे लेकिन आज स्वभाव में अतिआत्मविश्वास भी रहेगा जिसके कारण लोगो के बीच हास्य के पात्र भी बन सकते है। आज आश्वासनों के चक्कर में धन ना फसाएँ हानि हो सकती है। मध्यान पश्चात नए कार्यो में सोच समझकर धन लगाए गलत निवेश हानि करा सकता है। पारिवारिक वातावरण भी आज अन्य दिनों की अपेक्षा शांत रहेगा। बुजुर्गो का आशीर्वाद मिलेगा। सेहत में थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव लगा रहेगा।
सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज का दिन आपको मिश्रित फलदायी रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में क्रोध की अधिकता रहने से किसी प्रियजन अथवा आस पड़ोसी से तकरार होने की प्रबल संभावना है। सेहत भी नरम रहने से कार्य में मन नहीं लगेगा। आज विरोधी प्रबल रहेंगे मौन रहकर मध्यान तक का समय बिताये इसके बाद परिस्थितियो ने सुधार आने लगेगा। आकस्मिक दुर्घटना में चोट का भय है यथासंभव यात्रा टाले। प्रातः काल कुछ समय धर्म-कर्म में बिताएं आत्म बल मिलने से मानसिक शांति अनुभव करेंगे।
कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आप आपके लिए लाभदायक रहेगा। आज स्वास्थ्य छोटी-मोटी परेशानियों को छोड़ उत्तम ही रहेगा। आज आपके सोचे हुए कार्य व्यवहारिकता के बल पर अपने आप होते चले जायेंगे जिससे मन प्रसन्न रहेगा। आज परिश्रम के कार्यो की अपेक्षा बौद्धिक कार्यो में सहज सफलता मिलेगी। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। संध्या पश्चात परिजनों के साथ किसी महत्त्वपूर्ण विषय पर बात करेंगे यहाँ अपने विचार अंत मे रखें अन्यथा किसी की कटु वाणी सुनने को मिलेगी। दूर के कार्यो से धन लाभ होगा लेकिन खर्चीला स्वभाव बचत नही करने देगा।
तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज आपका मानसिक संतुलन स्थिर नही रहेगा असमंजस की स्थिति के कारण पल पल में निर्णय बदलेंगे इससे कार्य विलंब के साथ अन्य लोगो को परेशानी होगी फिर भी स्वार्थी पूर्ति के कारण आज आपसे कोई शिकायत नही करेगा। मन आज अनैतिक कार्यो में जल्दी आकर्षित होगा स्वभाव में भी उदण्डता रहेगी बिना कलह किये किसी कार्य को नही करेंगे। कार्य क्षेत्र पर भी मन मर्जी व्यवहार के कारण जिस लाभ के अधिकारी है उसमें कमी आएगी। धन की आमद आज पूर्व नियोजित रहेगी थोड़ी बहुत अतिरिक्त आय भी बना लेंगे लेकिन खर्च के आगे आज कमाई कम ही लगेगी। मौसमी बीमारियों एवं संयम की कमी के कारण सेहत बिगड़ सकती है।
वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज दोपहर बाद का समय आपके लिये अत्यन्त शुभफलदायी रहेगा लेकिन आज आपका स्वभाव सनकी रहेगा किसए भी कार्य को करने से पहले सोचने समझने में समय व्यर्थ करेंगे।आज आलस्य को त्याग निष्ठा से कार्य में लग जाए भाग्योन्नति के प्रबल योग होने से थोड़े से परिश्रम के बाद घर-बाहर मान-बड़ाई मिलेगी। भाई-बहनों के लिए भी आज आप सहायक बनेंगे। नए कार्य में निवेश के लिए शुभ अवसर है निसंकोच होकर कर सकते है। परिजनों के साथ धार्मिक यात्रा का अवसर मिलेगा। सेहत सामान्य रहेगी तली वस्तुओं का परहेज करें।
धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज के दिन कार्यो में विफलता मिलने से मन हताशा से भरा रहेगा। नकारात्मकता बढ़ने से शरीर भी अस्वस्थ हो सकता है।
किसी ग़लतफ़हमी के कारण मित्र अथवा परिजनों से मनमुटाव संभव है। आज धार्मिक कार्यो के ऊपर धन खर्च होगा। कोई भी सरकारी कार्य आज टालना ही बेहतर रहेगा। लंबी यात्रा के प्रसंग बन सकते है इन्हें भी फिलहाल स्थगित करना ही बेहतर रहेगा। विरोधी कुछ समय के पिय प्रबल रहेंगे। संध्या बाद से स्तिथि में सुधार आने लगेगा तब तक धैर्य से काम लें।
मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आपका आज का दिन कुछ समय सामाजिक गतिविधियों में बीतेगा। आज आप अपनी वाणी एवं व्यवहार से लोगो का दिल जीत लेंगे चाहे इसके पीछे निजी स्वार्थ ही हो फिर भी मान-सम्मान में वृद्धि होगी। आज बनाये नए संपर्क भविष्य के लिए लाभदायी सिद्ध होंगे। मध्यान बाद व्यापार-व्यवसाय से आकस्मिक लाभ के योग है सतर्क रहें। आज सामाजिक एवं घरेलू खर्च भी अधिक रह सकता है। परिवार में वातावरण शांत रहेगा। गले से निचले भाग में व्याधि होने की संभावना है। आज किसी के ऊपर शंकालु प्रवृति कलह करा सकती है।
कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन मध्यान तक आपके लिये अनुकूल रहेगा। व्यापार में कम परिश्रम से सफलता मिलने से कार्य के प्रति उत्साह बढ़ेगा लेकिन आर्थिक दृष्टिकोण से आज भी दिन कुछ न कुछ कमी अवश्य रखेगा। नौकरी पेशा जातको को भी परिश्रम का फल आर्थिक या पदोन्नति के रूप में मिल सकता है इसके लिए किसी की खुशामद भी करनी पड़ेगी। जोखिम वाले कार्यो में निवेश से अकस्मात लाभ हो सकता है। संध्या का समय परिजन अथवा किसी जानकार के साथ मतभेद होने पर अशान्त बनेगा। नसों में दुर्बलता अथवा पेट संबंधित समस्या से परेशानी हो सकती है
मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन मध्यम फलदायी रहेगा। व्यापार अथवा नौकरी करने वाले जातक आज परिश्रम के बाद ही कार्य में सफलता पा सकेंगे। उच्चाधिकारी से किसी बात पर मतभेद रह सकता है आज इनसे बचकर रहने का प्रयास करें। कार्य क्षेत्र पर सहकर्मियों का पूर्ण सहयोग मिलने से थोड़ी राहत अनुभव होगी। परिवार में पत्नी अथवा पुत्र के कारण कलह के योग बनेंगे। खर्च अधिक रहेगा। आज आर्थिक मामलों में ढील ना दें अन्यथा आगे परेशानी हो सकती है। गैस कब्ज के कारण परेशानी होने की संभावना है।
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[21/07, 6:40 AM] Savitanand: *जया पार्वती व्रत कथा* *(Jaya Parvati vrat story)*
एक ब्राह्मण परिवार था, जिसमें पति पत्नी थे. ये दोनों ही धार्मिक, संस्कारी थे. इनके पास सब कुछ था, बस कमी थी तो एक बच्चे की. ब्राह्मण जोड़ा शिव से लगातार बच्चे के लिए प्राथना करते रहते थे. शिव इनकी भक्ति से खुश हुए और एक दिन इन्हें दर्शन देकर कहा कि “पास के जंगल में मेरी एक मूर्ती है, जिसकी कोई पूजा नहीं करता, तुम वहां जाओ और पूजा अर्चना करो.”
वो ब्राह्मण उस जंगल में जाता है, उसे शिव के बताये अनुसार मूर्ती मिलती है. वह उसे साफ करने व सजाने के लिए पानी व फूल की तलाश में निकल जाता है. रास्ते में उसे सांप काट लेता है, जिससे व वहीँ बेहोश हो जाता है. बहुत समय हो जाने पर ब्राह्मण की पत्नी चिंतित होने लगती है. वह उसकी तलाश में जंगल तक जाती है, और उसी मूर्ती के पास शिव की तपस्या करने लगती है. शिव उसकी भक्ति से खुश होते है, और उसके पति को सही सलामत भेज देते है. इसके कुछ समय बाद दोनों को एक पुत्र रत्न की भी प्राप्ति होती है और वे सुखी सुखी जीवन व्यतीत करने लगते है. इस कथा के अनुसार जो इस व्रत को रखता है, उसे सदा सुहागन का वरदान मिलता है, साथ ही उसके बच्चों का जीवन सुखमय रहता है.
जयापार्वती व्रत का महत्व (Jayaparvati importance in hindi) –
शादीशुदा महिलाएं इस व्रत को अपनी इच्छा अनुसार 5-20 साल तक रहती है. इस दौरान वे दूसरी औरतें को घर बुलाती है, उन्हें खाना खिलाती है. वे एक दुसरे को कुमकुम हल्दी लगाती है, एक दुसरे को सदा सुहागन होने का आशीर्वाद देती है. अविवाहित लड़की के इस व्रत के रहने से जल्दी शादी होती है, साथ ही अच्छा भरा पूरा परिवार मिलता है.
जयापार्वती व्रत पूजा विधि ( Jaya parvati vrat puja vidhi )–
व्रत के पहले दिन ज्वार (गेहूं की बाली) को एक गहरे बर्तन में रखें. इसे आप घर पर या किसी मंदिर में स्थापित करा सकती है. रुई की एक माला बनायें जिसे नागला कहते है. अब रोज सुबह नाहा धोकर अगले पांच दिन ज्वार के बर्तन में पानी चढ़ाएं. रोली, फूल, अक्षत चढ़ाएं, उसके बाद रुई की माला चढ़ाएं.
जयापार्वती व्रत जागरण (Jaya parvati vrat jagran) –
व्रत समाप्ति के एक रात पहले रात भर जागा जाता है, भजन, कीर्तन किया जाता है. इसे जयापार्वती जागरण कहते है. जागरण को भी महिला, लड़की व्रत रखती है, उसे व्रत समाप्ति के पहले इस रात को जागना जरुरी माना जाता है. इस समय नाच गाना भी किया जाता है.
जयापार्वती व्रत में क्या करें (Jaya parvati vrat what to do) –
व्रत वाले दिन जल्दी उठकर नाहा धो लें, एक दिन पहले घर की सफाई करें.
मिट्टी, सोने या चांदी के बैल में शिव पार्वती की मूर्ती बनाकर रखें. इसे घर या मंदिर में विराजमान करें.
इसे दूध, दही, पानी, शहद से नहलाएं.
कुमकुम, हल्दी लगायें, नारियल, प्रसाद, फल, फूल चढ़ाएं.
पार्वती जी की उपासना करें.
रोज पांच दिन ऐसा करे, फिर भोजन ग्रहण करें.
आखिरी दिन जागरण के बाद नहा लें.
शिव पार्वती, व ज्वार के उस बर्तन की पूजा करें. फिर इसे किसी नदी में सिरा दें.
पूजा के बाद व्रत समाप्त हो जाता है, जिसके बाद आप सब कुछ खा सकते है.
जयापार्वती व्रत का खाना (Jaya parvati vrat food) –
इस व्रत के दौरान नमक, आटे से बना कोई भी समान, सभी तरह की सब्जियां नहीं खानी चाइये. व्रत के दौरान आप फल, दही, दूध, जूस, दूध से बनी मिठाइयाँ खा सकते है. व्रत के आखिरी दिन मंदिर में पूजा के बाद नमक, आटे से बनी रोटी, पूरी व सब्जी खाकर व्रत तोड़ा जाता है.
गुजरात में इस व्रत को बहुत अधिक धूमधाम से मनाया जाता है. 5 दिन का यह व्रत एक तपस्या के समान होता है, जो कठिन जरुर होता है लेकिन बहुत फलदायी होता है. गुजरात में यह व्रत लड़कियां छोटी उम्र से ही रहने लगती है. इसी समय गुजरात में गौरी व्रत भी रखा जाता है, जो 3 दिन का होता है. जिसकी पूजा विधि इसी व्रत के समान होती है. सुखमय जीवन के लिए विवाहिता को यह व्रत रहना चाइय
🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞
⛅ *दिनांक 21 जुलाई 2021*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत – 1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – वर्षा*
⛅ *मास – आषाढ़*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – द्वादशी शाम 04:26 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
⛅ *नक्षत्र – ज्येष्ठा शाम 06:30 तक तत्पश्चात मूल*
⛅ *योग – ब्रह्म शाम 04:12 तक तत्पश्चात इन्द्र*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:45 से दोपहर 02:24 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:09*
⛅ *सूर्यास्त – 19:20*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत, वामन पूजा, जयापार्वती व्रतारम्भ (गुजरात)*
💥 *विशेष – द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞
🌷 *प्रदोष व्रत* 🌷
🙏🏻 *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 21 जुलाई, बुधवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞
👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा*
🙏🏻 *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।*
🙏🏻 *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।*
🙏🏻 *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।*
🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞
👉🏻 *ये उपाय करें*
*सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।*
🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞
🌷 *कैसे करें सुबह की शुरुआत गुरुपूनम के दिन* 🌷
➡ *23 जुलाई 2021 शुक्रवार को गुरुपूनम है ।*
🙏🏻 *इस दिन सुबह बिस्तर पर तुम प्रार्थना करना : ‘‘हे महान पूर्णिमा ! हे गुरुपूर्णिमा ! अब हम अपनी आवश्यकता की ओर चलेंगे । इस देह की सम्पूर्ण आवश्यकताएँ कभी किसी की पूरी नहीं हुर्इं । हुर्इं भी तो संतुष्टि नहीं मिली । अपनी असली आवश्यकता की तरफ हम आज से कदम रख रहे हैं ।”*
🙏🏻 *उसी समय ध्यान करना । शरीर बिस्तर छोड़े उसके पहले अपने प्रियतम को मिलना । गुरुदेव का मानसिक पूजन करना । वे तुम्हारे मन की दशा देखकर भीतर-ही-भीतर संतुष्ट होकर अपनी अनुभूति की झलक से तुम्हें आलोकित कर देंगे। उनके पास उधार नहीं है, वे तो नगदधर्मा हैं ।*
🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞
*दिनाँक-: 21/07/2021,बुधवार*
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
आषाढ
“””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)
तिथि————- द्वादशी 16:26:57 तक
पक्ष————————– शुक्ल
नक्षत्र————–ज्येष्ठा 18:29:54
योग————— ब्रह्म 16:10:51
करण————— बव 05:53:13
करण————-बालव 16:26:57
करण———– कौलव 26:59:00
वार————————- बुधवार
माह————————- आषाढ
श्रावण———————–6प्रविष्टे
चन्द्र राशि——–वृश्चिक 18:29:54
चन्द्र राशि————————धनु
सूर्य राशि———————- कर्क
रितु—————————–वर्षा
आयन—————— दक्षिणायण
संवत्सर———————– प्लव
संवत्सर (उत्तर) ——–आनंद(राक्षस)
विक्रम संवत—————-2078
विक्रम संवत (कर्तक) —-2077
शाका संवत—————- 1943
रामपुर बुशैहर
सूर्योदय—————– 05:33:00
सूर्यास्त——————19:19:00
दिन काल—————13:35:15
रात्री काल————–10:25:15
चंद्रोदय—————- 16:46:04
चंद्रास्त—————- 27:20:48
लग्न—-कर्क 4°19′ , 94°19′
सूर्य नक्षत्र——————– पुष्य
चन्द्र नक्षत्र——————–ज्येष्ठा
नक्षत्र पाया——————–ताम्र
*💮🚩 पद, चरण 🚩💮*
या—- ज्येष्ठा 07:30:58
यी—- ज्येष्ठा 13:00:03
यू—- ज्येष्ठा 18:29:54
ये—- मूल 23:57:36
यो—- मूल 29:26:17
*💮💮 ग्रह गोचर 💮💮*
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= कर्क 04°32 ‘ पुष्य , 1 हु
चन्द्र = वृश्चिक 22°23 ‘ ज्येष्ठा, 2 या
बुध = मिथुन 21°57’ पुनर्वसु ‘ 1 के
शुक्र= कर्क 04°55, मघा ‘ 2 मी
मंगल=कर्क 29°30 ‘ अश्लेषा ‘ 4 डो
गुरु=कुम्भ 06°30 ‘ धनिष्ठा , 4 गे
शनि=मकर 18°43 ‘ श्रवण ‘ 3 खे
राहू=(व)वृषभ 14°05 ‘ रोहिणी , 2 वा
केतु=(व)वृश्चिक 14°05 अनुराधा , 4 ने
*,💮🚩शुभा$शुभ मुहूर्त🚩💮*
राहू काल 12:26 – 14:07 अशुभ
यम घंटा 07:20 – 09:02 अशुभ
गुली काल 10:44 – 12:26 अशुभ
अभिजित 11:58 -12:53 अशुभ
दूर मुहूर्त 11:58 – 12:53 अशुभ
🚩गंड मूल अहोरात्र अशुभ
💮चोघडिया, दिन
लाभ 05:38 – 07:20 शुभ
अमृत 07:20 – 09:02 शुभ
काल 09:02 – 10:44 अशुभ
शुभ 10:44 – 12:26 शुभ
रोग 12:26 – 14:07 अशुभ
उद्वेग 14:07 – 15:49 अशुभ
चर 15:49 – 17:31 शुभ
लाभ 17:31 – 19:13 शुभ
🚩चोघडिया, रात
उद्वेग 19:13 – 20:31 अशुभ
शुभ 20:31 – 21:49 शुभ
अमृत 21:49 – 23:08 शुभ
चर 23:08 – 24:26* शुभ
रोग 24:26* – 25:44* अशुभ
काल 25:44* – 27:02* अशुभ
लाभ 27:02* – 28:20* शुभ
उद्वेग 28:20* – 29:38* अशुभ
💮होरा, दिन
बुध 05:38 – 06:46
चन्द्र 06:46 – 07:54
शनि 07:54 – 09:02
बृहस्पति 09:02 – 10:10
मंगल 10:10 – 11:18
सूर्य 11:18 – 12:26
शुक्र 12:26 – 13:33
बुध 13:33 – 14:41
चन्द्र 14:41 – 15:49
शनि 15:49 – 16:57
बृहस्पति 16:57 – 18:05
मंगल 18:05 – 19:13
🚩होरा, रात
सूर्य 19:13 – 20:05
शुक्र 20:05 – 20:57
बुध 20:57 – 21:49
चन्द्र 21:49 – 22:42
शनि 22:42 – 23:34
बृहस्पति 23:34 – 24:26
मंगल 24:26* – 25:18
सूर्य 25:18* – 26:10
शुक्र 26:10* – 27:02
बुध 27:02* – 27:54
चन्द्र 27:54* – 28:46
शनि 28:46* – 29:38
*नोट*– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
*💮दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर*
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
*शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l*
*भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll*
*🚩 अग्नि वास ज्ञान -:*
*यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,*
*चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।*
*दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,*
*नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।* *महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्*
*नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।*
12 + 4 + 1 = 17 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
*💮 शिव वास एवं फल -:*
12 + 12 + 5 = 29 ÷ 7 = 1 शेष
कैलाश = शुभ कारक
*🚩भद्रा वास एवं फल -:*
*स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।*
*मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।*
*💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮*
* प्रदोष व्रत (शिव प्रदोष)
*💮 शुभ विचार 💮*
शान्तितुल्यं तपो नास्ति न सन्तोषात्परं सुखम् ।
न तृष्णया परो व्याधिर्न च धर्मो दया परः ।।
।।चा o नी o।।
एक संयमित मन के समान कोई तप नहीं. संतोष के समान कोई सुख नहीं. लोभ के समान कोई रोग नहीं. दया के समान कोई गुण नहीं.
*💮🚩 सुभाषितानि **🚩💮
गीता -: आत्मसयंमयोग अo-06
चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम् ।,
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥,
भावार्थ : क्योंकि हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, प्रमथन स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है।, इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर मानता हूँ॥,34॥,
*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। विवेक से कार्य करें। लाभ में वृद्धि होगी। फालतू की बातों पर ध्यान न दें। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में उन्नति होगी। व्यापार-व्यवसाय की गति बढ़ेगी। चिंता रह सकती है। थकान रहेगी। प्रमाद न करें।
🐂वृष
मस्तिष्क पीड़ा हो सकती है। आवश्यक वस्तु गुम हो सकती है या समय पर नहीं मिलेगी। पुराना रोग उभर सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। हल्की हंसी-मजाक करने से बचें। अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। यश बढ़ेगा।
👫मिथुन
कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर करें। किसी अनहोनी की आशंका रहेगी। शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में लापरवाही न करें। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। शेयर मार्केट से बड़ा लाभ हो सकता है।
🦀कर्क
किसी भी तरह के विवाद में पड़ने से बचें। जल्दबाजी से हानि होगी। राजभय रहेगा। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। घर में मेहमानों का आगमन होगा। व्यय होगा। सही काम का भी विरोध हो सकता है। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। निवेश शुभ रहेगा। सट्टे व लॉटरी के चक्कर में न पड़ें।
🐅सिंह
पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। जल्दबाजी न करें। आवश्यक वस्तुएं गुम हो सकती हैं। चिंता तथा तनाव रहेंगे। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। भेंट व उपहार देना पड़ सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। कार्य की बाधा दूर होगी। निवेश शुभ रहेगा। व्यापार में वृद्धि तथा सम्मान में वृद्धि होगी।
🙍♀️कन्या
शत्रुओं का पराभव होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे। बेवजह किसी व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। दूसरों के बहकावे में न आएं। फालतू बातों पर ध्यान न दें। लाभ में वृद्धि होगी।
⚖️तुला
शारीरिक कष्ट संभव है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। यात्रा मनोरंजक रहेगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। किसी प्रभावशाली व्यक्ति मार्गदर्शन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। झंझटों में न पड़ें।
🦂वृश्चिक
भूमि व भवन संबंधी खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। आर्थिक उन्नति होगी। संचित कोष में वृद्धि होगी। देनदारी कम होगी। नौकरी में मनोनुकूल स्थिति बनेगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। शेयर मार्केट आदि से बड़ा फायदा हो सकता है। परिवार की चिंता बनी रहेगी।
🏹धनु
प्रतिद्वंद्विता कम होगी। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। बात बिगड़ सकती है। शत्रुभय रहेगा। कोर्ट व कचहरी के काम मनोनुकूल रहेंगे। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। स्त्री वर्ग से सहायता प्राप्त होगी। नौकरी व निवेश में इच्छा पूरी होने की संभावना है।
🐊मकर
शत्रुभय रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। विवाद से क्लेश होगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। ऐश्वर्य के साधनों पर सोच-समझकर खर्च करें। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि बाद में पछताना पड़े। दूसरे अधिक अपेक्षा करेंगे। नकारात्मकता हावी रहेगी।
🍯कुंभ
धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। चोट व रोग से बचें। सेहत का ध्यान रखें। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। झंझटों में न पड़ें। व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। नौकरी में मातहतों का सहयोग मिलेगा। निवेश शुभ रहेगा। परिवार में प्रसन्नता रहेगी।
🐟मीन
सही काम का भी विरोध होगा। कोई पुरानी व्याधि परेशानी का कारण बनेगी। कोई बड़ी समस्या बनी रहेगी। चिंता तथा तनाव रहेंगे। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। सामाजिक कार्य करने के प्रति रुझान रहेगा। मान-सम्मान मिलेगा। रुके कार्यों में गति आएगी। निवेश शुभ रहेगा। नौकरी में चैन बना रहेगा।
🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 21 जुलाई 2021*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत – 1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – वर्षा*
⛅ *मास – आषाढ़*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – द्वादशी शाम 04:26 तक तत्पश्चात त्रयोदशी*
⛅ *नक्षत्र – ज्येष्ठा शाम 06:30 तक तत्पश्चात मूल*
⛅ *योग – ब्रह्म शाम 04:12 तक तत्पश्चात इन्द्र*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:45 से दोपहर 02:24 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:09*
⛅ *सूर्यास्त – 19:20*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत, वामन पूजा, जयापार्वती व्रतारम्भ (गुजरात)*
💥 *विशेष – द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *प्रदोष व्रत* 🌷
🙏🏻 *हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महिने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस बार 21 जुलाई, बुधवार को प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। प्रदोष पर व्रत व पूजा कैसे करें और इस दिन क्या उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है, जानिए…*
👉🏻 *ऐसे करें व्रत व पूजा*
🙏🏻 *- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।*
🙏🏻 *- इसके बाद बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।*
🙏🏻 *- पूरे दिन निराहार (संभव न हो तो एक समय फलाहार) कर सकते हैं) रहें और शाम को दुबारा इसी तरह से शिव परिवार की पूजा करें।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं। आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं।*
🙏🏻 *- भगवान शिवजी की आरती करें। भगवान को प्रसाद चढ़ाएं और उसीसे अपना व्रत भी तोड़ें।उस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।*
👉🏻 *ये उपाय करें*
*सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्ध्य देें। पानी में आकड़े के फूल जरूर मिलाएं। आंकड़े के फूल भगवान शिवजी को विशेष प्रिय हैं । ये उपाय करने से सूर्यदेव सहित भगवान शिवजी की कृपा भी बनी रहती है और भाग्योदय भी हो सकता है।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *कैसे करें सुबह की शुरुआत गुरुपूनम के दिन* 🌷
➡ *23 जुलाई 2021 शुक्रवार को गुरुपूनम है ।*
🙏🏻 *इस दिन सुबह बिस्तर पर तुम प्रार्थना करना : ‘‘हे महान पूर्णिमा ! हे गुरुपूर्णिमा ! अब हम अपनी आवश्यकता की ओर चलेंगे । इस देह की सम्पूर्ण आवश्यकताएँ कभी किसी की पूरी नहीं हुर्इं । हुर्इं भी तो संतुष्टि नहीं मिली । अपनी असली आवश्यकता की तरफ हम आज से कदम रख रहे हैं ।”*
🙏🏻 *उसी समय ध्यान करना । शरीर बिस्तर छोड़े उसके पहले अपने प्रियतम को मिलना । गुरुदेव का मानसिक पूजन करना । वे तुम्हारे मन की दशा देखकर भीतर-ही-भीतर संतुष्ट होकर अपनी अनुभूति की झलक से तुम्हें आलोकित कर देंगे। उनके पास उधार नहीं है, वे तो नगदधर्मा हैं ।*
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*_बुधवार 21 जुलाई 2021_*
*_ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।_*
*_।। आज का दिन मंगलमय हो ।।_*
🌌 *_दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।_*
*_बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।_*
*_बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।_*
🔮 *_विक्रम संवत् 2078 आनन्द, विक्रम सम्वत संवत्सर तदुपरि खिस्ताब्द आंग्ल वर्ष 2021_*
🔯 *_शक संवत – 1943,_*
☸️ *_कलि संवत 5122_*
☣️ *_अयन – दक्षिणायन_*
🌦️ *_ऋतु – सौर वर्षा ऋतु_*
🌤️ *_मास – आषाढ़ माह_*
🌖 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष,_*
📆 *_तिथिः- द्वादशी तिथि 16:27:25 बजे तक तदोपरान्त त्रयोदशी तिथि_*
📰 *_तिथि स्वामीः- द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान विष्णु जी हैं तथा त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं।_*
💫 *_नक्षत्रः- ज्येष्ठा नक्षत्र 18:30: 24 तक तदोपरान्त मूल नक्षत्र_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामीः- ज्येष्ठा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं तदोपरान्त मूल नक्षत्र के स्वामी केतु देव हैं।_*
🔊 *_योगः- ब्रह्मा 16:10:31 तक तदोपरान्त इंद्र_*
🔥 *_गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 10:44:00 से 12:27:00 तक_*
⚜️ *_दिशाशूलः- बुधवार को उत्तर दिशा में जाना अशुभ होता है यदि आवश्यक हो तो घर से धनियां या तेल खाकर निकलें।_*
🤖 *_राहुकालः- आज का राहु काल 12:27:00 से 02:10:00 तक_*
✨ *_करण : बव – 05:52 ए एम तक_*
⚡ *_बालव – 04:26 पी एम तक कौलव – 02:59 ए एम, जुलाई 22 तक तैतिल_*
🌞 *_सूर्योदयः- प्रातः 05:19:00_*
🌅 *_सूर्यास्तः- सायं 06:41:00_*
✡️ *_विजय मुहूर्त दोपहर 02.44 पीएम से 03.39 पीएम तक_*
🗣️ *_निशिथ काल रात 12.07 एएम से 12.48 एएम तक (22 जुलाई)_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त संध्या 07.05 पीएम से 07.29 पीएम तक_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04.14 एएम से 04.55 एएम तक (22 जुलाई)_*
💧 *_अमृत काल सुबह 10:27 एएम से 11:55 एएम तक_*
☄️ *_ब्रह्म योग – शाम 4 बजकर 12 मिनट तक_*
☀️ *_ज्येष्ठा नक्षत्र – शाम 6 बजकर 30 मिनट तक_*
🚓 *_यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻♀️ *_आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व व त्यौहार – प्रदोष व्रत, वामन द्वादशी (वामन पुजा), जया पार्वती व्रतारम्भ, श्री उमाशंकर जोशी जयंती_*
✍🏼 *_विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर एवं त्रयोदशी तिथि को बैंगन नहीं खाना चाहिये। ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से किया गया पूजन, उनके नाम एवं स्तोत्रों (विष्णुसहस्रनाम) के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।_*
🌷 *_Vastu tips_* 🌸
*_वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए पर्स के बारे में। आपके पर्स में पैसों के अलावा भी बहुत-सी चीज़ें रखी होती हैं, जिनमें से कई तो बहुत समय से इस्तेमाल में नहीं आ रही होती।_*
*_वास्तु शास्त्र के अनुसार इनमें से कुछ चीज़ों को तो पर्स से बाहर ही कर देना चाहिए क्योंकि इन चीज़ों से आस-पास निगेटिव ऊर्जा बढ़ती है। साथ ही आपको पैसों के मामले में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। लेकिन कुछ ऐसी चीज़ें भी होती हैं जिन्हें पर्स में रखने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और बरकत आती है।_*
*_पर्स के अंदर कटे-फटे नोट, कोई फोटो या खराब कागज़ नहीं रखने चाहिए। इससे पैसों की आवक में कमी आती है। पर्स जितना साफ-सुथरा होगा और उसके अंदर रखी चीज़ें जितने सलीके से होंगी उतना ही अच्छा रहता है। पर्स में एक लक्ष्मी माता की कागज की फोटो जरूर रखें और समय-समय पर इसे चेंज करते रहें. इससे आपका पर्स कभी खाली नहीं रहेगा। इसके अलावा आप एक श्रीयंत्र भी रख सकते हैं क्योंकि यह लक्ष्मी का ही एक रूप है।_*
➡️ *_जीवनोपयोगी कुंजियां_* ⚜️
*_बालों का झड़ना अगर आपके बाल बहुत तेजी से झड़ रहे हैं तो लौकी का छिलका काफी मददगार साबित हो सकता है। इसमें पाए जाने वाले तत्व स्कैल्प में पहुंचकर बंद पड़े रोगछिद्रों को खोल देते हैं। इसके साथ ही यह बालों को नमी प्रदान करता है। जिससे आपके बाल काफी हद तक टूटना कम हो जाते है।_*
*_ऐसे करें लौकी के छिलकों का इस्तेमाल लौकी के छिलकों को पीसकर इसे छानकर इसका रस निकाल लें। इसके बाद इसे स्कैल्प पर अच्छी तरह से लगाएं। हल्के हाथों से मसाज करके थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। इसके बाद साफ पानी और माइल्ड शैंपू से बालों को धो लें।_*
*_गंजेपन से निजात पाने के लिए लौकी के रस में विटामिन बी1 पाया जाता है जो सिर में ब्लड सेल्स की मात्रा बढ़ा देता है जिससे स्कैल्प पर अच्छी तरह से ऑक्सीजन पहुंचने में मदद मिलती है। इसके अलावा जूस में पैंटोथेनिक एसि़ड नामक एंटी स्ट्रेस विटामिन होता है। जो स्ट्रेल हार्मोंस को कंट्रोल करके बालों को हेल्दी रखता है। गंजेपन से निजात पाने के लिए लौकी के जूस में ऑलिव ऑयल या सरसों का तेल मिलाकर बालों की स्कैल्प पर अच्छा तरह लगाएं।_*
🥝 *_आरोग्य संजीवनी_* 🥑
*_ठंडे पानी का करे इस्तेमाल अगर आपको आंखों में कुछ चला गया है तो तुरंत ठंडे पानी के छींटे मार लें। इससे आपको थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा। इसके अलावा ठंडे पानी में साफ कपड़ा भिगो लें और उसे आंखों के ऊपर रख लें।_*
*_गुलाब जल आंखों का रूखापन और जलन कम करने के लिए गुलाब जल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एक कॉटन में गुलाब जल डालकर आंखों के ऊपर रख लीजिए। इससे आपको आराम मिलेगा। इसके साथ ही आपको थकान में भी आराम मिलेगा।_*
*_दूध कच्चा दूध भी रखने से खुजली से निजात मिलेगा। इसके लिए कॉटन में ठंडा दूध से भिगोकर आंखों को बंदकर ऊपर रख लें।_*
*_एलोवेरा आंखों में होने वाली खुजली से एलोवेरा भी निजात दिला सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाए जाते हैं जो आंखों की जलन, खुजली से निजात मिल जाता है। एलोवेरा जेल को एक कॉटन में लेकर आंखों को बंद करके उसके ऊपर रखें। थोड़ी देर रखने के बाद आंखों को धो लें। इस बात का ध्यान रखें कि एलोवेरा आंखों के अंदर ना जाए।_*
📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️
*_आचार्य श्री गोपी राम की नीतियां और विचार आज के समय में भी प्रासांगिक हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन में सफलता चाहता है तो उसे इन विचारों को जीवन में उतारना होगा। हमारे इन्हीं विचारों में से आज हम एक विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार मैं सब जानता हूं इस पर आधारित है।_*
*_’मैं सब जानता हूं। यही सोच इंसान को कुएं का मेंढक बना देती है।’_*
*_इस कथन का अर्थ है कि जिस दिन मनुष्य के अंदर ये बात आ गई कि वो सब कुछ जानता है उस दिन वो ये समझ जाए कि उसका पतन होना शुरू हो गया। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं सब जानता हूं में कहीं ना कहीं अहंकार झलकता है। अहंकार ऐसी चीज है जो किसी भी इंसान को अंदर से धीरे-धीरे खोखला कर देती है।_*
*_मनुष्य को अपने अंदर सीखने की चाहत कभी भी खत्म नहीं करनी चाहिए। ऐसा करके वो अपने अंदर से जिज्ञासा को खत्म कर देता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि जिंदगी में आपको हर चीज आती है। पूरी जिंदगी मनुष्य कुछ ना कुछ सीखता रहता है। मनुष्य हमेशा इस बात का ध्यान रखे कि आपको कोई चीज अगर ना पता हो और अगर आपसे कम उम्र के लोगों को पता हो तो उससे जानकारी लेने में कोई हर्ज नहीं है। ऐसा करके आप उससे छोटे नहीं हो जाएंगे। किसी से भी कुछ भी चीज सीखने में संकोच नहीं करना चाहिए।_*
*_कई लोग ऐसे होते हैं कि जो हमेशा यही दिखाते हैं कि उन्हें सबकुछ आता है। या फिर दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं है जो उन्हीं ना आती हो। इसी वजह से उनके मन में मैं सब जानता हूं का भाव आ जाता है। धीरे-धीरे यही भाव अहंकार में बदलता जाता है। ऐसे में अगर आपको कोई चीज पता भी ना हो तब भी वो सीखने में संकोच कर जाता है। अगर आपके मन में भी इस तरह का भाव है तो इस भाव को दिमाग से तुरंत निकाल दें। आप कुएं में मौजूद उस मेंढक की तरह हो जाएंगे जिसकी जिंदगी कुएं की चार दीवारी ही हैं। इसी वजह से हमने कहा है कि मैं सब जानता हूं। यही सोच इंसान को कुएं का मेंढक बना देती है।_*
*_●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●_*
⚜️ *_आज के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये तथा भगवान नारायण का पूजन और जप आदि से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह तिथि यशोबली और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। भद्रा नाम से विख्यात ये तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।_*
*_द्वादशी तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।_*
🖌 *_””सदा मुस्कुराते रहिये””_*
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