जिला अधिवक्ता संघ का बड़ा फैसला, अब हर बुधवार को हड़ताल पर रहेंगे वकील
जिला अधिवक्ता संघ का बड़ा फैसला, अब हर बुधवार को हड़ताल पर रहेंगे वकील

बांदा: जिला अधिवक्ता संघ का बड़ा फैसला, अब हर बुधवार को हड़ताल पर रहेंगे वकील
कानपुर प्रांतीय अधिवेशन के प्रस्ताव का समर्थन, न्यायिक कार्यों का होगा पूर्ण बहिष्कार
बांदा।
जिला अधिवक्ता संघ, बांदा ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को आयोजित अपनी आमसभा में एक अहम फैसला लिया है। कानपुर में हुए प्रांतीय अधिवेशन के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए बांदा के अधिवक्ता अब से प्रत्येक सप्ताह बुधवार को पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। इसकी शुरुआत इसी बुधवार से हो रही है, जहां जिले के सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे।
यह जानकारी जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह ‘बी.के. सिंह’ द्वारा जारी की गई। इस निर्णय में बार संघ अध्यक्ष के साथ विनोद सिंह, प्रमोद सिंह, राकेश सिन्हा, राजेश कुमार, सोनू त्रिपाठी, राममिलन सिंह पटेल, शिवविलास, सुशील कुमार और सत्येन्द्र गौतम जैसे कई प्रमुख अधिवक्ताओं की सहभागिता रही।
कानपुर प्रांतीय अधिवेशन में बनी थी रणनीति
गौरतलब है कि बीते 10 और 11 सितंबर 2026 को कानपुर बार एसोसिएशन तथा ‘द लायर्स एसोसिएशन’ के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय प्रांतीय अधिवक्ता अधिवेशन संपन्न हुआ था। इस अधिवेशन में उत्तर प्रदेश के लगभग 60 बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और वकीलों के हितों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा कर हर बुधवार को प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया था।
अधिवेशन में मुख्य रूप से इन 5 बिंदुओं पर हुई चर्चा:
हड़ताल न करने का दबाव: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा वकीलों से हड़ताल न करने की अंडरटेकिंग (Undertaking) मांगने का विरोध।
एडवोकेट एक्ट 1961: इस कानून में प्रस्तावित संशोधन बिल पर विचार और रणनीति।
अधिवक्ता विरोधी निर्णय: हाईकोर्ट की रिट याचिका संख्या 12231/2025 में आए अधिवक्ता विरोधी फैसले पर चिंता।
सुरक्षा अधिनियम: प्रदेश में ‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’ को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग।
न्यायिक जवाबदेही: न्याय प्रणाली में न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर।
इन्हीं पांच सूत्रीय प्रस्तावों को अमलीजामा पहनाने के लिए बांदा जिला अधिवक्ता संघ ने 14 सितंबर को दोपहर 3 बजे जनरल हाउस (आमसभा) बुलाई थी, जिसमें अधिक से अधिक अधिवक्ताओं की मौजूदगी में बुधवार को हड़ताल पर जाने का यह अहम निर्णय लिया गया।
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