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गांव में IS और IPS की भरमार

गांव में IS और IPS की भरमार

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*लोकेशन :-* सहरसा।
*संवाददाता :-* विकास कुमार 8877760777।
*स्लग :-* गांव में IS और IPS की भरमार।

*स्टोरी :-* बिहार का एक ऐसा गांव जहां IS और IPS के नाम से जाना जाता है इस गांव को वह है बनगांव। यहाँ IS और IPS की है भरमार। जाने बनगांव की पूरी कहानी।

*एंकर :-* वन देवी एक देव स्थल है और यहां बहुत जंगल हुआ करता था जो देवना में स्थापित है उसी वन देवी के नाम पर बनगांव का नाम दिया गया है,बनगांव गांव जो है यहां सभी समाज और जात के लोग रहते है लेकिन इस गांव में ब्राह्मण समाज के लोगों की संख्यां तकरीबन 60 हजार के पास है बतायी जा रही है।।इस गांव की सबसे बड़ी खासियत है कि पिछले 200 ,300 सालों में जब से बाबा लक्ष्मीनाथ गोंसाई जब से यहां रहने लगे तबसे इस गांव का रिकॉर्डेड इतिहास रहा है।बाबा लक्ष्मीनाथ गोंसाई जी की यहां तपोभूमि थी।यहां पर उन्होंने तपस्या और लोगों की सेवा की है।यहां उनकी कर्म भूमि थी।उसके साथ साथ उनकी प्रेरणा से यहां समाज सुधार का काम पहले से शुरू हो गया ।जैसे यहां बबुआ खाँ एक समाज सुधारक थे जिन्होंने धर्म सभा की परंपरा चलाई ।उसके बाद यहां शिक्षा पर काफी जोड़ दिया गया ।इसी गांव में एक लक्ष्मेश्वर झा थे जो 1922 में एमए इंग्लिश में किया 1928 में पटना यूनिवर्सिटी से लौ भी किया।वो शिक्षा के प्रति समर्पित रहते थे।और वो अपना कैरियर हेडमास्टर से शुरुवात किये।शुरू में फारबिसगंज,कुर्सेला में थे।और फिर गांव में 1939 में एक हाइ स्कूल खोला।उस हाइ स्कूल के चलते इस गांव में शिक्षा बहुत जोड़ पकड़ा।उस समय यहां हाइस्कूल हुआ नहीं करता था यहां लोग दूर दूर से यहां पढ़ने आते थे जिसके वजह से शिक्षा बहुत आगे गया।जो जेनरेशन अच्छा किया फर्स्ट जेनरेशन उनके बच्चे अच्छा करने लगे
बनगांव गांव के रहने वाले प्रथम आईएएस उदय शंकर झा उर्फ नारायण झा ने टेलीफोनिक वार्ता के दौरान बताया कि मैं 1965 में मेट्रिक कुलेशन किये और साइंस कॉलेज पटना से MSC फिजिक्स में किया।और साथ ही साथ साइंस कॉलेज में एक साल लेक्चरर भी रहा।और 1974 में यूपीएससी सिविल सर्विस में पास किये उसके बाद मैं रेलवे में चले गए,साथ ही साथ एक अशोक झा भी थे जो इनकम टैक्स में चले गए।।उन्होंने ये भी कहा की 1985ईस्वी में रंजन खां आईएएस में आये और फिर 1991 में डॉ सरोज झा आये,आलोक ठाकुर आईपीएस में आये,फिर राकेश मिश्रा आईपीएस में आये,इस तरह से सील सिला चालू रहा।इसके बाद सब साल आईएएस आईपीएस या विभिन ट्रेड में लोग आते रहे।

anupam

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