अतिपिछड़ा वर्ग ने की ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण करने की मांग
अतिपिछड़ा वर्ग ने की ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण करने की मांग

अतिपिछड़ा वर्ग ने की ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण करने की मांग
मंडल प्रभारी गंगाप्रसाद करवरिया
चित्रकूट। अतिपिछड़ा समाज महासभा की बैठक टाउन हाल कर्वी में संपन्न हुई। जिसमें अतिपिछड़ा समाज ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण करने की मांग की गई। उत्तर प्रदेश में 52% ओबीसी की संख्या है। जिसमें से 38% संख्या अतिपिछड़ों की है। जिसमें नाई कुम्हार लोहार बढ़ाई भडभुंजा दर्जी केवट कहार गडरिया तमोली काछी माली कलवार बारी नोनिया राजभर आरख आदि सत्तर जातियां हैं। इन सत्तर जातियों की आबादी ओबीसी की सबल समृद्ध नवजमींदार जातियों की आबादी का दोगुना है। किंतु मुख्यधारा से कटा हुआ है। मुख्य अतिथि अतिपिछड़ा महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष वरदानी प्रजापति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सामाजिक समिति की रिपोर्ट के अनुसार इन सभी दोगुनी संख्या वाली अतिपिछड़ी जातियों को आबादी के अनुपात से आरक्षण का चौथाई हिस्सा भी नहीं मिल पा रहा है। वास्तव में अतिपिछडी जातियों को 27% में 19% प्रतिशत हिस्सा मिलना चाहिए था। जो नहीं मिल पा रहा है। अतिपिछड़ों का यह समूह सामान्यतया भूमिहीन है। उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार ओबीसी के 27% आरक्षण का वर्गीकरण करके समतलीकरण करने का प्रयास की थी। ताकि अतिपिछड़ा वर्ग का अधिकार ओबीसी जमींदार धनपतियों तक न पहुंचकर परजा( अतिपिछड़ा) तक पहुँचे। किंतु प्रयास असफल रहा और राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट भी नहीं लागू हो पायी है। अतिपिछडा महासभा के अध्यक्ष श्रीकांत साहू ने कहा कि अति पिछडा वर्ग का अधिकार समृद्ध पिछड़ों के खाते में जा रहा है। जिससे अतिपिछडी जातियां आज भी हासिए पर हैं। प्रगतिशील चिंतक साहित्यिकार सुनील चित्रकूटी ने चिंता जताते हुए कहा कि 1977 मे बिहार में मुंगेरी लाल की रिपोर्ट आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर ने 26% ओबोसी को आरक्षण देकर वर्गीकरण कर दिया था। जो देश में पहली बार था किंतु जब मंडल आयोग के द्वारा 27% आरक्षण पूरे देश मे लागू हुआ तो कर्पूरी ठाकुर के द्वारा किये हुए वर्गीकरण को खत्म कर दिया गया तथा जमींदार ओबीसी तथा परजा श्रमिक कामगार सेवादार दस्तकर शिल्पकारों को एक ही चश्मे से देखकर एक वर्ग बना दिय गया। जिसके परिणामस्वरूप यह हुआ कि आज भी अतिपिछड़ा वर्ग मुख्यधारा से न जुड़कर हासिए में है। सरकार से मांग कर रहे कि ओबीसी का वर्गीकरण किया जाय। प्रजापति समाज के संघर्षशील नेता राम किशोर प्रजापति ने कहा कि ओबोसी का वर्गीकरण से ओबीसी जातियो मे समतलीकरण होगा। प्रखरवक्ता शिक्षक रामेश्वर प्रजापति ने कहा कि ओबीसी वर्गीकरण के लिये राघवेंद्र कुमार रिपोर्ट लागू की जाए। राष्ट्रीय नाई महासभा के प्रदेश सचिव मेवालाल सविता ने कहा कि अतिपिछड़ी जातियां आज भी अपने अधिकार से वंचित है। सरकार से हम विनम्रतापूर्वक हम मांग कर रहे कि वर्गीकरण किया जाये। संघर्षशील नेता राष्ट्रीय नाई महासभा के जिलाध्यक्ष गया प्रसाद सविता ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण के लिए केंद्र सरकार रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू करे। जिला पंचायत सदस्य दशरथ प्रजापति ने कहा कि अतिपिछड़ा वर्ग को जब वाजिब अधिकार मिलेगा तभी मुख्य धारा से जुड़ पायेगा। अतिपिछड़ा समाज महासभा की बैठक मे रामबाबू कुशवाहा अरविंद प्रजापति, गया प्रसाद प्रजापति,अखिलेश रैकवार,एडवोकेड अवधेश बक्सी,मुकुंदीलाल सविता,शिवसहाय पाल, जयगोपाल कुशवाहा,रामपाल प्रजापति,श्रषिकुमार सविता,चुनबाद प्रजापति, मैकू प्रजापति,
संदीप कुमार ,आशीष प्रजापति, सुनील याज्ञिक, राकेश कुमार नामदेव आदि अतिपिछड़ा वर्ग के लोग अधिक से अधिक संख्या मे उपस्थित रहे।

Subscribe to my channel


