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फिरोजाबाद : एक घटना कबीर जी के जीवन की है।

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पंडित श्याम शर्मा मंडल प्रभारी
एक बाजार से कबीर गुजरते हैं। एक बच्चा अपनी मां के साथ बाजार आया है।
मां तो शाक-सब्जी खरीदने में लग गई और बच्चा एक बिल्ली के साथ खेलने में लग गया है।
वह बिल्ली के साथ खेलने में इतना तल्लीन हो गया है कि भूल ही गया कि बाजार में हैं;

भूल ही गया कि मां का साथ छूट गया है; भूल ही गया कि मां कहां गई।

कबीर बैठे उसे देख रहे हैं। वे भी बाजार आए हैं, अपना जो कुछ कपड़ा वगैरह बुनते हैं, बेचने।
वे देख रहे हैं। उन्होंने देख लिया है कि मां भी साथ थी इसके और वे जानते हैं कि थोड़ी देर में उपद्रव होगा….,

क्योंकि मां तो बाजार में कहीं चली गई है और बच्चा बिल्ली के साथ तल्लीन हो गया है।

अचानक बिल्ली न छलांग लगाई। वह एक घर में भाग गई। बच्चे को होश आया। उसने चारों तरफ देखा और जोर से आवाज दी मां को।

*चीख निकल गई।*

दो घंटे तक खेलता रहा, तब मां की बिल्कुल याद न थी..क्या तुम कहोगे?

*कबीर अपने भक्तों से कहतेः* *ऐसी ही प्रार्थना है,*
*जब तुम्हें याद आती है और एक चीख निकल जाती है।*

*कितने दिन खेलते रहे संसार में,*
*इससे क्या फर्क पड़ता है?*

*जब चीख निकल जाती है,*
*तो प्रार्थना का जन्म हो जाता है।*
*तब कबीर ने उस बच्चे का हाथ पकड़ा,*
*उसकी मां को खोजने निकले।*

*तब कोई सदगुरु मिल ही जाता है जब तुम्हारी चीख निकल जाती है।*
*जिस दिन तुम्हारी चीख निकलेगी, तुम सदगुरु को कहीं करीब ही पाओगे..*

*कोई फरीद,*
*कोई कबीर,*
*कोई नानक,*
*तुम्हारा हाथ पकड़ लेगा और कहेगा कि हम उसे जानते हैं भलीभांति;*
*हम उस घर तक पहुंच गए हैं, हम तुझे पहुंचा देते हैं।*
[11/09, 4:57 PM] savitanandmishra: *धर्म कथाएं (015)*
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*गुण भी कभी कभी दोष बन जाते हैं*

उदासीनवदासीनो गुणैर्यो न विचाल्यते।
गुणा वर्तन्त इत्येव योवतिष्ठति नेंगते।…. श्री मद्भागवत्गीता

सुनहु तात मायाकृत, गुन अरु दोष अनेक।
गुन यह उभय न देखिअहिं, देखिय सो अविवेक।….. श्री राम चरितमानस।

युग तुलसी पं।राम किंकर जी का अद्भुत चिंतन सार, संक्षेप,:-

गीता का संदेश यह है, कि जो उदासीन की तरह स्थित हैऔर जो गुणों
के द्वारा विचलित नहीं किया जा सकता तथा गुण ही गुणों में बरत रहे
हैं—इस भाव से जो अपने स्वरूप में स्थित रहता है, और स्वयं कोई चेष्टा
नहीं करता।

” तत्ववित्तु महाबाहो गुण कर्म बिभागयोः।
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते”। 3 / 28. गीता।

हे महाबाहो! गुण विभाग और कर्म विभाग को तत्व से जानने वाला महापुरुष

‘सम्पूर्ण गुण ही गुणों में बरत रहे हैं’—ऐसा मानकर, उनमें आसक्त नहीं होता।

इसका तात्पर्य यह है कि सम्पूर्ण क्रियायें संसार (पदार्थ और क्रिया) में ही

हो रही हैं। स्वरूप में कोई क्रिया नहीं होती।

यानी प्रकृति जन्य गुणों से अत्यंत मोहित हुए, अज्ञानी पुरुष गुणों और

कर्मों में आसक्त रहते हैं। आइए, इस गूढ़ गुण-चिन्तनके महत्त्वपूर्ण मानस-ब्याख्या पर,

दृष्टिपात करें।

भगवान राम ने उत्तरकांड में भरतजी से संतों के लक्षण बताए-

” विषय अलंपट सील गुनाकर। पर दुख-दुख सुख सुख देखे पर।
सम अभूत रिपु बिमद बिरागी। लोभामरष हरष भय त्यागी।

कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया।
सबहिं मानप्रद आपु अमानी। भरत प्रान सम मम ये प्रानी।

बिगत काम मम नाम परायन। सांति बिरति बिनति मुदितायन।
सीतलता सरलता मयत्री। द्विज पद प्रीति धर्म जनयत्री।

ए सब लच्छन बसहिं जासु उर। जानेहु तात सन्त सन्तत फुर॥”

इतने गुण बखान के बाद भगवान ने एक बिचित्र बात कह दी-

“सुनहु तात मायाकृत गुन अरु दोष अनेक।”

यानी ये सारे गुण और दोष माया के खेल हैं। अन्यत्र भी इसी का समर्थन

करते हुए कहा गया कि, “माया कृत गुन दोष अनेका।”

माया का स्पष्ट अर्थ है जादू।

जैसे कोई जादूगर अपनी टोपी में से साँप और कबूतर पैदा कर देता है, दर्शकों

का कान पकड़ कर उनसे पैसा गिराने लगता है। जो इस जादू को जानता है,

वह न इस साँप से डरेगा, न रुपयों से आकर्षित होगा। ठीक इसी प्रकार गुण

और दोष माया के खेल हैं।

अब एक सवाल मन में उठता है कि फिर इसको इतना अधिक समझाने

की आवश्यकता क्यों?

रामायण का मत है कि हमारे हृदय में अगर दोषी से द्वेष हो जाय और गुणी

से राग हो जाय, तो ए दोनों गुण और दोष बन्धन के कारण हैं।

इसलिए ही भगवान कहते हैं कि,

“गुन यह उभय न देखियहिं”

यानी कि हम संत में जो गुण देखते हैं, वह हमारी श्रद्धा तथा भावना का
परिणाम है। वास्तव में संत में वे गुण हैं कि नहीं, इसे कुछ लोग कहेंगे
‘है’ और बिरोधी कहेंगे कि यह सब पाखंड है।

इसका उपाय बताते हुए गोस्वामी जी ने कहा-

“ताते कुछ गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।”

यानी सामने वाले की भावमयी मूर्ति हमारे मन में कैसी बनी है? क्योंकि

हमारा कल्याण किसी स्थूल शरीर से न होकर, उस स्वरूप से होगा, जिसका

अनुभव हम अपने भाव राज्य में कर रहे हैं।

काकभुसुंडिजी ने गरुण को अपनी आत्मकथा सुनाते हुए कहा कि लोमशजी

ने मुझे कौवा बना दिया। यहाँ पर दृष्टि की विशेषता प्रगट हो गयी, कैसे-

संत के गुणों में बताया गया कि-

“सम दम नियम नीति नहिं डोलहिं। पुरुष बचन कबहूँ नहिं बोलहिं।”

यानी संत कभी कठोर शब्द नहीं बोलता। लेकिन लोमश जी ने कहा-

“सठ स्वपक्ष तव हृदय बिसाला। सपदि होहि पच्छी चंडाला।”

इसपर भुसुंडिजी कह सकते थे कि संत का लक्षण नहीं मिला, अतः वे सन्त
नहीं हैं, पर भुसुंडिजी को क्रोध नहीं आया।

गरुण जी के इसका कारण पूछने पर जो दो बातें उन्होंने बताया, वह अद्भुत है।

उनमें एक बात ब्यावहारिक है, तथा दूसरी परमार्थिक।

उन्होंने कहा कि गरुण जी, चन्दन शीतल होता है, किन्तु अगर कोई चन्दन को

सूखे पत्थर पर रगड़ने लगे, तो शीतलता, गरमी में बदल जायेगी,

“अति संघरषन कर जो कोई. अनल प्रगट चंदन ते होई.” कहा कि यह तो मेरा

ही दोष था, जो मैंने तर्क वितर्क किया, जिसके कारण वे क्रोधित हो गये।
फिर गरुणजी ने कहा कि-उन्होंने कठोर शब्द ही नहीं कहा बल्कि आपको

कौआ बना दिया!

भुसुंडिजी का जबाब बहुत काम का था कि, ए लोमश जी का दिया हुआ श्राप

नहीं है बल्कि-

“कृपा सिंधु मुनि मति करि भोरी। लीन्हीं प्रेम परीच्छा मोरी।”

यानी, लोमशजी के मुख से हमारे कौतुकी प्रभु ही स्वयं मेरी प्रेम की परीक्षा

लेने के लिए बोल रहे हैं। यही शैली हमारे हृदय में होनी चाहिए.

इसका सार निष्कर्ष यह है कि यदि किसी ब्यक्ति के गुण दोष को देखकर

हम राग द्वेष में पड़ गये, तो हमने दोनों तरफ से घाटा उठाया। होना यह

चाहिये कि हमारे हृदय में गुणों के ज्ञान से गुणों के संग्रह की भावना आए,

तथा दोषों का वर्णन सुनने पर दोषी को भूलकर दोष छोड़ने की बृत्ति आये।

इसीलिए भगवान ने भरत से कहा-“गुन यह उभय न देखिअहिं।” यानी, इन

दोनों (गुण और दोष) को दो नहीं समझें। अगर बिचार करेंगे तो पता चलेगा

कि समाज में कभी गुण दोष बन जाते हैं।

🌹🌼🌺🌷💐🥀

जय जय

*🌼🌻श्री कृष्णं वन्दे🌻🌼*
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[11/09, 4:57 PM] savitanandmishra: *भक्त और भगवान (455)*
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*स्वामी रामानन्द*

स्वामी रामानन्द का जन्म 1299ई. में माघकृष्णसप्तमी को प्रयाग में हुआ था। इनके पिता का नाम पुण्यसदनऔर माता का नाम सुशीला देवी था। इनका बाल्यकाल प्रयाग में बीता। यज्ञोपवीत संस्कार के उपरान्त वे प्रयाग से काशी चले आए और गंगा के किनारे पंचगंगाघाट पर स्थायी रूप से निवास करने लगे। इनके गुरु स्वामी राघवानन्द थे जो रामानुज (अचारी) संप्रदाय के ख्यातिलब्ध संत थे। स्वामी राघवानन्द हिन्दी भाषा में भक्तिपरककाव्य रचना करते थे। स्वामी रामानन्द को रामभक्तिगुरुपरंपरासे मिली। हिंदी भाषा में लेखन की प्रेरणा उन्हें गुरुकृपासे प्राप्त हुई।

पंचगंगाघाटपर रहते हुए स्वामी रामानुज ने रामभक्तिकी साधना के साथ-साथ उसका प्रचार और प्रसार भी किया। स्वामी रामानन्द ने जिस भक्ति-धारा का प्रवर्तन किया, वह रामानुजीपरंपरा से कई दृष्टियोंसे भिन्न थी। रामानुजी संप्रदाय में इष्टदेव के रूप में लक्ष्मीनारायण की पूजा होती है। स्वामी रामानन्द ने लक्ष्मीनारायण के स्थान पर सीता और राम को इष्टदेव के आसन पर प्रतिष्ठित किया। नए इष्टदेव के साथ ही स्वामी रामानन्द ने रामानुजीसंप्रदाय से अलग एक षडक्षरमंत्र की रचना की। यह मंत्र है- रांरामायनम:।

इष्टदेव और षडक्षरमंत्र के अतिरिक्त स्वामी रामानन्द ने इष्टोपासनापद्धतिमें भी परिवर्तन किया। स्वामी रामानन्द ने रामानुजीतिलक से भिन्न नए ऊ‌र्ध्वपुण्डतिलक की अभिरचनाकी। इन भिन्नताओंके कारण स्वामी रामानन्द द्वारा प्रवर्तित भक्तिधारा को रामानुजी संप्रदाय से भिन्न मान्यता मिलने लगी। रामानुजीऔर रामानन्दी संप्रदाय क्रमश:अचारीऔर रामावत नाम से जाने जाने लगे। रामानुजीतिलक की भांति रामानन्दी तिलक भी ललाट के अतिरिक्त देह के ग्यारह अन्य भागों पर लगाया जाता है। स्वामी रामानन्द ने जिस तिलक की अभिरचनाकी उसे रक्तश्रीकहा जाता है। कालचक्र में रक्तश्रीके अतिरिक्त इस संप्रदाय में तीन और तिलकोंकी अभिरचनाहुई। इन तिलकोंके नाम हैं, श्वेतश्री(लश्करी), गोलश्री(बेदीवाले) और लुप्तश्री(चतुर्भुजी)।

इष्टदेव, मंत्र, पूजापद्धतिएवं तिलक इन चारों विंदुओंके अतिरिक्त स्वामी रामानन्द ने स्वप्रवर्तितरामावत संप्रदाय में एक और नया तत्त्‍‌व जोडा। उन्होंने रामभक्तिके भवन का द्वार मानव मात्र के लिए खोल दिया। जिस किसी भी व्यक्ति की निष्ठा राम में हो, वह रामभक्त है, चाहे वह द्विज हो अथवा शूद्र, हिंदू हो अथवा हिंदूतर।वैष्णव भक्ति भवन के उन्मुक्त द्वार से रामावत संप्रदाय में बहुत से द्विजेतरऔर हिंदूतरभक्तों का प्रवेश हुआ। स्वामी रामानन्द की मान्यता थी कि रामभक्तिपर मानवमात्र का अधिकार है, क्योंकि भगवान् किसी एक के नहीं, सबके हैं- सर्वे प्रपत्तिरधिकारिणोमता:।

ज्ञातव्य है कि रामानुजीसंप्रदाय में मात्र द्विजाति(ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) को ही भगवद्भक्तिका अधिकार प्राप्त है। स्वामी रामानन्द ने रामभक्तिपर मानवमात्र का अधिकार मानकर एक बडा साहसी और क्रान्तिकारी कार्य किया था। इसके लिए उनका बडा विरोध भी हुआ। स्वामी रामानन्द का व्यक्तित्व क्रान्तिदर्शी,क्रान्तिधर्मीऔर क्रान्तिकर्मीथा। उनकी क्रान्तिप्रियतामात्र रामभक्तितक ही सीमित नहीं थी। भाषा के क्षेत्र में भी उन्होंने क्रान्ति का बीजारोपण किया। अभी तक धर्माचार्य लेखन-भाषण सारा कुछ देवभाषा संस्कृत में ही करते थे। मातृभाषा होते हुए भी हिंदी उपेक्षत-सी थी। ऐसे परिवेश में स्वामी रामानन्द ने हिंदी को मान्यता देकर अपनी क्रान्तिप्रियताका परिचय दिया। आगे चलकर गोस्वामी तुलसीदास ने स्वामी रामानन्द की भाषा विषयक इसी क्रान्ति प्रियताका अनुसरण करके रामचरितमानस जैसे अद्भुत ग्रंथ का प्रणयन हिंदी भाषा में किया।

ऐसा माना जाता है कि स्वामी रामानन्द विभिन्न परिवेशों के बीच एक सेतु की भूमिका का निर्वाह करते थे। वे नर और नारायण के बीच एक सेतु थे; शूद्र और ब्राह्मण के बीच एक सेतु थे; हिन्दू और हिंदूतरके बीच एक सेतु थे; देवभाषा (संस्कृत) और लोकभाषा(हिन्दी) के बीच एक सेतु थे। स्वामी रामानन्द ने कुल सात ग्रंथों की रचना की, दो संस्कृत में और पांच हिंदी में।

उनके द्वारा रचित पुस्तकों की सूची इस प्रकार है:
(1) वैष्णवमताब्जभास्कर: (संस्कृत), (2) श्रीरामार्चनपद्धति:(संस्कृत), (3) रामरक्षास्तोत्र(हिंदी), (4) सिद्धान्तपटल(हिंदी), (5) ज्ञानलीला(हिंदी), (6) ज्ञानतिलक(हिन्दी), (7) योगचिन्तामणि(हिंदी)।

ऐसा माना जाता है कि लगभग एक सौ ग्यारह वर्ष की दीर्घायु में स्वामी रामानन्द ने भगवत्सायुज्यवरणकिया। जीवन के अंतिम दिनों में वे काशी से अयोध्या चले गए। वहां वे एक गुफामें प्रवास करने लगे। एक दिन प्रात:काल गुफासे शंख ध्वनि सुनाई पडी। भक्तों ने गुफामें प्रवेश किया। वहां न स्वामी जी का देहशेषऔर न शंख। वहां मात्र पूजासामग्रीऔर उनकी चरणपादुका। भक्तगण गुफासे चरणपादुका काशी ले आए और यहां उसे पंचगंगाघाटपर स्थापित कर दिया। जिस स्थान पर चरणपादुका की स्थापना हुई, उसे श्रीमठकहा जाता है। श्रीमठपर एक नए भवन का निर्माण सन् 1983ई. में किया गया। स्वामी रामानन्द की गुरु शिष्य परम्परा से ही तुलसीदास, स्वामी अग्रदास, नाभादास जैसे रामभक्त कवियो का उदय हुआ।

*जय जय*
–प्रस्तुति अखिलेश्वर नाथ गुप्त
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[11/09, 4:57 PM] savitanandmishra: *श्री चैतन्य महाप्रभु चरित (402)*
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लेखक :
_(ब्रह्मलीन स्वामी प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी )_

_🌱🌸 *उन्‍मादावस्‍था की अदभुत आकृति*🌸🌱_
_क्रमशः से आगे…………._

*ठकुरानी राधारानी भी गोपियों को साथ लेकर संकेत के शब्‍द को सुनकर उसी ओर चल पडीं। अहा ! उस कुंज-कानन में वह कदम्‍ब विटप के निकट ललित त्रिभंगीगति से खडा बांसुरी में सुर भर रहा था। वह भाग्‍यवती मुरली उसकी अधरामृत पान से उन्‍मत्त सी होकर शब्‍द कर रही थी। उस शब्‍द में कितनी करुणा थी, कैसी मधुरिमा थी, कितना आकर्षण था, कितनी मादकता, मोहकता, प्रवीणता, पटुता, प्रगल्‍भता और परवशता थी। उसी शब्‍द में बावली बनी मैं उसी ओर निहारने लगी। वह छिछोरा मेरी ओर देखकर हँस रहा था।’*

*फिर चौंककर कहने लगे– ‘स्‍वरूप ! मैं कहाँ हूँ ? मैं कौन हूँ ? मुझे यहाँ क्‍यो ले आये ? अभी-अभी तो मैं वृन्‍दावन में था। यहाँ कहाँ?’ प्रभु की ऐसी दशा देखकर स्‍वरूप गोस्‍वामी श्रीमद्भागवत के उसी प्रसंग के श्‍लोकों को बोलने लगे। उनके श्रवणमात्र से ही प्रभु की उन्‍मादावस्‍था फिर ज्‍यों की त्‍यों हो गयी। वे बार-बार स्‍वरूप गोस्‍वामी से कहते– ‘हां सुनाओ, ठीक है वाह-वाह, सचमुच हाँ यही तो है, इसी का नाम तो अनुराग है’। ऐसा कहते-कहते वे स्‍वयं ही श्‍लोक की व्‍याख्‍या करने लगते। फिर स्‍वयं भी बड़े करुणस्‍वर में श्‍लोक बोलने लगते–*

प्रेमच्‍छेदरुजोऽवगच्‍छति हरिर्नायं न च प्रेम वा
स्‍थानास्‍थानमवैति नापि मदनो जानाति नो दुर्बला:।
अन्‍यो वेद न चान्‍यदु:खमखिलं नो जीवनं वाश्रवं
द्वित्रीण्‍येव दिनानि यौवनमिदं हा हा विधे: का गति:।।[1]

_ये श्री कृष्‍ण न तो हमारे प्रेम को ही जानते हैं और न उसके विच्‍छेदन से होने वाली पीड़ा का ही अनुभव करते हैं। इधर, यह कामदेव स्‍थानास्‍थान का विचार नहीं करता, इसे हमारी दुर्बलता का ज्ञान नही है (हम पर प्रहार करता ही जा रहा है)। किसी से कहें भी तो क्‍या कहें, कोई परायी पीर का अनुभव भी तो नहीं करता। हमारे जीवन और कष्‍ट की ओर भी तो ध्‍यान नहीं देता। यह यौवन भी अधिक टिकाऊ नहीं है, दो-तीन दिन में इसका भी अन्‍त है। हाय ! विधाता की कैसी वाम गति है !_

*इस श्‍लोक की फिर आप ही व्‍याख्‍या करते-करते कहने लगे– ‘हाय ! दु:ख भी कितना असह्य है, यह प्रेम भी कैसा निर्दयी है। मदन हमारे ऊपर दया नहीं करता। कितनी बेकली है, कैसी विवशता है, कोई मन की बात को क्‍या जाने। अपने दु:ख का आप ही अनुभव हो सकता है। अपने पास तो कोई प्‍यारे को रिझाने की वस्‍तु नहीं ! मान लें वह हमारे नवयौवन के सौन्‍दर्य से मुग्‍ध होकर हमें प्‍यार करने लगेगा, सो यह यौवन भी तो स्‍थायी नहीं। जल के बुद्बुदों के समान यह भी तो क्षणभंगुर है। दो-चार दिनों में फिर अँधेरा-ही-अँधेरा है। हा ! विधाता की गति कैसी वाम है ! यह इतना अपार दु:ख हम अबलाओं के ही भाग्‍य में क्‍यों लिख दिया ? हम एक तो वैसे ही अबला कही जाती हैं, रहे-सहे बल को यह विरहकूकर खा गया। अब दुर्बलातिदुर्बल होकर हम किस प्रकार इस असह्य दु:ख को सहन कर सकें।’*

*इस प्रकार प्रभु अनेक श्‍लोकों की व्‍याख्‍या करने लगे। विरह के वेग के कारण आप से आप ही उनके मुख से विरहसम्‍बन्‍धी ही श्‍लोक निकल रहे थे और स्‍वयं उनकी व्‍याख्‍या भी करते जाते थे। इस प्रकार व्‍याख्‍या करते-करते जोरों से रुदन करते-करते फिर उसी प्रकार श्रीकृष्‍ण के विरह में उन्‍मत्त से होकर करुणकण्‍ठ से प्रार्थना करने लगे –*

हा हा कृष्‍ण प्राणधन, हा हा पद्मलोचन !
हा हा दिव्‍यु सद्गुण-सागर !
हा श्‍यामसुन्‍दर, हा हा पीताम्‍बर-धर !
हा हा रासविलास-नागर !
काहां गेलेतोमा पाई, तुमि कह, ताहां याई !
एत कहि चलिला धाय्या !

*हे कृष्‍ण ! हा प्राणनाथ ! हा पद्मलोचन ! ओ दिव्‍य सद्गुणों के सागर ! ओ श्‍यामसुन्‍दर ! प्‍यारे, पीताम्‍बरधर ! ओ रासविलासनागर ! कहाँ जाने से तुम्‍हें पा सकूँगा ? तुम कहो वहीं जा सकता हूँ। इतना कहते-कहते प्रभु फिर उठकर बाहर की ओर दौड़ने लगे। तब स्‍वरूप गोस्‍वामी ने उन्‍हें पकड़कर बिठाया। फिर आप अचेतन हो गये। होश में आने पर स्‍वरूप गोस्‍वामी से कुछ गाने को कहा। स्‍वरूपगोस्‍वामी अपनी उसी सुरीली तान से गीत गोविन्‍द के सुन्‍दर-सुन्‍दर पद गाने लगे।*

_क्रमशः ………………_

–प्रस्तुति
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ब्रज कूं ‘चैतन्य’ करिबे फिर आवेंगे ‘महाप्रभु’
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[11/09, 8:16 PM] savitanandmishra: **हृदय रोगियों यानी दिल को ताकत देने वाली 5 हरी सब्जियां जाने आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे वैद्य जी से इन्हें* प्रतिदिन प्रयोग करके हार्ट की सभी बीमारियों से बचा जा सकता है। ये हैं-
*प्याज* – इसका प्रयोग सलाद के रूप में कर सकते हैं। इसके प्रयोग से रक्त का प्रवाह ठीक रहता है। कमजोर हृदय होने पर जिनको घबराहट होती है या हृदय की धड़कन बढ़ जाती है उनके लिए प्याज बहुत ही लाभदायक है।
*टमाटर* – इसमें विटामिन सी, बीटाकेरोटीन, लाइकोपीन, विटामिन ए व पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम हो जाता है।
*लौकी* – इसे घिया भी कहते हैं। इसके प्रयोग से कोलोस्ट्रॉल का स्तर सामान्य अवस्था में आना शुरू हो जाता है। ताजी लौकी का रस निकालकर पोदीना पत्ती-4 व तुलसी के 2 पत्ते डालकर दिन में दो बार पीना चाहिए।
*लहसुन* – भोजन में इसका प्रयोग करें। खाली पेट सुबह के समय दो कलियां पानी के साथ भी निगलने से फायदा मिलता है।
*गाजर* – बढ़ी हुई धड़कन को कम करने के लिए गाजर बहुत ही लाभदायक है। गाजर का रस पिएं, सब्जी खाएं व सलाद के रूप में प्रयोग करें।
*सदा खुश रहें मस्त रहें अपना ख्याल स्वयं रखें
*आचार्य डॉक्टर आरपी पांडे अनंत शिखर अयोध्या**
[11/09, 8:20 PM] savitanandmishra: *🕉️🟢 ॐ गं 🟢🕉️*
*🌞 पञ्चाङ्ग 12 सितंबर ,2021 🌞*
⛅ *दिन _ रविवार*
⛅ *विक्रम संवत _ 2078 राक्षस*
⛅ *शाक संवत _ 1943 प्लव*
⛅ *सूर्यायन _ दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु _ शरद*
⛅ *मास _ भाद्रपद*
🌕 *पक्ष _ शुक्ल*
⛅ *तिथि _ षष्ठी शाम 05:21 तक तत्पश्चात सप्तमी*
🌟 *नक्षत्र _ विशाखा 09:50 तक तत्पश्चात अनुराधा*
⛅ *योग _ वैधृति 11:42 तक तत्पश्चात विष्कुंभ*
🌥️ *करण _ कौलव 06:28 तक तत्पश्चात गर*
🌜 *चन्द्र राशि _ वृश्चिक*
🌞 *सूर्य राशि _ सिंह*
🌑 *राहुकाल _शाम 04:55 से शाम 06:28:04 तक*
🌞 *सूर्योदय _ 06:11*
🌒 *सूर्यास्त _ 06:28*
💫 *दिशाशूल_ पश्चिम दिशा में*
🦜 *व्रत पर्व विवरण _ सूर्य षष्ठी व्रत ,स्कंध दर्शन, ललिता षष्टि व्रत*
🧭 *पं.तपेश अवस्थी 9549999840*

1️⃣ *रविवार🌞 के शुभा$शुभ मुहूर्त*
राहू काल शाम 04:55 – 06:28
यमगण्ड 12:19 – 13:51
गुलिक काल 15:23 – 16:55
*अभिजित 12:00-12:50*
दूर मुहूर्त 21:58 – 22:00

🌞2️⃣ *दिन का चौघड़िया*
उद्वेग 06:11 -07:43 अशुभ
*चर 07:43 – 09:15 शुभ*
*लाभ 09:15 – 10:47 शुभ*
*अमृत 10:47 – 12:19शुभ*
काल 12:19 -13:50 अशुभ
*शुभ 13:50 – 15:23 शुभ*
रोग 15:23 – 16:55 अशुभ
उद्वेग 16:55 – 18:28 अशुभ

🌒3️⃣ *रात का चौघड़िया*
*शुभ 18:28 – 19:55 शुभ*
*अमृत 19:55 – 21:24 शुभ*
*चर 21:24 – 22:51 शुभ*
रोग 22:51 – 24:19अशुभ
काल 24:19 – 25:46 अशुभ
*लाभ 25:46 -27:14 शुभ*
उद्वेग 27:14 – 28:42 अशुभ
*शुभ 28:42 – 06:11 शुभ*

🌞4️⃣ *दिन का होरा*
सूर्य 06:11 – 07:11
शुक्र 07:11 – 08:11
बुध 08:11 – 09:11
चन्द्र 09:11 – 10:11
शनि 10:11 – 11:11
गुरु 11:11 – 12:11
मंगल 12:11 – 13:11
सूर्य 13:11 – 14:11
शुक्र 14:11 – 15:11
बुध 15:11 – 16:11
चन्द्र 16:11 – 17:11
शनि 17:11 – 18:11

🌒5️⃣ *रात का होरा*
गुरु 18:11 – 19:11
मंगल 19:11 – 20:11
सूर्य 20:11 – 21:11
शुक्र 21:11 – 22:11
बुध 22:11 – 23:11
चन्द्र 23:11 – 24:11
शनि 24:11 -25:11
गुरु 25:11 – 02:11
मंगल 02:11 – 03:11
सूर्य 03:11 – 04:11
शुक्र 04:11 – 05:11
बुध 05:11 – 06:11

🕉️ *माँ पीताम्बरा ज्योतिष केंद्र*🕉️
*ज्योतिष_CUSTOMIZED/ VEDIK #वास्तु(नक़्शे)-PDF KUNDLI, वैदिक कर्मकांड*
🔻 *पं.तपेश अवस्थी*🔻
*📱9549999840*
[11/09, 8:20 PM] savitanandmishra: ………… ✦••• *_जय श्री हरि_* •••✦ ……….
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*_□□□□ || 卐 ॐ 卐 || □□□□_*
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🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*_रविवार 12 सितम्बर 2021_*

*_भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।_*

*_।। आज का दिन मंगलमय हो ।।_*

🌠 *_रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।_*
*_इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।_*
*_रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।_*
*_रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।_*
🔮 *_विक्रम संवत् 2078 आनन्द, विक्रम सम्वत संवत्सर तदुपरि खिस्ताब्द आंग्ल वर्ष 2021_*
🔯 *_शक संवत – 1943,_*
☸️ *_कलि संवत 5122_*
☣️ *_अयन – दक्षिणायन_*
🌦️ *_ऋतु – सौर शरद ऋतु_*
🌤️ *_मास – भाद्रपद माह_*
🌗 *_पक्ष – शुक्ल पक्ष,_*
📆 *_तिथि – षष्ठी – 17:20 तक तत्पश्चात् सप्तमी_*
✏️ *_तिथी स्वामी – षष्ठी (छठ) के देवता भगवान भोलेनाथ के पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय जी है।_*
💫 *_नक्षत्र- – विशाखा – 09:50 तक_*
🪙 *_नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- विशाखा नक्षत्र के देवता इन्द्र और अग्नि जी है ।_*
📢 *_योग – वैधृति – 11:44 तक_*
⚡ *_प्रथम करण : -कौलव – 06:28 तक_*
✨ *_द्वितीय करण : – तैतिल – 17:20 तक_*
🔥 *_गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक के समय में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।_*
🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 05:45_*
🌅 *_सूर्यास्त – सायं 18:53_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त पूर्वान्ह 11:52 एएम से 12:42 पीएम तक_*
🔯 *_विजय मुहूर्त दोपहर 02.21 पीएम से 03.11 पीएम तक_*
🗣️ *_निशिथ काल रात 11.53 पीएम से 12.40 एएम तक (13 सितंबर)_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त शाम 06.22 पीएम से 06.42 पीएम तक_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04.32 एएम से 05.18 एएम तक (13 सितंबर)_*
💧 *_अमृत काल रात 10:37 पीएम से 12:07 एएम तक (13 सितंबर)_*
❄️ *_रवि योग सुबह 06:04 एएम से 09:50 एएम तक_*
⭐ *_वैधृति योग : आज दोपहर पहले 11 बजकर 44 मिनट तक_*
🕉️ *_विशाखा नक्षत्र : आज सुबह 9 बजकर 50 मिनट तक_*
🚓 *_यात्रा शकुन- इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-सूर्य मुद्रा का केसरयुक्त जल से अभिषेक करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व व त्यौहार – सूर्य षष्ठी व्रत , लोलार्क षष्ठी ( पुत्रार्थियों को आज से 16 दिन तक काशी के लोलार्क कुण्ड में स्नान एवं पूजन- अर्चन करना चाहिए ), सोमनाथ व्रत ( उड़ीसा ) , मोरबाई छठ , स्कन्द षष्ठी (दुबड़ी सातें ) , ललिता षष्ठी व्रत, भगवान सुपार्श्वनाथ जी गर्भ कल्याणक, श्री शांता कुमार जन्म दिवस, श्री हितेंद्र कन्हैयालाल देसाई पुण्य दिवस, विनायक लक्ष्मण भावे स्मृति दिवस।_*
✍🏼 *_विशेष – मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।_*

🌷 *_Vastu tips_* 🌸

*_वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए एरोवाना मछली के बारे में। क्या एरोवाना मछली को घर में रखने से फायदा होता है? जी हां, सुनहरी मछली के साथ-साथ एरोवाना मछली को भी वास्तु शास्त्र में बहुत अच्छा और शुभ माना जाता है।_*
*_ये मछली अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, धन और शक्ति का प्रतीक है। यह बुरी शक्तियों को दूर करती है। अगर आप अपने घर में जिंदा मछली नहीं पाल सकते या नहीं पालना चाहते तो इसका भी एक तरीका है। आप मुंह में सिक्का लिए हुए सुनहरी एरोवाना मछली की मूर्ति घर में रख सकते हैं।_*
*_इस मूर्ति को आप अपने घर की उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में ही रख सकते हैं। कुछ प्राणी शास्त्रियों के अनुसार एरोवाना मछली तलहटी में बैठ कर भूकम्प के आने की पूर्व सूचना भी देती है।_*

♻️ *_जीवनोपयोगी कुंजियां_* ⚜️

*_ट्रिगर्स की निगरानी करें_*
*_लंबे समय तक घर से काम करने के साथ-साथ लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने, नींद के समय में गड़बड़ी और अनियमित खाने की आदतें तनाव के स्तर को बढ़ा सकती हैं। माइग्रेनरों के लिए, इस तरह के बदलाव माइग्रेन ट्रिगर बन सकते हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी बढ़ सकती है। व्यक्तिगत ट्रिगर्स की पहचान करने से व्यक्तियों को अपने माइग्रेन को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।_*
*_आहार और जीवन शैली के लिए सही चुनाव करें_*
*_घर से काम करना कठिन हो सकता है, लेकिन एक दैनिक दिनचर्या जो आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अनुकूल बनाती है, आपके माइग्रेन को दूर रखने में मदद कर सकती है। उचित समय पर स्वस्थ भोजन करना या दिन भर में छोटे, बार-बार भोजन करना कम बार-बार होने वाले माइग्रेन के सिरदर्द से जुड़ा होता है। नियमित अंतराल पर काम से ब्रेक लेने से आपको सही खाने में मदद मिल सकती है और स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग के कारण आंखों का तनाव कम हो सकता है। धूम्रपान बंद करने और शराब की खपत को कम करने, और नींद की आदतों को बनाए रखने और नियमित रूप से व्यायाम करने सहित अपनी जीवन शैली में संशोधन करना माइग्रेन को प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इनसे माइग्रेन की रोकथाम और इलाज में भी फायदा होता है।_*

💉 *_आरोग्य संजीवनी_* 🩸

🫀 *_लो बीपी को तुरंत सामान्य करने के आसान उपाय :_*
*_नमक का पानी एक गिलास पानी में आधा चम्मच नमक डालकर पी लें।_*
*_कॉफी अगर आपको लो ब्ल प्रेशर की समस्या बनी रहती है तो हर दिन सुबह एक कप कॉफी जरूर पिएं।_*
*_नींबू पानी में आधा चम्मच नमक और 1 चम्मच चीनी डालकर पीने से लो ब्लड प्रेशर तुरंत ठीक हो जाता है।_*
*_किशमिश रात में 10 किशमिश भिगो दें और सुबह उठकर इसे खाली पेट खाएं।_*
*_तुलसी की पत्ती_*
*_1 चम्मच शहद और तुलसी के कुछ पत्तों को हर दिन खाना है।_*
👉🏼 *_अन्य उपाय:_*
*_खाने में नमक की मात्रा बहुत कम न रखें।_*
*_दिनभर में 7-8 ग्लास पानी जरूर पिएं। साथ ही लिक्विड ज्यादा लें। आप जूस भी पी सकते हैं।_*
*_खाने में सब्जियों और फलों को शामिल करें।_*

📖 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️

*_अक्सर ऐसा होता है कि मुश्किल वक्त में लोगों की बुद्धि ठीक से काम नहीं करती है। यही वजह है कि व्यक्ति को जान-माल की हानि का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में आचार्य चाणक्य की 5 बातें बेहद काम आएंगी। दरअसल, शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम ने विपत्ति के समय व्यक्ति को क्या करना चाहिए और किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए इस बारे में बताया है।_*
*_मुश्किल वक्त आने से पहले हो जाएं सावधान मुसीबत के समय सावधानी बरतना बेहद ही आवश्यक होता है। क्योकि संकट काल में व्यक्ति के पास सीमित अवसर होते हैं जबकि चुनौतियां बड़ी होती हैं, ऐसे में जरा सी चूक बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए सावधानी बहुत ही जरुरी है।_*
*_बनाएं ऐसी रणनीति जो कारगर हो आचार्य श्री गोपी राम अपनी नीति में यह कहते हैं कि व्यक्ति को संकट काल से उभरने के लिए ठोस रणनीति की आवश्यकता होती है। जब व्यक्ति संकट के समय उससे भरने की रणनीति बना लेता है तो वह उस नीति के मुताबिक चरणबद्ध तरीके से कार्य करता है और अंत में विजय पाता है।_*
*_परिजनों की सुरक्षा ध्यान रखें के अनुसार, संकट के समय परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाना आपका पहला कर्तव्य होना चाहिए। परिवार के लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। संकट के समय अपने परिजनों का साथ निभाना चाहिए। अगर उनके ऊपर किसी तरह की मुसीबत आन पड़ी है तो आपको उन्हें उस मुसीबत से निकालना चाहिए।_*
*_सेहत का रखें ध्यान आचार्य श्री गोपी राम की नीति के अनुसार, संकटकाल परिस्थिति में सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तो आप हर वो प्रयास करने में सक्षम होंगे जो आपको संकट से बाहर निकाल सकता है। आप मानसिक और अपने शारीरिक बल से चुनौतियों को मात देने में सफल होंगे।_*
*_धन की बचत करें अगर आपके पास धन का प्रबंध ठीक है तो आप बड़े से बड़े संकट से निकलने में सफल हो सकते हैं। दरअसल संकट के समय सच्चा मित्र धन ही होता है। जिस व्यक्ति के पास संकट के समय धन का अभाव होता है उसके लिए संकट से उभरपाना बड़ा ही कठिन हो जाता है।_*

. *_⚊⚊⚊⚊✬✥ja sh.hari✥✬⚊⚊⚊⚊_*

⚜️ *_षष्ठी (छठ) के देवता भगवान भोलेनाथ के पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय जी है।_*
*_दक्षिण भारत में इन्हे भगवान मुरुगन के रूप में पूजा जाता है। यह दक्षिण भारत के तमिल नाडु राज्य के रक्षक देव भी माने जाते हैं।_*
*_भारत के आलावा विश्व के अन्य देशों जैसे श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर आदि में भी कार्तिकेय जी को इष्ट देव के रूप में स्वीकार किया गया है।_*
*_कार्तिकेय जी को युवा और बाल्य रूप में ही पूजा जाता है। भगवान कार्तिकेय जी को सदेव युवा रहने का वरदान प्राप्त है ।_*
*_इस तिथि में कार्तिकेय जी की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।_*
*_भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से भक्तो को बल और साहस की प्राप्ति होती है, विवाद, मुक़दमो में सफलता मिलती है, शत्रु परास्त होते है।_*

*_Gopi Ram_*
*_(ज्योतिषाचार्य)_*
*_मो.9812224501_*
*_सम्पूर्ण ——-🖌_*
*_●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●_*
[11/09, 8:20 PM] savitanandmishra: . *_••• ═•☆”ॐ”☆•═ •••_*
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. *༺⚜❝ जय श्री हरि ❞⚜༻*
🙏🏻 *_नमस्कार_* 🙏🏻
*_ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आपके एवं आपके पूरे परिवार के लिए हर दिन शुभ एवं मंगलमय हों।_*

👉🏼 *_12 सितम्बर 2021 आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और रविवार का दिन है। आज लोलार्क षष्ठी का व्रत किया जायेगा। आज दोपहर पहले 11 बजकर 44 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। साथ ही आज सुबह 9 बजकर 50 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा उसके बाद अनुराधा नक्षत्र लग जायेगा। आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं राशि के अनुसार कैसा रहेगा आपका दिन और किन उपायों से आप अपना दिन बेहतर कर सकते हैं।_*

🐑 *_मेष राशि आज का दिन अच्छा रहने वाला है। आज आपके रुके हुए सभी काम पूरे होंगे। आज आप किसी नए बिजनेस की शुरुआत करने का विचार करेंगे जिसमें परिवार वाले सहयोग करेंगे। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को नौकरी मिलने की पूरी संभावना बनी हुई है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आज आप बच्चों के साथ पार्क में घूमने जायेंगे। स्वास्थ आज रोज की अपेक्षा बेहतर रहेगा। आज पूरे दिन आपके चेहरे पर मुस्कान बनी रहेगी।_*

🐂 *_वृष राशि आज का दिन बेहतरीन रहेगा। आज आपको बिजनेस के सिलसिले में कहीं बाहर जाना पड़ेगा। इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। लवमेट आज अपने पार्टनर को सरप्राइज देंगे। आज पूरा समय परिवार वालों के साथ बिताने का मन बनायेंगे। बिजनेस संबधी लोगों को आज अधिक मुनाफा मिलने वाला है। आज आप अपनी दिनचर्या में बदलाव करेंगे जिससे आपके कार्य भी आसानी से पूरे होते जायेंगे। आज तरक्की के नये रास्ते खुलेंगे।_*

👨‍❤️‍👨 *_मिथुन राशि आज भाग्य आपका पूरा साथ देगा। आपके सारे बिगड़े हुए काम पूरे होते जायेंगे। आज आपके लिए किसी अच्छी जगह से विवाह का प्रस्ताव आयेगा जिससे घर का माहौल खुशनुमा बनेगा। आज आपके सकारात्मक विचारों से खुश होकर बॉस आपको उपहार स्वरूप कोई उपयोगी वस्तु गिफ्ट करेंगे। आज आपका दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहेगा। आज आपके स्वास्थ्य में सुधार आयेगा। लवमेट के लिए आज रिश्तों में मिठास भरने का दिन है साथ ही चॉकलेट भी देंगे। छात्रों के लिए आज का दिन खुशियों से भरा रहने वाला है।_*

🦀 *_कर्क राशि आज का दिन ठीक-ठाक रहने वाला है। आज आपको व्यापार में थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा लेकिन धैर्य रखें सब ठीक हो जायेगा। आपके बच्चे आपके व्यापार में पूरा सपोर्ट करेंगे। ऑफिस में किसी काम को लेकर जल्दबाजी करने से आपको बचना चाहिए। आज पारिवारिक रिश्तों के बीच सामंजस्य बनाने में आप सफल रहेंगे। इस राशि के स्टूडेंट्स के लिए भी आज का दिन अच्छा है पढ़ाई में मन लगेगा। कुल मिलकर आज आपका दिन ठीक-ठाक रहने वाला है।_*

🦁 *_सिंह राशि आज का दिन खुशहाल रहने वाला है। आर्किटेक्ट के क्षेत्र से जुड़े लोगों को आज कुछ अच्छे अवसर मिलेंगे। किसी अच्छी कंपनी से आपको जॉब का ऑफर आयेगा। आज कोई अच्छी खबर मिलने का योग बना हुआ है। शाम को बच्चों के साथ अच्छा टाइम बीतेगा। किसी नई जमीन से संबंधित कोई लेन-देन करने जा रहे हैं तो पहले उसकी अच्छे से जांच-पड़ताल जरूर कर लें। जीवनसाथी के साथ रिश्तों में और मिठास आएगी। पारिवारिक संपत्ति बढ़ने से घर में खुशियाँ आएँगी।_*

👰🏻‍♀ *_कन्या राशि आज का दिन बेहतरीन रहने वाला है। संगीत और कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन अच्छा रहेगा। आज किसी फिल्म इंडस्ट्री से आपको ऑफर आयेगा। नन्हें मेहमान के आने से घर में उत्सव का माहौल बनेगा। आज आपके बिजनेस में दो गुना वृद्धि होने के योग बना हुआ है। लवमेट के घर आज उनके रिश्तों की बात चलेगी। परिवार के साथ किसी दूसरे शहर की यात्रा करनी पड़ सकती है। आज आपकी बहन को कोई बड़ी सफलता मिलेगी।_*

⚖️ *_तुला राशि आपके मन में नए–नए विचार आयेंगे। जिससे आप अपने कार्यों को अलग तरीके से पूरे करेंगे। इस राशि में डिजाइनर के डिजाईन की आज तारीफ होगी। राजनैतिक के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन अच्छा रहने वाला है। आपके सिनियर्स आपके काम को लेकर आपसे खुश होंगे। आज अपने आस-पास हो रही गतिविधियों पर आपको ध्यान रखने की जरुरत है। आज किसी पुराने दोस्त से मुलाकात होगी। जिसके साथ आप कहीं घुमने का प्लान बनायेंगे। आज आप जरूरतमंद लोगों की सहायता करेंगे।_*

🦂 *_वृश्चिक राशि आज का दिन अनुकूल रहने वाला है। आज आपकी नये कार्यों में रुचि बढ़ेगी जिससे आपको नया सिखने को मिलेगा। आज आप फीजूल के खर्च को कम करने का प्रयास करेंगे तो आपने भविष्य के लिए पैसे इकट्ठे करने में आसानी होगी। ऑफिस में आज एक्सट्रा वर्क करने से रुका हुआ काम पूरा हो जाएगा। जिससे खुश होकर बॉस आपकी पीठ थपथपा सकते हैं। वकीलों के लिए आज का दिन फायदेमंद रहने वाला है। विद्यार्थियों के लिए आज का दिन बेहतरीन रहने वाला है।_*

🏹 *_धनु राशि आज का दिन अच्छा रहने वाला है। अगर आज किसी जरूरी काम को पूरा करने की सोच रहे हैं तो वह आज पूरा करने में सफल होंगे। आज आपको योजना बनाकर चलने की जरूरत है। आज किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करते समय सही भाषा का प्रयोग करें। इस राशि के विवाहितों के लिए आज का दिन अच्छा है। लवमेट के लिए आज का दिन बढ़िया रहने वाला है। व्यापार कर रहे लोगों को आज किसी मल्टीनेशनल कंपनी से जुड़ने का मौका मिलेगा।_*

🐊 *_मकर राशि आज का दिन आपके लिए अच्छे परिणाम लेकर आएगा। यह परिणाम व्यवसाय से जुड़ा हो सकता है। आज किसी नए व्यापार में पैसा लगाने से भविष्य में आपको दो-गुना धन लाभ होगा। आज कोर्ट-कचहरी के मामले से दूर रहे तो आपके लिए अच्छा होगा। इस राशि के कर्मचारियों के लिए आज दिन अच्छा है। ऑफिस के किसी काम में आ रही अड़चने आज समाप्त हो जाएंगी। नवविवाहित आज अपने जीवनसाथी को कुछ उपहार देंगे। शाम को परिवार के साथ मीठा खाएंगे।_*

⚱️ *_कुम्भ राशि आज धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। साथ ही आप भगवान के दर्शन करेंगे। आज सभी काम आपके मन मुताबिक पूरे होते जायेंगे। स्टूडेंट को आज अपनी पढ़ाई के टाइम-टेबल में बदलाव करने की जरुरत है। परिवार में पिछले जिस गलतियों की वजह से आपके रिश्ते ठीक नहीं चल रहे थे वो आज जीवनसाथी की मदद से ठीक हो जाएगें। इस राशि के राजनीति से जुड़े लोगों को किसी समारोह में शामिल होने का मौका मिलेगा। आज आपकी आर्थिक स्थिति और बेहतर बनेगी।_*

🐬 *_मीन राशि आज का दिन उत्तम रहने वाला है। आज आपका ट्रांसफर आपके मन पसंद एरिये में होगा। पारिवारिक कामों को करने में घर के सभी सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा। आज आप परिवार वालों के साथ कहीं घूमने का प्लान बनायेंगे। आज कोई मित्र आपसे मिलने आपके घर आयेगा। मित्र से निजी समस्याओं को शेयर करने से मन का बोझ हल्का होगा। इस राशि के छात्रों के लिए आज का दिन अच्‍छा है उनकी पढाई में आ रही बाधाएं दूर हो जाएगी। आज दाम्पत्य जीवन बढ़िया रहने वाला है।_*

*_(Don’t copy my page)_*

✍🏼 *_*नोट_* : *_हमारे द्वारा भेजी गई राशिफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी पंडित जी या ज्योतिषी से मिल सकते हैं।_*

🤷🏻‍♀ *_आज जिन भाई-बहनों का जन्मदिन या शादी की सालगिरह है उन सभी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ_*

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*_सम्पर्क सूत्र :-_*
*_9812224501_*
[11/09, 10:32 PM] savitanandmishra: 🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉
🌄सुप्रभातम🌄
🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
🌻रविवार, १२ सितंबर २०२१🌻

सूर्योदय: 🌄 ०६:०७
सूर्यास्त: 🌅 ०६:२६
चन्द्रोदय: 🌝 ११:२३
चन्द्रास्त: 🌜२२:०९
अयन 🌕 दक्षिणायने (उत्तरगोलीय)
ऋतु: ❄️ शरद
शक सम्वत: 👉 १९४३ (प्लव)
विक्रम सम्वत: 👉 २०७८ (राक्षस)
मास 👉 भाद्रपद
पक्ष 👉 शुक्ल
तिथि 👉 षष्ठी (१७:२० तक)
नक्षत्र 👉 विशाखा (०९:५० तक)
योग 👉 वैधृति (११:४४ तक)
प्रथम करण 👉 कौलव (०६:२८ तक)
द्वितीय करण 👉 तैतिल (१७:२० तक)
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॥ गोचर ग्रहा: ॥
🌖🌗🌖🌗
सूर्य 🌟 सिंह
चंद्र 🌟 वृश्चिक
मंगल 🌟 कन्या (अस्त, पश्चिम, मार्गी)
बुध 🌟 कन्या (अस्त, पूर्व, मार्गी)
गुरु 🌟 कुम्भ (उदय, पूर्व, वक्री)
शुक्र 🌟 तुला (उदय, पश्चिम, मार्गी)
शनि 🌟 मकर (उदय, पूर्व, वक्री)
राहु 🌟 वृष
केतु 🌟 वृश्चिक
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शुभाशुभ मुहूर्त विचार
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अभिजित मुहूर्त 👉 ११:४८ से १२:३८
अमृत काल 👉 २२:३७ से २४:०७
रवियोग 👉 ०६:०० से ०९:५०
विजय मुहूर्त 👉 १४:१७ से १५:०७
गोधूलि मुहूर्त 👉 १८:१४ से १८:३८
निशिता मुहूर्त 👉 २३:५० से २४:३६
राहुकाल 👉 १६:५३ से १८:२६
राहुवास 👉 उत्तर
यमगण्ड 👉 १२:१३ से १३:४६
होमाहुति 👉 बुध (०९:५० तक)
दिशाशूल 👉 पश्चिम
अग्निवास 👉 पृथ्वी (१७:२० तक)
चन्द्रवास 👉 उत्तर
शिववास 👉 नन्दी पर (१७:२० से भोजन में)
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – उद्वेग २ – चर
३ – लाभ ४ – अमृत
५ – काल ६ – शुभ
७ – रोग ८ – उद्वेग
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – शुभ २ – अमृत
३ – चर ४ – रोग
५ – काल ६ – लाभ
७ – उद्वेग ८ – शुभ
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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शुभ यात्रा दिशा
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उत्तर-पश्चिम (पान का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
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श्रीबलदेव छठ, सूर्यषष्ठी, श्रीमहालक्ष्मी व्रत आरम्भ आदि।
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आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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आज ०९:५० तक जन्मे शिशुओ का नाम
विशाखा नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (तो) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम अनुराधा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं तृतीय चरण अनुसार क्रमश (ना, नी, नू, ने) नामाक्षर से रखना शास्त्रसम्मत है।
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उदय-लग्न मुहूर्त
सिंह – २८:०५ से ०६:२४
कन्या – ०६:२४ से ०८:४२
तुला – ०८:४२ से ११:०३
वृश्चिक – ११:०३ से १३:२२
धनु – १३:२२ से १५:२६
मकर – १५:२६ से १७:०७
कुम्भ – १७:०७ से १८:३३
मीन – १८:३३ से १९:५६
मेष – १९:५६ से २१:३०
वृषभ – २१:३० से २३:२५
मिथुन – २३:२५ से २५:४०
कर्क – २५:४० से २८:०१
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पञ्चक रहित मुहूर्त
मृत्यु पञ्चक – ०६:०० से ०६:२४
अग्नि पञ्चक – ०६:२४ से ०८:४२
शुभ मुहूर्त – ०८:४२ से ०९:५०
रज पञ्चक – ०९:५० से ११:०३
शुभ मुहूर्त – ११:०३ से १३:२२
चोर पञ्चक – १३:२२ से १५:२६
शुभ मुहूर्त – १५:२६ से १७:०७
रोग पञ्चक – १७:०७ से १७:२०
शुभ मुहूर्त – १७:२० से १८:३३
मृत्यु पञ्चक – १८:३३ से १९:५६
रोग पञ्चक – १९:५६ से २१:३०
शुभ मुहूर्त – २१:३० से २३:२५
मृत्यु पञ्चक – २३:२५ से २५:४०
अग्नि पञ्चक – २५:४० से २८:०१
शुभ मुहूर्त – २८:०१ से ३०:००
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आज का राशिफल
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मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन आप का मन भ्रमित रहेगा मुख से कुछ बोलेंगे करेंगे उसका उल्टा ही। जिससे आप के संपर्क में रहने वालों को काफी परेशानी होगी। वादाखिलाफी करने पर आपकी छवि भी खराब होगी। दांपत्य जीवन में विशेषकर आज छोटी-छोटी बातों को लेकर नोकझोंक होगी शांत रहने का प्रयास करें अन्यथा बात बिगड़ते देर नहीं लगेगी। कार्यक्षेत्र पर भी आज मे सोचा काम ना बनने से क्रोध आएगा वाणी एवं स्वभाव में नरमी रखें अन्यथा सड़क चलते लोग भी आपको ताने मार जाएंगे। काम धंधे से असमय धन की आमद होगी लापरवाही से बचें अन्यथा इस से भी वंचित रह सकते हैं। परिजनों को व्यवसाय की गुप्त बातें बताना हानि करा सकता है। आज किसी पुराने कर्ज को लेकर भी तू तू मैं मैं होने की संभावना है। धैर्य के साथ आज का दिन व्यतीत करें आने वाला कल कुछ नई संभावनाएं लेकर आएगा तब तक जोड़-तोड़ की नीति से भी बचें सेहत भी नरम-गरम रहेगी मानसिक तनाव अधिक परेशान करेगा।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आपके लिए शुभ फलदायी है। आज आप लोगों को नैतिकता का पाठ पढ़ाएंगे लेकिन स्वयं उसके ऊपर अमल नहीं करेंगे। आप अपनी सोची हुई योजना को पूर्ण करने के लिए जोखिम लेने से भी नहीं घबराएंगे। व्यवसायी वर्ग को मध्यान्ह तक थोड़ी उठा पटक के बाद धन की आमद शुरू होगी जो कि रात्रि तक रुक-रुक कर चलती रहेगी। नौकरीपेशा जातक जल्दबाजी में काम करेंगे जिससे कुछ ना कुछ गलती होने की संभावना है। भाई बंधुओं की उन्नति देख मन में ईर्ष्या का भाव बनेगा। दांपत्य जीवन में कुछ समय के लिए गरमा गर्मी हो सकती है। परिजनों की जिद पूरी ना करने पर कलह का सामना करना पड़ेगा। सेहत थकान को छोड़ सामान्य रहेगी। यात्रा में चोरी अथवा चोट आदि का भय है सावधान रहें।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज का दिन आपके लिए मिश्रित फल दायक है आज किसी भी कार्य को करने से पहले उसके लाभ अथवा हानि के बारे में विचार अवश्य करें जहां उलझन अनुभव हो वहां किसी अनुभवी की सलाह अभिमान त्याग कर लेना बेहतर रहेगा अन्यथा बाद में निर्णय गलत होने पर पछताना पड़ेगा। आज कार्य क्षेत्र पर परिजन अथवा किसी निकटस्थ व्यक्ति का बेवजह दखल देना अमन को अग्रवाल लेकिन बाद में आपके लिए सहायक ही बनेगा वैसे तो आज आप प्रत्येक कार्य देखभाल कर ही करेंगे लेकिन किसी अति महत्वपूर्ण कार्य को लेकर मध्यांत तक परिश्रम का फल ना मिलने पर अधीर हो उठेंगे धैर्य से काम लें संध्या तक धन की आमद संतोषजनक हो ही जाएगी आज कोई ऐसा रोग होने की भी संभावना है जिसका पता बाद में लगेगा इसलिए पहले से ही सतर्क रहें।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आप के लिए परिश्रम साथ ही रहेगा मध्यांतर प्रत्येक कार्य में अधिक माथापच्ची करनी पड़ेगी लेकिन मध्यान्ह के बाद परिस्थितियां बेहतर बनने लगेंगी आज आप परिश्रम में कमी नहीं करेंगे जिससे मध्यान्ह के बाद सोची गई योजनाओं में सफलता मिलने लगेगी अथवा निकट भविष्य में सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ेगी कार्यक्षेत्र पर आज अफवाहों पर ध्यान ना दें अपने काम से काम रखें धन लाभ कम होगा लेकिन खर्च भी आज अल्प रहने से लाभ हानि में तालमेल बैठा लेंगे सरकारी कार्य आज थोड़े से प्रयास के बाद पूर्ण हो जाएंगे पिता से थोड़ी बहुत कहासुनी को छोड़ पारिवारिक वातावरण शांति रहेगा परिजन किसी पर्यटन क्षेत्र पर यात्रा के लिए जिद कर सकते हैं शीघ्र ही इस पर खर्च भी करना पड़ेगा गला खराब होने अथवा कटने छिलने का भय है।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज के दिन आपको अपनी वाणी एवं व्यवहार को संयमित रखने की आवश्यकता है मध्यां तक किसी के द्वारा बोली गई थी कि अथवा भड़काऊ बातों की अनदेखी करना ही बेहतर है दोपहर के बाद परिस्थितियां सुधरने लगेगी वैसे तो आज आपके अंदर बुद्धि विवेक की प्रचुर मात्रा रहेगी फिर भी बार बार किसी के टोकने अथवा अपमानित करने पर धैर्य खो सकते हैं सार्वजनिक क्षेत्र पर परिवार की प्रतिष्ठा जय श्री रहेगी आप के प्रति इन सब का व्यवहार आज विपरीत ही रहने वाला है आज लगभग जो भी आप के संपर्क में आएगा उसका लक्ष्य आपसे किसी ना किसी रूप में स्वार्थ सिद्धि पूर्ण करने में ही रहेगा आज मीठा बोलने वालों से विशेष सावधान रहें संध्या के समय अपने बुद्धि बल से विपरीत परिस्थितियों में भी आर्थिक लाभ कमाएंगे छोटे-मोटे शारीरिक दर्द को छोड़ सेहत सामान्य ही रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपके लिए धन लाभ वाला रहेगा। पूर्व में किए परोपकार एवं धार्मिक कृतियों का फल आज किसी न किसी रूप में अवश्य मिलेगा। बस आज जल्दबाजी के निर्णय से बचें अन्यथा लाभ तो होगा परंतु इतना नहीं जितनी कि आप आशा लगाए रहेंगे। कार्य क्षेत्र से कोई शुभ समाचार भी मिल सकता है। लंबे समय तक लाभ देने वाले सौदे हाथ लगेंगे धन लाभ संतोषजनक हो ही जाएगा। लेकिन परिवार में किसी न किसी कारण से मानसिक कष्ट देने वाले प्रश्न बनते रहेंगे। छोटी मोटी बातों की अनदेखी करना ही बेहतर रहेगा। घर की अपेक्षा सार्वजनिक क्षेत्र पर समय बिताना अधिक पसंद करेंगे आप की छवि भी सार्वजनिक क्षेत्र पर भद्र पुरुष जैसी बनेगी लेकिन आज सरकारी उलझन में भी फंस सकते हैं। अनैतिक कार्यों से बचकर रहें। रक्त विकार, पित्त अथवा किसी गुप्त रोग के होने की संभावना है।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज के दिन आप जिस भी कार्य को करेंगे उसे ले देकर अवश्य ही संतोषजनक स्थिति तक पहुंचा देंगे। दिन के आरंभ में परिवार के बड़े लोग किसी महत्वपूर्ण विषय में आप का विरोध कर सकते हैं। लेकिन दोपहर बाद संतानों को छोड़ परिवार में लगभग सभी सदस्य आप के लिए निर्णय से सहमत रहेंगे। संतान अथवा किसी अन्य छोटे परिजन का उद्दंड एवं जिद्दी व्यवहार कुछ समय के लिए परेशानी में डालेगा फिर भी परिवार की महिलाएं इसका हल खोज लेंगी। पिता की प्रतिष्ठा का लाभ आपको प्रत्येक क्षेत्र में मिलेगा किसी कुटुम्बीजन से आकस्मिक लाभ होने की भी संभावना है। कार्य क्षेत्र पर भी परिस्थिति अनुकूल रहेगी आवश्यकता अनुसार धन लाभ कहीं ना कहीं से हो जाएगा। किसी धार्मिक स्थल अथवा पर्यटक क्षेत्र की यात्रा के प्रसंग बनेंगे। संध्या का समय थोड़ा खर्चीला रहेगा। आज कोई लंबी अवधि तक चलने वाला रोग भी हो सकता है शारीरिक जांच अवश्य कराएं।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन मध्यांन तक आप कर्म करने की अपेक्षा ख्याली पुलाव पकाएंगे। कार्य क्षेत्र पर काम काज होने के बाद भी मन अन्यत्र घूमेगा। व्यवसाई वर्ग को लाभ के अवसर मिलेंगे लेकिन मन को अनुकूल नहीं लगने पर कुछ समय के लिए दुविधा में फंसेंगे। दोपहर से भाग्य का साथ मिलने लगेगा कुछ अच्छे लाभ के सौदे हाथ लगने से धन की आमद सुनिश्चित होगी। नौकरीपेशा जातक विशेषकर महिलाओं की कार्य क्षेत्र पर किसी से तीखी झड़प हो सकती है। इसका कारण स्वयं की ही लापरवाही रहेगा। दांपत्य जीवन में खर्च करने के बाद ही सुख मिल सकेगा परिजनों की पुरानी मांगों को पूर्ण करने के लिए संचित धन खर्च करना पड़ेगा। महिलाएं साज सज्जा एवं घर में किसी परिवर्तन को लेकर मानसिक रुप से परेशान रहेगी। संध्या का समय दिनभर की अपेक्षा शांति वाला रहेगा किसी पर्यटक क्षेत्र पर यात्रा की योजना बनेगी। परिवार के बुजुर्ग लंबी बीमारी के कारण परेशान होंगे।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज परिस्थितियां कार्यों में बाधक बनेगी दिन के आरंभ से ही मन अनर्गल प्रवृतियों में भटकेगा बिना सोचे समझे किए गए कार्य बाद में पश्चाताप का कारण बनेंगे आज परिजनों की अनदेखी अथवा अनसुनी करना खाने कराएगा कार्य क्षेत्र पर चलते हुए कार्य अचानक रुकेंगे कोई पुराना सौदा भी बीच में टूटने की संभावना है नए कार्य में धन आज भूल कर भी ना लगाएं चल अचल संपत्ति को लेकर किसी परिजन से कल है अथवा शत्रुता बनेगी यहां जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचें सरकारी कार्य आज अधिक उलझने की संभावना है अधिकारी वर्ग आपकी छोटी गलतियों पकड़ने की फिराक में रहेंगे सरकार विरोधी गतिविधियों में सम्मिलित होने पर अदालती चक्करों में पड़ सकते हैं पेट खराब होने पर अन्य व्याधियां पनप सकते हैं खानपान देखभाल करेगी करें।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए सामान्य लेकिन आप के संपर्क में रहने वालों के लिए अति उत्तम रहेगा आज आप अपनी निजी आवश्यकताओं को अनदेखा कर परिजन एवं अन्य निकटस्थ लोगों की कामना पूर्ति करने के लिए समय एवं धन खर्च करेंगे। कार्यक्षेत्र पर मध्यांन तक सुस्ती का वातावरण रहेगा परंतु संध्या के समय अचानक तेजी आने से धन की आमद होगी जिससे दैनिक खर्च के अतिरिक्त होने वाले खर्च नही अखरेंगे। आज कार्य क्षेत्र पर आर्थिक विषयों को लेकर किसी से कहासुनी भी हो सकती है बात को बढ़ाने से बचें अन्यथा किसी ना किसी रूप में आर्थिक एवं सम्मान की क्षति होगी घर परिवार का वातावरण सामान्य रहेगा परिजन आपका कहना मानेंगे जिससे आपसी सद्भाव बना रहेगा सेहत का थोड़ा ध्यान रखना आवश्यक है भोजन मैं स्वयं ना रहने पर पेट संबंधित समस्याएं बनेगी

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज के दिन परिस्थितियां आपके अनुकूल बन रही हैं फिर भी दिन के पूर्वार्ध में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य जल्दबाजी में ना करें अन्यथा हानि होने की संभावना है मध्यान्ह आते-आते स्तुति आपके पकड़ में आने लगेगी कल तक जिस कार्य से हानि हो रही थी उसका रेसिपी कुछ ना कुछ लाभ अवश्य होगा किसी परिजन से कहासुनी होने की संभावना है लेकिन आज घर के सदस्यों की बातों पर ज्यादा ध्यान ना देकर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे हैं धन लाभ किसी न किसी रूप में अवश्य होगा अनैतिक मार्ग से लाभ की संभावना अधिक शेयर सट्टे के व्यवसाइयों को आज कई दिनों बाद सफलता का स्वाद चखने को मिलेगा। संध्या का समय मनोरंजन में बीतेगा अत्यधिक ठंड है एवं नशीले पदार्थों के सेवन से परहेज करें वरना सेहत तो खराब होगी सम्मान में भी कमी आएगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज के दिन आप पूर्व में की गई गलतियों में सुधार लाएंगे प्रत्येक कार्य सोच समझकर ही करेंगे फिर भी आप के संपर्क में आने वाले लोगों में आप की छवि जिद्दी इंसान जैसी बनेगी। अपनी जिद्द में किसी के ऊपर अनैतिक दबाव बनाना बैठे-बिठाए कलह को न्योता देगा। कार्यक्षेत्र पर कई दिनों से चल रही मंदी टूटेगी। लाभ के अवसर मिलते रहेंगे लेकिन आज कमाया धन किसी न किसी कारण से व्यर्थ होने की संभावना है। स्वतंत्र कार्य की तुलना में परिजनों के मार्गदर्शन में किया गया कार्य अधिक लाभदायक एवं शीघ्र फलित हो सकता है। पैतृक व्यवसाय से भी आशा से अधिक लाभ कमा सकेंगे। स्त्री संतान आपके खिलाफ खड़े होंगे घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति समय रहते करें। लंबी यात्रा की योजना बना रहे हैं तो फिलहाल स्थगित करें किसी न किसी रूप में हानि होने की संभावना है। बड़े बुजुर्गों को सम्मान की दृष्टि से देखें लाभ होगा।
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[11/09, 10:36 PM] savitanandmishra: आज क्षमा मांगने का दिन है मैं जैन तो नहीं हूँ लेकिन क्षमा मांगने के लिए जैन होना जरुरी नहीं है।

* मेरे अहंकार से….यदि मैने किसी को नीचा दिखाया हो.
* मेरे क्रोध से यदि किसी को दुःख पहुचाया हो।
* मेरे झूठ से किसी को कोई परेशानी हुई हो।
* मेरे ना से किसी की सेवा में,दान में, बाधा आयी हो।
* मेरे हर एक कण कण से जो मैने किसी को निराश किया हो।
* मेरे शब्दों से…. जो किसी के हृदय को ठेस पहुचाई हो।
* जाने अनजाने में यदि मैं आपके कष्ट का कारण बना हूँ |
* तो मैं मेरा मस्तक झुकाकर,हाथ जोड़कर, सहृदय,
* आप से क्षमा मांगता हूँ🙏

भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करे और आपका जीवन स्वास्थ्य, धन, संतोष, पारिवारिक सुख से भरा रखे।

*ऋषि पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏🙏 🙏🙏🙏
[11/09, 10:36 PM] savitanandmishra: ‘ *🌕 रोटी 🌕*

*रामेश्वर ने पत्नी के स्वर्ग वास हो जाने के बाद अपने दोस्तों के साथ सुबह शाम पार्क में टहलना और गप्पें मारना, पास के मंदिर में दर्शन करने को अपनी दिनचर्या बना लिया था।*

*हालांकि घर में उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी। सभी उनका बहुत ध्यान रखते थे, लेकिन आज सभी दोस्त चुपचाप बैठे थे।*

*एक दोस्त को वृद्धाश्रम भेजने की बात से सभी दु:खी थे” आप सब हमेशा मुझसे पूछते थे कि मैं भगवान से तीसरी रोटी क्यों माँगता हूँ? आज बतला देता हूँ। “*

*कमल ने पूछा “क्या बहू तुम्हें सिर्फ तीन रोटी ही देती है ?”*

*बड़ी उत्सुकता से एक दोस्त ने पूछा? “नहीं यार! ऐसी कोई बात नहीं है, बहू बहुत अच्छी है।*

*असल में “रोटी, चार प्रकार की होती है।”*

*पहली “सबसे स्वादिष्ट” रोटी “माँ की “ममता” और “वात्सल्य” से भरी हुई। जिससे पेट तो भर जाता है, पर मन कभी नहीं भरता।*

*एक दोस्त ने कहा, सोलह आने सच, पर शादी के बाद माँ की रोटी कम ही मिलती है।” उन्होंने आगे कहा “हाँ, वही तो बात है।*

*दूसरी रोटी पत्नी की होती है जिसमें अपनापन और “समर्पण” भाव होता है जिससे “पेट” और “मन” दोनों भर जाते हैं।”, क्या बात कही है यार ?” ऐसा तो हमने कभी सोचा ही नहीं।*

*फिर तीसरी रोटी किस की होती है?” एक दोस्त ने सवाल किया।*

*”तीसरी रोटी बहू की होती है जिसमें सिर्फ “कर्तव्य” का भाव होता है जो कुछ कुछ स्वाद भी देती है और पेट भी भर देती है और वृद्धाश्रम की परेशानियों से भी बचाती है”, थोड़ी देर के लिए वहाँ चुप्पी छा गई।*

*”लेकिन ये चौथी रोटी कौन सी होती है ?” मौन तोड़ते हुए एक दोस्त ने पूछा-*

*”चौथी रोटी नौकरानी की होती है। जिससे ना तो इन्सान का “पेट” भरता है न ही “मन” तृप्त होता है और “स्वाद” की तो कोई गारँटी ही नहीं है”, तो फिर हमें क्या करना चाहिये यार?*

*माँ की हमेशा पूजा करो, पत्नी को सबसे अच्छा दोस्त बना कर जीवन जिओ, बहू को अपनी बेटी समझो और छोटी मोटी ग़लतियाँ नज़रन्दाज़ कर दो बहू खुश रहेगी तो बेटा भी आपका ध्यान रखेगा।*

*यदि हालात चौथी रोटी तक ले ही आयें तो भगवान का शुकर करो कि उसने हमें ज़िन्दा रखा हुआ है, अब स्वाद पर ध्यान मत दो केवल जीने के लिये बहुत कम खाओ ताकि आराम से बुढ़ापा कट जाये, बड़ी खामोशी से सब दोस्त सोच रहे थे कि वाकई, हम कितने खुशकिस्मत हैं।*

जय श्री कृष्णा🙏🙏
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: ।।पांच महत्पूर्ण नियम:।।
1. घर में बनने वाले मकड़ी के जाल (Spider Trap) तुरंत हटा दें इनसे आपके अच्छे दिनों में बदल सकते हैं।

2. पूजा में चढ़े हुए और मुरझाए हुए फूल घर में नहीं रखें इनसे अशुभ फल मिलता है।

3. पुराने या टूटे हुए जूते-चप्पल आपको आगे बढऩे से रोक देते हैं। इन्हे घर से निकाल दें।

4. गाय को कभी भी भूलकर अपनी जूठन नहीं खिलानी चाहिये, गाय साक्षात् जगदम्बा है

5. यदि नियमित रूप से घर की प्रथम रोटी गाय को तथा अंतिम रोटी कुते को दें तो आपके भाग्य के द्वार खोलने से कोई नही रोक सकता !!
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: *Corona के बाद हो रही है विटामिन डी की कमी, जानिए कैसे निपटें*

विटामिन डी के फायदे-

* विटामिन डी से हड्डियां मजबूत होती हैं।
* विटामिन डी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
* यदि कोई मांसपेशियों के दर्द से परेशान है तो विटामिन डी के सेवन से इस दर्द से निजात मिलती है।
* विटामिन डी दिमाग को तेज रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
* विटामिन डी पाचन तंत्र से जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने मददगार होता है।

विटामिन डी के स्रोत-

* लॉकडाउन के समय में धूप की मदद से आप विटामिन डी की कमी दूर कर सकते हैं।
* दूध के सेवन से आप विटामिन डी प्राप्त कर सकते हैं।
* हरी सब्जियों के सेवन से विटामिन डी की कमी दूर होती है।
* अपनी डाइट में टमाटर, शलजम, मशरूम, पनीर, नींबू, अंडे के पीले वाले भाग को शामिल करने से विटामिन डी की कमी पूरी होती है।
* विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए सूर्य देव की शरण में जाएं और नियमित धूप लें।
* धूप में बैठना शरीर में खून जमने की प्रक्रिया को रोकता है और रक्तसंचार को बेहतर करता है। साथ ही डायबिटीज और हृदय संबंधी रोगों में भी धूप लेना लाभकारी होता है।

*ऐसे और भी कई आयुर्वेद में बताये गए एवं माने हुए सुप्रसिद् व रोजमर्रा जीवन में काम आने वाले कारगर नुस्ख़े पढ़ने और लाभ प्राप्त करने के लिए एप्प इंस्टॉल करे* https://bit.ly/ayurvedApp
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: 🌹मित्रों.आज मैं सिर्फ इतना ही
कहना चाहता हूँ कि
🌹
जब भी शरीर, खुद को स्वच्छ करने की कोशिश करे.
अर्थात जुकाम हो जाए
दस्त लग जाएं
उल्टी आ रही हो
बुखार चढ़ गया हो
बहुत अधिक थकान अनुभव हो
फोड़े फुन्सी हो गए हों
या और भी तीव्र रोग हो
🌹
तब हमें भोजन बन्द कर देना चाहिए
आप या तो सिर्फ पानी पीते रहें
या तीन चार चाय दिन भर में लें
या नीम्बू शहद पानी के साथ लें
उपलब्ध हो तो नारियल पानी लें
जब तक शरीर ठीक नहीं हो जाता
ऐसे ही रहें.
तीन, पांच या सात दिन में शरीर ठीक हो जाता है.
🌹
फिर दाल का पानी, सब्जी का रस और मौसम्मी के रस को तीन दिन लें
🌹
फिर धीरे धीरे सामान्य पर हल्के भोजन पर आएं.
🌹
इससे शरीर ठीक हो जाएगा.
फिर चिन्तन भी करते रहें कि मेरी कौन सी गलती से भोजन अथवा रहन सहन से यह हुआ है
उस गलती को भविष्य में नहीं करें.
🌹
यदि आपने भोजन बन्द नहीं किया और एलोपैथिक दवाई लेकर जुकाम दस्त आदि रोक दिये तो
यह किसी गंभीर और जीवन भर चलने वाली बीमारी का बीजारोपण होता है
🌹
फिर दमा, ब्रोंकाइटिस
पाइल्स, केन्सर और मधुमेह
आदि बीमारियां हम ग्रहण कर लेते हैं
🌹
इसलिए बहुत सरल है स्वस्थ रहना
कोई ज्ञान नहीं चाहिए कोई डाक्टर नहीं चाहिए सिर्फ
🌹
अपने शरीर को पहचान कर
उसके अनुसार व्यवहार चाहिए🌹
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: *गाय और भैंस की कुछ आश्चर्यजनक और दिलचस्प जानकारी….*

*दोनों में अंतर ……….*
.
1. भैंस अपने बच्चे से पीठ फेर कर बैठती है चाहे उसके बच्चे को कुत्ते खां जायें वह नहीं बचायेगी, जबकि गाय के बच्चे के पास अनजान आदमी तो क्या शेर भी आ जाये तो जान दे देगी परन्तु जीते जी बच्चे पर आंच नही आने देगी। इसीलिए उसके दूध में स्नेह का गुण भरपूर होता है।

2. भैंस के दो बेटे बड़े होकर यानि दो झोटे एक गांव में मिलकर नहीं रह सकते। आमना-सामना होते ही एक दूसरे को मारेंगे, भाई-भाई का दुश्मन ! परन्तु गाय के 10 साण्ड इकट्ठे रह सकते हैं, ये भाईचारे का प्रमाण है।

3. भैंस गन्दगी पसन्द है, कीचड़ में लथपथ रहेगी पर गाय अपने गोबर पर भी नहीं बैठेगी वह स्वच्छता प्रिय है।

4. भैंस को घर से 2 किमी दूर तालाब में छोड़कर आ जाओ वह घर नहीं आ सकती उसकी स्मरण शक्ति शून्य है। गाय को घर से 5 किमी दूर छोड़ दो वह घर का रास्ता जानती है, आ जायेगी ! गाय के दूध में स्मृति तेज है।

5. दस भैंस बान्धकर 20 फुट दूर से उनके बच्चों को छोड़ दो, एक भी बच्चा अपनी मां को नहीं पहचान सकता जबकि गोशालाओं में दिन भर गाय व बच्चे अलग-अलग शैड में रखते हैं, सायंकाल जब सबका मिलन होता है तो सभी बच्चे (हजारों की स॔ख्या में) अपनी अपनी मां को पहचान कर दूध पीते हैं, ये है गोदुग्ध की स्मरण शक्ति।

6. जब भैंस का दूध निकालते हैं तो भैंस सारा दूध दे देती है परन्तु गाय थोड़ा सा दूध ऊपर चढ़ा लेती है, और जब उसके बच्चे को छोड़ेंगे तो उस चढाये दूध को उतार देती है ! ये गुण माँ के हैं जो भैंस मे नही हैं।

7. गली में बच्चे खेल रहे हों और भैंस भागती आ जाये तो बच्चों पर पैर अवश्य रखेगी लेकिन गाय आ जाये तो कभी भी बच्चों पर पैर नही रखेगी।

8. भैंस धूप और गर्मी सहन नहीं कर सकती जबकि गाय मई जून में भी धूप में बैठ सकती है।

9. भैंस का दूध तामसिक होता है जबकि गाय का सात्विक ! भैंस का दूध आलस्य भरा होता है, उसका बच्चा दिन भर ऐसे पड़ा रहेगा जैसेे अफीम या भांग खाकर पड़ा है, जब दूध निकालने का समय होगा तो मालिक उसे ठोकरें मारकर उठायेगा परन्तु गाय का बछड़ा इतना उछलेगा कि आप रस्सा खोल नही पायेंगे ठीक से।

*आप हमेशा कोशिश यही करो कि, गौमाता का ही दूध पियें, जिससे कि हमारी बुद्धि शुद्ध और शरीर स्वस्थ रहें।*

*जय गौमाता*जय गोपाल*
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: भोगोंकी आसक्ति अथवा कामनाके द्वारा ही हमारे ज्ञानका हरण होता है –
कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः।
तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया।।
उन-उन भोगोंकी कामनाद्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है, वे लोग अपने स्वभावसे प्रेरित होकर उस-उस नियमको धारण करके अन्य देवताओंको भजते हैं अर्थात् पूजते हैं।।
डॉ0 विजय शंकर मिश्र:
ध्यान करना, भजना और पूजना – ये सब एक ही शब्दके पर्यायवाची शब्द हैं। भोगोंकी आसक्ति अथवा कामना अनुसार ही ध्यान, भजन और पूजन भी होता है और यह भी सत्त्व, रज, तम तीन प्रकार का ही होता है जिसके प्रभावसे –
यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरक्षांसि राजसाः।
प्रेतान्भूतगणांश्चान्ये यजन्ते तामसा जनाः।।
सात्त्विक पुरुष देवोंको पूजते हैं, राजस पुरुष यक्ष और राक्षसोंको तथा अन्य जो तामस मनुष्य हैं, वे प्रेत और भूतगणोंको पूजते हैं।।
इसीलिये ही –
यान्ति देवव्रता देवान्पितॄन्यान्ति पितृव्रताः।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्।।
देवताओंको पूजनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैं, पितरोंको पूजनेवाले पितरोंको प्राप्त होते हैं, भूतोंको पूजनेवाले भूतोंको प्राप्त होते हैं और मेरा पूजन करनेवाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं। इसलिये मेरे भक्तोंका पुनर्जन्म नहीं होता।।
इन्हीं भोगों को भोगने की आसक्ति अथवा कामना अनुसार ही हमारा स्वभाव भी हो जाता है जिसे उसकी प्रकृति कहा जाता है, इसी प्रकृतिके अनुसार ही हमारी रचना भी हो जाती है –
प्रकृतिं स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः।
भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशं प्रकृतेर्वशात्।।
अपनी प्रकृतिको अंगीकार करके स्वभावके बलसे परतन्त्र हुए इस सम्पूर्ण भूतसमुदायको बार-बार उनके कर्मोंके अनुसार रचता हूँ।।
परन्तु जो पुरुष –
ये त्वक्षरमनिर्देश्यमव्यक्तं पर्युपासते।
सर्वत्रगमचिन्त्यं च कूटस्थमचलं ध्रुवम्।।
सन्नियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः।
ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः।।
परन्तु जो पुरुष इन्द्रियोंके समुदायको भली प्रकार वशमें करके मन-बुद्धिसे परे, सर्वव्यापी, अकथनीयस्वरूप और सदा एकरस रहनेवाले, नित्य, अचल, निराकार, अविनाशी, सच्चिदानन्दघन ब्रह्मको निरन्तर एकीभावसे ध्यान करते हुए भजते हैं, वे सम्पूर्ण भूतोंके हितमें रत और सबमें समान भाववाले योगी मुझको ही प्राप्त होते हैं।।

– डॉ0 विज शंकर मिश्र:
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: 🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷

*सोलह सुख*

*पहला सुख निरोगी काया।*
*दूजा सुख घर में हो माया।*
*तीजा सुख कुलवंती नारी।*
*चौथा सुख सुत आज्ञाकारी।*

*पाँचवा सुख सदन हो अपना।*
*छट्ठा सुख सिर कोई ऋण ना।*
*सातवाँ सुख चले व्यापारा।*
*आठवाँ सुख हो सबका प्यारा।*

*नौवाँ सुख भाई औ’ बहन हो ।*
*दसवाँ सुख न बैरी स्वजन हो।*
*ग्यारहवाँ मित्र हितैषी सच्चा।*
*बारहवाँ सुख पड़ौसी अच्छा।*

*तेरहवां सुख उत्तम हो शिक्षा।*
*चौदहवाँ सुख सद्गुरु से दीक्षा।*
*पंद्रहवाँ सुख हो साधु समागम।*
*सोलहवां सुख संतोष बसे मन।*

*सोलह सुख ये होते भाविक जन।*
*जो पावैं सोइ धन्य हो जीवन।।*

*🚩जय श्रीराधे कृष्णा🚩*
🌷🌻🌷🌻🌷🌻🌷
[11/09, 10:42 PM] savitanandmishra: *आज का अमृत*
*प्रेरणादायक कथा*
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एक धोबी के पास एक गधा और एक कुत्ता था। गधा धोबी के कपड़े धोबीघाट तक लेकर जाता, धोबी कपड़े धोकर गधे पर लादता और फिर गधा उसे लेकर घर आता। कुत्ते का काम था घर की रखवाली करना। एक दिन की बात है धोबी कुत्ते को खाना देना भूल गया। इस बात पर कुत्ता बहुत नाराज हो गया।

संयोग की बात यह हुई कि उसी रात धोबी के घर चोर आ गया। धोबी और कुत्ते दोनों ने ही चोर को आते हुए देख लिया। कुत्ता अपने मालिक से नाराज था तो वह नहीं भौंका। गधे ने कुत्ते से कहा- अरे तुम भौंकते क्यों नहीं?

गधे की बात सुनकर कुत्ते ने कहा- मालिक तो हमें समय पर खाना भी नहीं देता। आज मैं अगर नहीं भौंकूंगा तो ही उन्हें मेरी कद्र होगी। गधे ने कहा- तुम कैसे नाशुक्रे हो। तुम्हारा फर्ज है कि तुम अभी मालिक के काम आओ। कुत्ता अड़ गया और नहीं भौंका। गधे ने सोचा, ‘अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा और अगर मालिक जाग गया तो शायद मुझे इनाम भी मिल जाए।’ गधा जोर-जोर से ढेंचू-ढेंचू करने लगा।

धोबी दिन भर काम करके थका हुआ था। गधे की आवाज सुनकर उसकी नींद तो खुल गई, लेकिन उसे बहुत गुस्सा आया। उसने अपने बेटे को बुलाया और गधे को खूब पीटा। गधे को पीटकर वह फिर सो गया।

सुबह जगा तो घर का सारा सामान गायब पा कर उसे समझते देर न लगी कि रात गधा क्यूँ ढेंचू-ढेंचू कर रहा था। लेकिन अब उसे गुस्सा कुत्ते पे आया ! अगर कुत्ते ने भौंका होता तो चोरी भी नहीं होती और बेचारे गधे को मार भी नहीं पड़ती ! गुस्से में बौखलाया किसान वही रात बाला डंडा उठाया और कुत्ते पर भी दोहरा बजा दिया। गधा समझ नहीं पाया, लेकिन आप तो समझदार हो ! तो समझे कि नहि ?

अजी ! भौंकना कुत्ते का काम था, लेकिन गधे ने वो किया इसलिए उस पर डंडे बजे और कुत्ते ने गधे वाला काम किया इसलिए उसे भी डंडे पड़े !

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[11/09, 10:53 PM] savitanandmishra: 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 12 सितम्बर 2021*
⛅ *दिन – रविवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2078 (गुजरात – 2077)*
⛅ *शक संवत – 1943*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास-भाद्रपद*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – षष्ठी शाम 05:21 तक तत्पश्चात सप्तमी*
⛅ *नक्षत्र – विशाखा सुबह 09:50 तक तत्पश्चात अनुराधा*
⛅ *योग – वैधृति सुबह 11:44 तक तत्पश्चात विष्कंभ*
⛅ *राहुकाल – शाम 05:12 से शाम 06:45 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:26*
⛅ *सूर्यास्त – 18:43*
⛅ *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – सूर्य षष्ठी, बलराम जयंती, कार्तिक स्वामी दर्शन, गौरी आवाहन, रविवारी सप्तमी (शाम 05:22 से 13 सितंबर सूर्योदय तक)*
💥 *विशेष – षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *गणेश उत्सव* 🌷
🙏🏻 *मोर पंख सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण को नहीं, बल्कि सभी देवी–देवताओं को प्रिय है। इसमें नौ ग्रहों का निवास भी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र से जुड़े कुछ खास उपायों को गणेश उत्सव पर किया जाए तो पैसों के साथ ही जीवन की अन्य कई तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। आइए जानते हैं मोर पंख से जुड़े कुछ खास आसान उपाय….*
👉🏻 *गणेश उत्सव में सिर्फ 1 मोर पंख बदल सकता है आपका भाग्य*
🌷 *कारगर उपाय* 🌷
*आपका भाग्य बदल सकता है गणेश जी को चढ़ाया हुआ एक मोरपंख*
🌿 *पैसों से जुड़ी प्राॅब्लम*
*जिन लोगों को पैसों की कमी रहती है वे पर्स में ये मोर पंख रखें।*
🌿 *रुके हुए काम होंगे पूरे*
*इस मोर पंख को हमेशा साथ रखने पर रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं।*
🌿 *बच्चा जिद्दी हो तो*
*उस बच्चे के सिर से पैर तक ये मोर पंख फिरा दें। फायदा होगा।*
🌿 *डरावने सपने आते हों तो*
*रात में डरावने सपने आते हों तो मोर पंख को सिरहाने रखकर सोएं।*
🌿 *नकारात्मक शक्ति*
*मोर पंख को घर के किसी ऐसी जगह पर रखें जहां से वो दिखाई दे तो नकारात्मकता दूर होगी।*
🌿 *बरकत के लिए*
*साउथ इस्ट में इस मोर पंख को रखने से घर में हमेशा बरकत रहेगी।*
🌿 *किताब में मोर पंख*
*इस मोर पंख को स्टूडेंट अपनी किताब में रखें तो पढ़ाई में मन लगने लगेगा।*
🌿 *यदि वास्तुदोष हो तो*
*यदि मुख्य द्वार दोष में हो तो दरवाजे के ऊपर तीन मोर पंख लगाएं।*
🌿 *शत्रु परेशान कर रहा हो तो*
*मंगलवार को मोर पंख से हनुमानजी के मस्तक पर सिंदूर से शत्रु का नाम लिखे।रात भर मोर पंख को देवस्थान पर रखें व सुबह बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *लक्ष्मी प्रप्ति व्रत* 🌷
➡ *13 सितम्बर 2021 सोमवार से महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ*
🙏🏻 *भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से आश्विन कृष्ण अष्टमी तक घर में अगर कोई महालक्ष्मी माता का पूजन करे और रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दे तो उस के घर में लक्ष्मी बढ़ती जाती है…*
➡ *इस वर्ष ये योग 13 सितम्बर 2021 सोमवार से 28 सितम्बर 2021 मंगलवार तक है…*
🙏🏻 *1) महालक्ष्मी का पूजन करें .*
🌙 *2)रात को चन्द्रमा को अर्घ्य देना कच्चे दूध(थोडासा) से फिर पानी से.. .*
🙏🏻 *3)महालक्ष्मी का मन्त्र जप करना.*
🌷 *ॐ श्रीं नमः*
🌷 *ॐ विष्णु प्रियाय नमः*
🌷 *ॐ महा लक्ष्मै नमः*
➡ *इन में से कोई भी एक जप करे..*
🙏🏻
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *घर में सदैव आर्थिक परेशानी रहती है तो* 🌷
🙏🏻 *स्कंदपुराण और दूसरे ग्रंथों में बात आयी है कि जिन लोगों के घर में सदैव आर्थिक परेशानी रहती है उनके लिए भाद्र शुक्ल अष्टमी (13 सितम्बर, सोमवार) के दिन से लेकर आश्विन कृष्ण अष्टमी (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) माने 28 सितम्बर, मंगलवार तक महालक्ष्मी माता का पूजन विधान स्कंदपुराण, आदि ग्रंथो में बताया गया है और इस सरल विधान के अनुसार 13 सितम्बर से 28 सितम्बर तक नित्य प्रात: लक्ष्मी माता का सुमिरन करते हुए – ॐ लक्ष्‍मयै नम: ॐ लक्ष्‍मयै नम: ॐ लक्ष्‍मयै नम: मंत्र का 16 बार प्रति दिन जप करें और फिर लक्ष्मीमाता का पूजन करते हुए एक श्लोक पाठ करें । इससे समय, शक्ति खर्च नहीं होगी उल्टा पुण्य भी बढ़ेगा | श्लोक इस प्रकार है-*
🌷 *धनं धान्यं धराम हरम्यम, कीर्तिम आयुर्यश: श्रीयं,*
*दुर्गां दंतीन: पुत्रां, महालक्ष्मी प्रयच्‍छ मे ‘*
*”ॐ श्री महालक्ष्मये नमः” “ॐ श्री महालक्ष्मय शब्दों की ताकत !!*

*एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला। अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला,* ” अरे छोटू, कहाँ जा रहे हो तुम ?” “मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ !”,

चीता रोमांचित होते हुए बोला। “हा-हा-हा-, लकड़बग्घा हंसा,” *अभी तो तुम्हारे खेलने-कूदने के दिन हैं, तुम इतने छोटे हो, तुम्हे शिकार करने का कोई अनुभव भी नहीं है, तुम क्या शिकार करोगे !!* लकड़बग्घे की बात सुनकर चीता उदास हो गया।

दिन भर शिकार के लिए वो बेमन इधर-उधर घूमता रहा, कुछ एक प्रयास भी किये पर सफलता नहीं मिली और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा। अगली सुबह वो एक बार फिर शिकार के लिए निकला।

*कुछ दूर जाने पर उसे एक बूढ़े बन्दर ने देखा और पुछा, ” कहाँ जा रहे हो बेटा ?” “बंदर मामा, मैं शिकार पर जा रहा हूँ। ” चीता बोला। बहुत अच्छे ” बन्दर बोला , ” तुम्हारी ताकत और गति के कारण तुम एक बेहद कुशल शिकारी बन सकते हो।*

जाओ तुम्हे जल्द ही सफलता मिलेगी।” यह सुन चीता उत्साह से भर गया और कुछ ही समय में उसने के छोटे हिरन का शिकार कर लिया।

*मित्रों, हमारी ज़िन्दगी में “शब्द” बहुत मायने रखते हैं। दोनों ही दिन चीता तो वही था, उसमे वही फूर्ति और वही ताकत थी पर जिस दिन उसे डिस्करेज किया गया वो असफल हो गया और जिस दिन एनकरेज किया गया वो सफल हो गया।*

📚शिक्षा–:–
इस छोटी सी कहानी से हम तीन ज़रूरी बातें सीख सकते हैं । -:-

🌹 *पहली, हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम अपने “शब्दों” से किसी को Encourage करें, Discourage नहीं। Of Course, इसका ये मतलब नहीं कि हम उसे उसकी कमियों से अवगत न करायें, या बस झूठ में ही एन्करजे करें।*

🌹 *दूसरी हम ऐसे लोगों से बचें जो हमेशा निगेटिव सोचते और बोलते हों, और उनका साथ करें जिनका Outlook Positive हो।*

🌹 तीसरी और सबसे अहम बात,
*हम खुद से क्या बात करते हैं, Self-Talk में हम कौन से शब्दों का प्रयोग करते हैं इसका सबसे ज्यादा ध्यान रखें, क्योंकि ये “शब्द” बहुत ताकतवर होते हैं।*

क्योंकि ये “शब्द” ही हमारे विचार बन जाते हैं, और ये विचार ही हमारी ज़िन्दगी की हकीकत बन कर सामने आते हैं, इसलिए दोस्तों, Words की Power को पहचानिये, जहाँ तक हो सके पॉजिटिव वर्ड्स का प्रयोग करिये, इस बात को समझिए कि ये आपकी ज़िन्दगी बदल सकते हैं।

https://awgpskj.blogspot.com/2021/09/blog-post_44.html
[11/09, 10:57 PM] savitanandmishra: ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् |
*वर्तमान हमारे हाथ में है,इसका सदुपयोग कीजिए*
हम मृत्यु और निर्माण के बीच में ठहरे हुए हैं। वर्तमान बहुत तेजी से भूत की ओर दौड़ता है। भूत और मृत्यु दोनों एक ही बात है। कहा जाता है क़ि मरने के बाद मनुष्य भूत बनता है। मनुष्य ही नहीं, हर चीज मरती है और वह भूत बन जाती है। जब किसी वस्तु की सत्ता पूर्णतः समाप्त हो जाती है, तब उसकी पूर्ण मृत्यु कही जाती है, पर आंशिक मृत्यु तो जन्म के साथ ही आरम्भ हो जाती है। बालक जन्म लेने के बाद बढ़ता है, विकास करता है, उसकी यह यात्रा मृत्यु की ओर ही है। संसार की हर वस्तु का, मनुष्य शरीर का भी निर्माण उन्हीं तत्त्वों से हुआ है, जो हर क्षण बदलते हैं। उनका चक्र भूत को पीछे छोड़ता हुआ और भविष्य को पकड़ता हुआ प्रति-क्षण बड़ी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व एक पल के लिए भी स्थिर नहीं रहता।अणु- परमाणुओं से लेकर विशालकाय ग्रह- पिण्ड तक अपनी यात्रा अविश्रान्त गति से कर रहे हैं। हमारा जीवन भी हर घड़ी थोड़ा-थोड़ा करके मर रहा है। इस दीपक का तेल शनैः-शनैः चुकता चला जा रहा है।भविष्य की ओर हम चल रहे हैं और वर्तमान को भूत की गोदी में पटकते जाते हैं। यह सब देखते हुए भी हम नहीं सोचते क़ि क्या वर्तमान का कोई सदुपयोग हो सकता है? जो बीत गया सो गया, जो आने वाला है, वह भविष्य के गर्भ में है।आज वर्तमान हमारे हाथ में है। यदि हम चाहें, तो उसका सदुपयोग करके इस नश्वर जीवन में से कुछ अनश्वर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पं श्री राम शर्मा आचार्य
[11/09, 10:59 PM] savitanandmishra: आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र (प्रशासनिक सेवा)
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#गुरुदेवकाअभौतिकसत्ताकीज्ञानविज्ञानमण्डलीसेसम्पर्क22

परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अद्भुत अध्यात्म-ज्ञानगंगा में पावन अवगाहन

पूज्यपाद गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन

अब मैं ब्रह्माण्ड ऊर्जा पर विचार करूंगा–महात्मा आचार्य वेदश्री ने आगे बतलाया–सूर्य ऊर्जा से भी महत्वपूर्ण ब्रह्माण्डीय ऊर्जा (जो समानरूप से सम्पूर्ण विश्वब्रह्माण्ड में व्याप्त है ) है। वह ऊर्जा वास्तव में सूक्ष्मतम प्राण है जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘ईथर’ कहते हैं। मानव शरीर में ब्रह्माण्ड ऊर्जा का प्रभाव मस्तिष्क, हृदय और नाभि पर पड़ता है। इसीलिये योग में इन तीनों स्थानों का भारी महत्त्व है। क्योंकि इन स्थानों पर जो यौगिक चक्र हैं, उनके द्वारा योगीगण विश्वब्रह्माण्ड और उसमें स्थित लोक-लोकान्तरों से सम्बन्ध स्थापित करते हैं।
पृथ्वी पर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रभाव मुख्यरूप से 51 स्थानों पर पड़ता है जिनको तांत्रिक भाषा में ‘शक्तिपीठ’ कहते हैं। ऊर्जा के माध्यम से उन सभी पीठों का अगोचर सम्बन्ध बराबर बना रहता है भावराज्य, दैवीय राज्य के अलावा संपूर्ण विश्वब्रह्माण्ड से भी। किसी भी पीठस्थान पर शक्ति की साधना-उपासना करने पर साधक की चेतना अपने आप संपर्क स्थापित कर लेती है भावराज्य अथवा दैवीय राज्य से। इस प्रसंग के अन्त में यह बतला देना आवश्यक है कि जैव ऊर्जा, भूमंडलीय ऊर्जा, जलीय ऊर्जा, तापीय ऊर्जा आदि ऊर्जाएं ब्रह्मांडीय ऊर्जा और पशु-पक्षियों पर बराबर किसी-न-किसी रूप में प्रभाव पड़ता रहता है।

—–:ॐ और स्वास्तिक:—–
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भारतीय अध्यात्म में ॐ का सर्वाधिक महत्व है। वह ‘अक्षरब्रह्म’ का स्वरूप है और है प्रतीक ब्रह्मांडीय ऊर्जा का भी। इसी प्रकार सूर्य

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anupam

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