अवैध कमाई पर चोट से बौखलाए ‘झोलाछाप’, पत्रकारों की आवाज दबाने की साजिश; डीएम ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच
अवैध कमाई पर चोट से बौखलाए 'झोलाछाप', पत्रकारों की आवाज दबाने की साजिश; डीएम ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच

बांदा: अवैध कमाई पर चोट से बौखलाए ‘झोलाछाप’, पत्रकारों की आवाज दबाने की साजिश; डीएम ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच।
बांदा में झोलाछाप डॉक्टरों की दबंगई: सच उजागर करने पर मीडिया को रोकने की कोशिश, पत्रकारों ने खोला मोर्चा
बिना डिग्री इलाज और पत्रकारों पर रौब! बांदा में अवैध क्लीनिकों पर एक्शन की तैयारी, सीएमओ ने मांगा एक सप्ताह का समय
बांदा। योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी बांदा 
जनपद में बिना डिग्री और वैध पंजीकरण के चल रहे अवैध चिकित्सा कारोबार का सच उजागर होने पर कथित झोलाछाप डॉक्टर बौखला गए हैं। अतर्रा तहसील के गर्गन पुरवा गांव में अवैध अस्पताल के संचालन की खबरें प्रकाशित होने से नाराज इन लोगों ने पत्रकारों के खिलाफ ही जिलाधिकारी को शिकायत सौंपकर खबरों पर रोक लगाने की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद बांदा प्रेस ट्रस्ट के बैनर तले दर्जनों पत्रकारों ने डीएम, एसपी और सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे सभी लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अवैध अस्पताल और ‘चिकित्सा मित्र संगठन’ पर उठे सवाल
मामले की शुरुआत गर्गन पुरवा निवासी राजकुमार कुशवाहा द्वारा बिना चिकित्सीय योग्यता के अस्पताल चलाने और मरीजों से धन वसूली की शिकायतों से हुई। वरिष्ठ पत्रकार आत्माराम त्रिपाठी समेत अन्य पत्रकारों ने जब इसे उजागर किया, तो कथित ‘चिकित्सा मित्र संगठन’ की आड़ में पत्रकारों को डराने का प्रयास किया गया। पत्रकारों ने प्रशासन से इस संगठन की वैधानिक स्थिति, इसके पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता और उनके वैध पंजीकरण की गहन जांच की मांग की है। पत्रकारों का स्पष्ट कहना है कि किसी संगठन का पदाधिकारी होना किसी को मरीजों की जान से खेलने का लाइसेंस नहीं देता।
प्रशासनिक एक्शन: डीएम ने बनाई कमेटी, एसपी ने दिया निष्पक्षता का भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अमित आसेरी ने सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। वहीं, पुलिस अधीक्षक पलास बंसल ने प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए मातहतों को कड़े निर्देश दिए हैं कि बिना ठोस जांच के पत्रकारों के खिलाफ कोई एकतरफा कार्रवाई न की जाए।
सीएमओ ने मांगा एक सप्ताह का समय
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ब्रजेन्द्र सिंह ने स्वास्थ्य निदेशक से मार्गदर्शन मांगने की बात कहते हुए कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे पूरे जनपद में चल रहे ऐसे अवैध अस्पतालों का सत्यापन कराएं और केवल कागजी आश्वासनों के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई करके दिखाएं, ताकि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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