UPI पर MDR शुल्क के विरोध में उतरे व्यापारी, जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
UPI पर MDR शुल्क के विरोध में उतरे व्यापारी, जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

बांदा: UPI पर MDR शुल्क के विरोध में उतरे व्यापारी, जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
बांदा। योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी 
डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने वाले UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू करने के प्रस्ताव का बांदा में कड़ा विरोध शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले स्थानीय व्यापारियों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा और इस फैसले को वापस लेने की मांग की।
छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा सीधा असर
व्यापार मंडल ने चिंता जताते हुए कहा कि आगामी 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR लागू होने की संभावना है, जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और दवा सहित फुटकर व्यापार में मार्जिन पहले से ही बेहद कम होता है। व्यापारियों का तर्क है कि यदि यह अतिरिक्त शुल्क लगाया गया, तो इसकी लागत अंततः उपभोक्ताओं को ही उठानी पड़ेगी। इससे न केवल महंगाई बढ़ेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया मुहिम को भी झटका लगेगा क्योंकि लोग फिर से नकद (Cash) लेनदेन की ओर लौटने को मजबूर होंगे।
व्यापार मंडल की 7 सूत्रीय प्रमुख मांगें
जिला उद्योग व्यापार मंडल द्वारा सौंपे गए 7 सूत्रीय ज्ञापन में सरकार से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगे की गई हैं:
शुल्क मुक्त लेनदेन: छोटे व्यापारियों के लिए UPI पेमेंट को पूरी तरह से शुल्क मुक्त रखा जाए।
व्यापार की प्रकृति के आधार पर सीमा: MDR लागू करने के लिए केवल UPI लेनदेन की राशि (जैसे 2000 रुपये) को आधार न बनाया जाए, बल्कि व्यापार की प्रकृति (मार्जिन) के आधार पर नियम तय किए जाएं।
व्यापारियों से संवाद: किसी भी नई शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर व्यापारी संगठनों से परामर्श किया जाए।
ज्ञापन सौंपने में ये रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान व्यापार मंडल के अध्यक्ष सत्यप्रकाश सर्राफ, महामंत्री कमल कुमार गुप्ता, प्रांतीय संयुक्त महामंत्री चारुचंद्र खरे, और वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी और पदाधिकारी मौजूद रहे। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे।
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