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मृत्युभोज नहीं खाना चाहिए

मृत्युभोज नहीं खाना चाहिए

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*मृत्युभोज नहीं खाना चाहिए, कारण एक तरफ बहती है आंसू, दूसरी तरफ रहती है परिवार में सदमा, तीसरी तरफ रहती है आर्थिक कमजोरी।*

(आलोक बादल, प्रमंडल ब्यूरो चीफ, आवाज़ इंडिया लाइव कोशी प्रमंडल सहरसा बिहार)

कोसी प्रमंडल 23 जनवरी 2024

सभी धर्मों में अनेको कुरीतियाँ प्रचलित होती है और हिन्दू धर्म में भी ऐसी ही अनेकों कुरीतियाँ प्रचलित है। जिनका कोई भी तर्क मौजूद नहीं है। लेकिन फिर भी वे वर्तमान में भी अनवरत जारी है। मृत्युभोज भी एक ऐसी ही कुरीति है, जिसे वर्तमान में बंद किये जाने की आवश्यकता है।कारण एक तरफ बहती है आंसू, दूसरी तरफ रहती है परिवार में सदमा, तीसरी तरफ रहती है आर्थिक कमजोरी। मृत्युभोज खाने एवं खिलाने की परम्परा हजारो सालो से कायम है। लेकिन आज हम आपको बताएंगे की आखिर क्यों मृत्युभोज नहीं खानी चाहिए। हिन्दू धर्म में मुख्यतः 16 संस्कार बनाए गए है। जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान एवं अन्तिम तथा 16 वाँ संस्कार अन्त्येष्टि है। इस प्रकार जब सत्रहवाँ संस्कार बनाया ही नहीं गया, तो सत्रहवाँ संस्कार ‘तेरहवीं का भोज’ कहाँ से आ टपका? किसी भी धर्म ग्रन्थ में मृत्युभोज का विधान नहीं है। बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
महाभारत का युद्ध होने को था, अतः श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जाकर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया। दुर्योधन द्वारा आग्रह ठुकराए जाने पर श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह चल पड़े। दुर्योधन द्वारा श्री कृष्ण से भोजन करने के आग्रह पर कृष्ण ने कहा कि ’’सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः’’ अर्थात जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो, तभी भोजन करना चाहिए।
अतः आप आज से संकल्प लें लें कि आप किसी के मृत्यु भोज को ग्रहण नहीं करेंगे और मृत्युभोज प्रथा को रोकने का हर संभव प्रयास करेंगे। हम सभी का इस प्रयास से यह कुप्रथा धीरे-धीरे एक दिन स्वत: ही बंद हो जायेगी। सिर्फ आवश्यकता है अपनी विचार बदलने और मृतक परिवार की स्थिति को समझने की। कहीं कहीं नामुर्खों के द्वारा मृतक परिवार को मृत्यु भोज लेने के लिए बाध्य कर दिया जाता है और उनकी जमीन तक बिकवाकर भोज खाते हैं, वैसे व्यक्तियों से मेरी अपील रहेगी कि आप अपनी विचार बदलने का कार्य करें ताकि किसी की जमीन नहीं बिके और अपने जीवन को नयी तरिके से शुरूआत कर सके। यदि आप अपनी विचार मे बदलाव नहीं लाते हैं तो आने वाली पीढ़ी आपके नाम पर थुकेगी।

anupam

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