विक्षिप्त बेटे को जंजिर में बांधकर बेटी का कराया प्रसव। सहरसा सदर अस्पताल के वार्ड में विक्षिप्त को लाने से डॉक्टर ने किया मना।
विक्षिप्त बेटे को जंजिर में बांधकर बेटी का कराया प्रसव। सहरसा सदर अस्पताल के वार्ड में विक्षिप्त को लाने से डॉक्टर ने किया मना।

*संवाददाता :-* विकास कुमार सहरसा (बिहार)।
*स्टोरी :-* विक्षिप्त बेटे को जंजिर में बांधकर बेटी का कराया प्रसव। सहरसा सदर अस्पताल के वार्ड में विक्षिप्त को लाने से डॉक्टर ने किया मना।
*एंकर :-* खबर बिहार के सहरसा से है जहां सदर अस्पताल प्रशासन की अमानवीय चेहरा सामने आया जहां अपने बेटी का प्रसव कराने अपने विक्षिप्त बेटे के साथ पहुंची महिला को पहले अपने विक्षिप्त बेटे को लेकर बाहर जाने को कहा गया। उसके बाद ईलाज सुरु करने की बात कही गई।जबकि घर का कोई अन्य सदस्य भी नही था।ऐसे में एक तरफ विक्षिप्त बेटा जिसे कहीं छोड़ना भी मुनासिब नहीं था। तो दूसरी तरफ प्रेगनेंट बेटी जिसका प्रसव भी होना था। जिसका ईलाज तुरंत करवाना था।अब बीच मझधार में फसी मां अपने विक्षिप्त बेटे को लेकर बाहर जाती है तो बेटी का प्रसव कैसे होगा और कौन देखेगा। लाचार और विवश मां करे तो करे क्या।क्योंकि मां तो मां होती है उसके लिए उसका बच्चा करेजे टुकड़ा होता है।ऐसे में अपने बेटी का प्रसव कराने आई मां ने अपने बेटे को प्रसव वार्ड के समीप वार्ड के सामने ग्रील में पांव को जंजीर से बांधकर रखा ताकि उसके बेटी का प्रसव हो सके।
अब जड़ा सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड के समीप जंजीर से बंधा यूवक कृष्णा को देखिए ये सभी से आराम से बात भी करता है और अपना पता भी बताता है और असपताल किस काम से आया है और बहन का क्या नाम है सभी चीज बताता है इतना ही नही कितना तक पढ़ा है वो भी बताता है
पीड़ित मां की मानें तो बेटे का ईलाज कई जगह से चल रहा है भाग जाता है पति विकलांग है कौन देखता तो अपने बेटे को लेकर अपनी बेटी का प्रसव कराने सदर असपताल आई तो बेटे को देख ईलाज करने से मना कर दिया गया।पहले बेटे को लेकर बाहर जाने को कहा गया। तब जाकर ईलाज करने की बात कही गई।क्या करते बेटे को छोर तो नही देते।जंजीर से बांधना पड़ा।
ऐसे में सवाल उठना लाजमी क्या किसी विक्षिप्त को जंजीर से बांधना सही है।सदर अस्पताल के कर्मी को विक्षिप्त बेटे को लेकर उसकी मां को असपताल से बाहर जाने को कहना चाहिए।

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