चित्रकूट चित्रकूट राजापुर ही है विश्व विख्यात पूजनीय तुलसीदास जी महाराज की जन्म स्थली साक्ष्य देखें पढ़ें
चित्रकूट राजापुर ही है विश्व विख्यात पूजनीय तुलसीदास जी महाराज की जन्म स्थली साक्ष्य देखें पढ़ें

* चित्रकूट उत्तर प्रदेश न्यूज़

चित्रकूट राजापुर ही है विश्व विख्यात पूजनीय तुलसीदास जी महाराज की जन्म स्थली साक्ष्य देखें पढ़ें
मानस और हिंदी के नाम पर दुकान चलाने वालों ने तुलसी बाबा का जन्म स्थान व पिता का नाम भी बदलने से नहीं चूका*
चित्रकूट राजापुर
अपना भारत देश भी एक अजीबो गरीब देश है यहां सर्वाधिक अगर किसी का अपमान और मजाक उड़ता है तो वह है विद्वानों का साहित्यकारों का बुद्धिजीवियों और समाज को नई चेतना देने वालों का।
साहित्य के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले व्यवसाय करने वाले यह चांडाल चौकड़ी अपने निजी स्वार्थ के लिए मतलब के लिए कभी-कभी महा ग्रंथ लिखने वालों के साथ भी खिलवाड़ करने से तनिक भी कोताही नहीं बरतते है।
*अपने देश में ही नहीं विदेशों में भी साहित्यकारों पर विवाद*
अंग्रेजी साहित्य के नाम पर अपना पापी पेट व्यवसाय चलाने वाले अपने बड़े से बड़े लेखक का मजाक उड़ाने से जरा सा भी संकोच नहीं किया इंग्लैंड में शेक्सपियर जैसे जाने-माने नाटककार के साथ भी उसी देश के लोगों ने मजाक किया इंग्लैंड वासियों ने एक्सएक्सबीआर के स्थान पर सात शेक्सपियर को अवतरित कर दिया शेक्सपियर के नाम पर अपना पेट पालने वालों ने यहां तक कह दिया कि मार लो और बेकन ही शेक्सपियर के अवतार थे बेचारे मार लो कि तो कब्र तक खोदने की तैयारी भी कर ली गई थी।
*7 सेक्स्पियर के बाद अब 13 तुलसी*
इस समय में अपने अखंड भारत में भी श्री रामचरितमानस जैसे वंदनीय महाकाव्य की रचना करने वाले विश्व कवि विश्व विख्यात संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास के साथ भी हिंदी की रोटी खाने वाले बाबा तुलसीदास के नाम को गली-गली बेचने वाले बाबा के नाम पर शोध ग्रंथ प्रस्तुत कर डिग्री कॉलेज में नौकरी पाने वाले, मानस की चौपाइयों से व्यायाम कर अपनी लच्छेदार व्याख्या से जनमानस में धात जमा कर सिल्क की धोती और कुर्ता पहनने वाले एक घिनौना मजाक कर रहे हैं यह निजी स्वार्थी लोगों ने देश में 13 तुलसी को सामने खड़ा कर दिया है।
कुछ चाटू कारों ने यहां तक कह दिया कि रत्नावली की उनसे शादी नहीं हुई गोस्वामी तुलसीदास कुंवारे ही जीवन यापन किए यह भी कुछ प्रयास बराबर किया गया।
कुछ स्वार्थी लोगों ने गोस्वामी तुलसीदास के जन्म स्थान पिता का नाम जाति और उनका परिचय बदल बदलने का भी पूरा प्रयास किया और कुचक्र रचा जिसमें लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी के विभागाध्यक्ष महा मना पंडित सूर्य प्रकाश दीक्षित प्रमुख हैं।
*श्री गोस्वामी तुलसीदास का राजापुर चित्रकूट में स्थित “तुलसी स्मारक” भी सच्चाई के नजदीक ले जाता है*
श्री गोस्वामी तुलसीदास का स्मारक बनाने वाले का प्रतिनिधि बहुत ही स्तुत्य है
गोस्वामी जी का स्मारक तो हिंदी भाषियों के हृदय में हमेशा के लिए कायम है तो भी कोई ऐसा रूप दिया जाना अनिवार्य था जिसको सभी लोग देख और सुन सके और सबसे आवश्यक बात है कि हम अपने महात्माओं का और बड़े लोगों का नाम मात्र जानते हैं और उनसे संबंध रखने वाली बातों का हमको पता भी नहीं रहता है यह मेरा परम सौभाग्य है कि मुझे भी गोस्वामी जी की बहुत सारी बातें जानकारी में अब आ गई हैं और आती जा रही हैं यह तुलसी स्मारक जीता जागता पूजा गोस्वामी तुलसीदास जी का स्वरूप है और मेरा कहना है कि यह गोस्वामी जी के सैकड़ों वर्षो से करोड़ों मनुष्य गोस्वामी जी की रचनाओं का पूर्ण अध्ययन करते हैं उनकी रचनाओं का आंखों करोड़ों मनुष्य का जीवन रहने लायक बनाया है प्रत्येक व्यक्ति का परम कर्तव्य है कि ऐसे संतों और दिव्य महात्माओं के स्मारक के देख रेख के लिए पूर्ण समर्पित रहना चाहिए।
यह तुलसी स्मारक सभा का (तुलसी स्मारक) सन 1913 में मिस्टर जे मोर आईसीएस , ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कर्वी ने एक तुलसी स्मारक सभा का संगठन किया
सन 1916 में मिस्टर पन्नालाल, आईसीएस ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने मंदिर के पीछे एक तुलसी स्मारक पाठशाला की स्थापना की।
इसी वर्ष रीवा नरेश महाराज वेंकट रमण सिंह राजापुर आए यमुना के कटाव से मंदिर की सुरक्षा के लिए उन्होंने एक कमेटी बनाई और कुछ धन भी संचय किया जिससे तीन दीवारें सुरक्षा के लिए बनवाई गई।
सन 1920 में मिस्टर के0 यन0 नाक्स, कलेक्टर , इलाहाबाद परिवर्तित नाम प्रयागराज के राजा साहब वरांव के साथ राजापुर आए उन्होंने मंदिर के सुरक्षा के लिए 1171 रुपए चंदा इकट्ठा किया जिसमें ₹200 राजा साहब ने भी दिया था 1920 में बांदा के कलेक्टर श्री सी0 के0 देसाई ने घाट बनवाने के लिए₹18000 इकट्ठे किए जो इंपीरियल बैंक इलाहाबाद में 1935 तक जमा रहे।
सन 1936 में कर्वी के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मिस्टर भगवान सहाय ने उन्हीं रुपयों में से एक अरबी में एक तुलसी पुस्तकालय बनवाया जिसमें से बचा हुआ ₹14000 तुलसी स्मारक संस्कृत पाठशाला राजापुर को दे दिया गया।
*तुलसी जन्मभूमि राजापुर चित्रकूट में संरक्षित पांडुलिपि*
राजापुर में सुरक्षित रामचरितमानस का अयोध्या कांड पुरातत्व की एक अमूल्य निधि है इसमें कुल 170 पन्ने हैं प्रत्येक पन्ने का आकार साडे बारह इंच गुने 5 इंच हैं यह पुस्तक तुलसीदास जी के शिष्य गणपतराम उपाध्याय के वंशज माफीदार राम आसरे त्रिपाठी के घर पर जो आज मंदिर रूप में परिवर्तित हो चुका है वहां संरक्षित रखी हुई।
पहले यह अयोध्या कांड रामायण मंदिर पर ही रखी रहती थी दर्शनार्थियों द्वारा चढ़ाई जाने वाली दक्षिणा का लाभ देखकर लगभग 200 वर्ष पहले पुजारी रामायण लेकर भागा ग्राम वासियों को जानकारी मिली तो लोगों ने उस पुजारी का पीछा किया जिसमें पुजारी रामायण को लिए हुए काला काकर घाट पर गंगा पार कर रहा था लोगों ने नाव से लौटने का आदेश दिया भयभीत पुजारी ने बीच गंगा में रामायण को फेंक कर भाग गया।
फिर सभी लोग यह समाचार लेकर राजा काला काकर से मिले तो उन्होंने मछुआरों के द्वारा महाजाल डलवा कर पुस्तक की खोज करवाई।
यह पुस्तक गली हुई प्राप्त हुई गली हुई पुस्तक का जीर्णोद्धार काशी नरेश महाराजा ईश्वरी नारायण प्रसाद सिंह ने कराया था।
मात्र अयोध्या कांड ही पठानी रह जाने से उतना अंश उन्होंने राजापुर भेज दिया और शेष पठनीय प्रश्धांश उन्होंने अपने संग्रहालय में रख लिए , ऐसा विद्वानों के श्री मुख से जानकारी प्राप्त हुई।
बहुत समय पहले उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ संपूर्णानंद ने पुस्तक की रक्षा सुरक्षा के लिए एक सेफ अलमारी प्रदान किया था आज भी यह पुस्तक उसी सेफ में पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा हस्त रचित रामचरितमानस सुरक्षित संरक्षित रखी गई है।
*पूज्य गोस्वामी तुलसीदास को राजापुर और चित्रकूट दोनों ही जगहों पर मुआफी मिली थी*
उधव, माधव, केशव ,सिया राम मदारी राम , गणपत राम
जरूरी काम है उपर्युक्त वंशावली तुलसीदास जी की शिष्य परंपरा है
बादशाह अकबर आलमगीर तथा बुंदेलखंड के राजाओं द्वारा जो मुआफी तुलसीदास जी को मिली थी उस पर तुलसी दास जी के शिष्य गणपतराम उपाध्याय का अधिकार रहा उसके बाद उनके लड़के सिवाराम मदारी राम आदि के नाम से वंशज उपरोक्त अधिकृत चले आ रहे हैं
मुआफ़ी की सनदे अधिकार ब्रिटिश हुकूमत तक नए होते आ रहे हैं तुलसीदास जी को राजापुर और चित्रकूट दोनों जगहों में मुआफी मिली थी आज शिष्य परंपरा इस मुआफी के मालिक हैं
मंदिर के सेवादार शिष्यों के पास आज भी दो नागरी लिपि और एक अंग्रेजी में लिखी हुई सनदें संरक्षित हैं जो बहुत ही जीर्ण शीर्ण हैं और अक्षर कट फट गए हैं। उक्त बातें पढ़ कर आप अनुमान लगा सकते हैं चित्रकूट जनपद के राजापुर नगर मैं ही पूजनीय गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज का जन्म हुआ था इस मौके पर पूजनीय विद्वान व अनिल देवरवा समाजसेवी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे
मंडल प्रभारी गंगा प्रसाद करवरिया

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