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पाकुड़ नगर में पानी का हाहाकार, सुरेश अग्रवाल अनिश्चितकालीन धरना पर

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पाकुड़ से राजकुमार भगत की रिपोर्ट

नगर में पानी का हाहाकार, सुरेश अग्रवाल अनिश्चितकालीन धरना पर

नगर परिषद हाय हाय , सम्पा साहा हाय हाय से गूंजा धरना स्थल

पाकुड़। आखिरकार पुनः एक बार पानी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल पाकुड़ के जनता के लिए नगर परिषद के विरुद्ध पूर्वी रेल फाटक के समीप धरना पर बैठ गए। उनके साथ शहर के कई गणमान्य व्यक्ति एवं समाजसेवी उपस्थित थे। स्थानीय जानता रेलवे फाटक पर संपा साहा हाय, सुनील सिंह हाय हाय, नगर परिषद हाय हाय, संपा शाह गद्दी छोड़ो, व मुर्दावाद के नारा लगा रहे थे । लोग आर पार की लड़ाई लड़ने के मूड में थे । जिला प्रशासन की ओर से अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा मान मनौवल का कार्य जारी था। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने बताया कि पाकुर नगर परिषद पूरी तरह से विफल है फेल है। केवल पीसी का कार्य जारी है। इसके पीसी के सिवा किसी को कुछ दिखाई नहीं पड़ता। पूर्व में भी मैंने भूख हड़ताल की थी! पानी को सुचारू रूप से चलाने की बात कही गई थी किंतु कुछ दिनों में ही पानी टाइ टाइ फिक्स हो गया। कार्यपालक पदाधिकारी ने 4 दिन पानी नहीं चलने पर पांचवा दिन 4 घंटे का समय मांगा था । किंतु 24 घंटे बीत गए पानी का कहीं अता पता नहीं है। गंगा योजना को 11 साल हो गए ₹40 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए । बावजूद पानी का कहीं दर्शन नहीं है।इस संवाददाता को भी नगर परिषद के पदाधिकारी ने गुरुवार से जल देने की बात कही थी। किंतु बात झूठी साबित हुई। ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर ही नगर के पानी को बाधित किया जाता है। सुरेश अग्रवाल ने बताया कि नगर परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष संवेदनहीन है ।इन्हें पाकुर की जनता से कोई सरोकार नहीं है। काफी मन मनवाल करने बाद भी इनलोगो के कान में जूं तक नहीं रेंगा। ₹40करोड़ खर्च हो सकता है पर इन लोगों के पास एक मोटर खरीदने का पैसा नहीं है। वही घिसा पिटा मोटर बनाओ और लगाते रहो। कार्यपालक पदाधिकारी ने तो फोन उठाना बंद कर दिया। क्या यह जनता की सेवा करेंगे। किंतु इनको टैक्स पूरा चाहिए। जब तक पाकुर की जनता को पानी प्राप्त नहीं होगी हमारी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगी।
मालूम हो कि पिछले कई दिनों से नहीं बल्कि यों कहा जाए कि हर 15 से 20 दिनों में पाकुर की यही समस्या रहती है। एक तो 30 से 40 मिनट पानी मिलता है उस पर भी इन लोगों का बोझ प्रतीत होता है। सच पूछा जाए तू कुछ विशेष मोहल्लों को छोड़कर नगर परिषद के किसी भी सदस्य के द्वारा पानी के प्रति संवेदनशील व गंभीर नहीं है। अन्यथा पानी की समस्या से निजात पाया जा सकता था। स्थानीय जानता का मानना है की ऐसा प्रतीत होता है की नगर परिषद के पदाधिकारी को भी गंगाराम ठाकुर के तरह गुमराह किया जा रहा है। आने वाले समय में इसका नतीजा भुगतना होगा। नगर का पानी बार-बार क्यों बाधित हो रही है। कहीं ऐसा तो नहीं कि जानबूझकर बाधित किया जा रहा है। समय आने पर इसका जवाब मिलेगा। समाचार लिखे जाने तक धरना प्रदर्शन जारी था। मौके पर मौके पर पुलिस जवान तैनात हैं। दूसरी और नगर परिषद के द्वारा यह कहा गया जनता को जल प्राप्त हो इसके लिए व्यवस्था किया जा रहा है। वही घिसा पिटा जवाब जो पिछले 11 वर्षों से चला रहा है शीघ्र ही निदान कर लिया जाएगा। तारीख पर तारीख और डेट पर डेट। अगर सही मायने में अगर कहा जाए तो पाकुर की जनता को जल प्राप्त हो इसकी जिम्मेदारी केवल नगर परिषद को ही क्यों हो? अगर नगर परिषद सक्षम नहीं है तो ऊपर के पदाधिकारी और नेतागण क्या कर रहे हैं? आखिर वे भी तो जनता के लिए ही है

anupam

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