सहरसा ठंड से परेशान लोगों को प्रांगण रंगमंच और रोटी बैंक ने दिया कंबल और मास्क

सहरसा ब्यूरो चीफ सुभाष राम
पतरघट
सहरसा जिले के पतरघट प्रखंड के पस्तपार गांव में कंबल और मास्क का वितरण किया गया। कोशी क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने वाली संस्था प्रांगण रंगमंच और रोटी बैंक के संयुक्त तत्वावधान में करीब डेढ़ सौ लोगों को कंबल और मास्क वितरण किया गया। ठंड से परेशान लोगों को कंबल मिलने से उनके चेहरे पर खुशी की लहर देखी गई। प्रांगण रंगमंच और रोटी बैंक द्वारा
कंपकपाती ठंड से निजात दिलाने और कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कंबल और मास्क वितरण समारोह में रोटी बैंक के अध्यक्ष चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि समाज में हाशिए पर खड़े लोगों के ऊपर सहयोग कर सामाजिक तानाबाना को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने प्रांगण रंगमंच के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार परमार ने कहा कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कला संस्कृति सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को बखूबी कर प्रांगण रंगमंच आदर्श स्थापित किया है। इसी तरह भूखे को खाना और जरूरतमंद लोगों को रोटी बैंक रोपल सॉफ्ट कंपनी के निर्देशक प्रीति यादव ने कहा कि इस कड़ाके की ठंड में ऐसे में रोटी बैंक और प्रांगण रंगमंच के द्वारा किए जा रहे कार्यक्रम काफी सराहनीय है। उन्होंने कहा कि गरीब और निस्सहाय लोगों की सेवा ही मानव का असली धर्म और कर्म है। प्रीति यादव ने संजय परमार और चंद्रशेखर कुमार के कार्यों को समाज के लिए अनुकरणीय बताया। प्रांगण रंगमंच के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार परमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रांगण रंगमंच और रोटी बैंक मधेपुरा में सक्रियता से गरीबों की सेवा कर रही है। अब ग्रामीण इलाके में भी इस तरह के कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उन्होंने चंद्रशेखर कुमार के सहयोग की सराहना करते कहा कि पौधरोपण के साथ-साथ गरीबों को खाना खिलाना और ठंड से निजात के लिए कंबल का वितरण किया जाना महत्वपूर्ण है। मौके पर कार्तिक प्रसाद सिंह, पैक्स अध्यक्ष उत्तम कुमार, प्रांगण रंगमंच के कार्यकारिणी सदस्य शशि भूषण कुमार, डा. चंदन सिंह, शाश्वत सिंह ओम जी, सौरव सिंह राठौर , अजय कुमार सिंह, महाकान्त यादव, ऋतु कुमारी, कुमकुम कुमारी, उज्जवल परमार, ज्ञानेश प्रताप, दुर्गेश प्रताप, प्रकाश कामती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

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