पाकुड: कुर्बानी साहेब ए नशाब हर मोमिन मर्द और औरत पर फर्ज

पाकुड़ से राजकुमार भगत की रीपोट
कुर्बानी साहेब ए नशाब हर मोमिन मर्द और औरत पर फर्ज
इसकी नाफरमानी करने वाला गुनाह का मुस्तहिक़ होता है :मिस्बाही
पाकुड़ ।कुर्बानी देना आलमे इस्लाम मे साहेब ए नशाब हर मोमिन मर्द और औरत पर फर्ज करार दिया गया है । इसकी नाफरमानी करने वाला गुनाह का मुस्तहिक़ (भागीदार ) होता है उक्तर बाते पाकुड़ हरिण डंगा जामे मस्जिद के इमाम मुफ़्ती हाफिज जमील अहमद मिस्बाही ने कही । उन्होंने कहा कि जानवर की कुर्बानी देना सुन्नत ए इब्राह्मी है जो इस्लामिक कलेंडर के आखरी माह 10 जिल्हिज्जा को दी जाती है । इसके मसाइल और फजाईल कुरान और हदीश के रोशनी में देते हुए मिस्बाही ने कहा कि जिस जानवर की कुर्बानी दी जाय वह पूरी तरह से स्वस्थ व तन्दरुस्त हो। उसमे किसी तरह का कोई ऐब ना हो। अल्लाह के राह में कुर्बान किये गए जानवर के गोशत को तीन हिस्सा करे ।पहला हिस्सा गरीब मिस्कीन को दें। दूसरा हिस्सा अपने दोस्त और रिस्तेदार को और तीसरा हिस्सा अपने खाने के लिए रखे । यही सही तरीका है ।जो ये नही करते कुर्बानी का शवाब जाता रहता है। उन्होंने अपील की कि आप जब जानवर की कुर्बानी करते है तो खून के एक कतरा जमीन पर गिरने से पहले आप की कुर्बानी अल्लाह की बारगाह में कबूल होती है।उन्होंने कहा कि 10 जिल्हिज्जा को अल्लाह के नजदीक खून बहाने और कुर्बानी देने से प्यारा कोई अमल नहीं है। यह खून कयामत में जहन्नुम के आग से बचाएगी । साहेब ए नशाब सर मुराद जिसके पास 653 ग्राम 184 मिलीग्राम चांदी और सोना 93 ग्राम 312 मिलीग्राम हो यह मर्द या औरत इस्लाम की नजर में साहेब ए नशाब है । उसके बराबर बाजार दर उतनी रकम हो उसपर पर कुर्बानी फर्ज है ।मिस्बाही ने लोगों से अपील की की कुर्बानी में अपने गरीब भाई का ख्याल जरूर रखें । कुर्बानी की खुशी में उनको भी शामिल करें। कुर्बानी ईदुल जोहा के नमाज अदा कर कोरोना काल को देखते हुए सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए खुशी मनाएं।
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