बांदा बांदा गर्ल्स प्लेयर का भविष्य खतरे में
बांदा गर्ल्स प्लेयर का भविष्य खतरे में

ब्यूरो चीफ योगेंद्र प्रताप सिंह
*एंकर-* सरकारी मशीनरी की उदासीनता उत्तर प्रदेश में कम होने का नाम नहीं ले रही है, खास तौर पर देश के लिए खेलने का जज्बा दिलों में समाए ग्राउंड में जी तोड़ मेहनत करने वाले खिलाड़ियों पर सिस्टम की उदासीनता उनके भविष्य के साथ किसी कहर से कम नहीं दिख रही है। ताजा मामला बांदा से सामने आया है जहां स्पोर्ट्स स्टेडियम की छात्राओं को सिस्टम की लापरवाही के चलते ट्रायल से ही वंचित होना पड़ा है, इन छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है और अपनी परेशानी लेकर आज इन छात्राओं ने जिला अधिकारी की चौखट पर दस्तक दी है।
*वीओ*- बांदा डीएम की चौखट पर खड़ी यह लड़कियां आम लड़कियां नहीं है यह छात्र के साथ कबड्डी की प्लेयर भी हैं जिनके साथ स्पोर्ट स्टेडियम अधिकारियों ने भारी मजाक किया है । पिछली 18 दिसम्बर को जनपद की और मंडली कबड्डी टीम में ट्रायल होना था लेकिन सालों से मेहनत कर रही स्पोर्ट स्टेडियम बांदा की इन छात्राओं का लापरवाह सिस्टम में ट्रायल ही नहीं कराया, इन छात्राओं का आखरी साल है गरीब घर से यह छात्राएं हैं मेहनत मजदूरी करके ट्यूशन पढ़ाकर यह हॉस्टल में रहने का और पढ़ाई का खर्च उठा रही है और इतना त्याग करने के बाद भी इन्हें ट्रायल का मौका ही नहीं दिया गया। आपको बता दें कि 17 दिसंबर को महिला कबड्डी खिलाड़ी का जनपदीय ट्रायल करने का खेलकूद निदेशालय का कार्यक्रम था और 18 दिसंबर को मंडलीय ट्रायल झांसी में आयोजन किया गया था लेकिन इन छात्राओं को ट्रायल के बारे में स्टेडियम के क्रीड़ा अधिकारी विजय कुमार ने जानकारी ही नहीं दी और ना ही ट्रायल कराया गया, जिससे इन छात्राओं का भविष्य पूरी तरह से चौपट हो गया है।
बाईट-1- खुशबू प्रजापति- पीड़ित खिलाड़ी
बाईट-2- प्रियांशी- पीड़ित खिलाड़ी
वीओ-2- वहीं इस मामले में जब क्रीड़ा अधिकारी विजय कुमार से सवाल किया गया तो उनका जवाब भी बेहद हास्य पद सामने आया है । कबड्डी की महिला खिलाड़ियों का ट्रायल ना कराने के दोषी विजय कुमार अपनी सफाई में कहते हैं कि सिमौनी धाम मेले में उनकी ड्यूटी लगी थी और वह ड्यूटी के चलते खेलकूद निदेशालय के जारी कार्यक्रम नहीं आयोजित करा पाए।

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