आगरा शंख का धार्मिक ही नहीं बल्कि चिकित्सीय महत्व भी हैं रू राजेश खुराना
शंख का धार्मिक ही नहीं बल्कि चिकित्सीय महत्व भी हैं रू राजेश खुराना

आगराः शंख का धार्मिक ही नहीं बल्कि चिकित्सीय महत्व भी हैं रू राजेश खुराना
आगरा। कोरोना महामारी में शंख का चिकित्सीय महत्व धार्मिक महत्व से किसी प्रकार कम नहीं है। यह बात वैज्ञानिक भी मानते हैं।
एक साक्षात्कार में जानकारी देते हुए आत्मनिर्भर एक प्रयास व आगरा स्मार्ट सिटी,भारत सरकार के सलाहकार सदस्य राजेश खुराना ने शंख के चिकित्सीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज वैज्ञानिक मानते हैं कि शंख फूंकने से उसकी ध्वनि जहां तक जाती है, वहां तक के अनेक बीमारियों के कीटाणु ध्वनि-स्पंदन से मूर्छित हो जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। यदि रोज शंख बजाया जाए, तो वातावरण कीटाणुओं से मुक्त हो सकता है। आज भी कुछ मंदिरो और घरों में शंख सुबह्-शाम बजाए जाते हैं। इसका धार्मिक महत्व आदि काल से लेकिन हमारा मानना है कि इसका चिकित्सीय महत्व भी किसी प्रकार से कम नहीं है। हाँ, हमारे पूर्वज, ऋषि, मनीषी बहुत दूरदृष्टिता वाले थे,उन्होंने वैज्ञनिक व चिकित्सीय लाभों का फॉलो अप कराने के लिए उन्हें धर्म के नैत्यिक प्रयोग से जोड़ा था। यदि आज हर घर में शंख बजाया जाता तो मसलन शंख बजाने से फेफड़े फूल जाते हैं, यानी कि पर्याप्त ऑक्सीजन बनने लगता है।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव रिपोर्ट आवाज इंडिया लाइव फिरोजाबाद

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