हरदोई उत्तर प्रदेश की राजनीति में किंग मेकर के तौर पर पहचाने जाने वाले पूर्व सांसद और मंत्री नरेश अग्रवाल अपनी सीट को बरकरार रखने में 11 वीं बार फिर सफल रहे

अनूप कटियार हरदोई रिपोर्ट
हरदोई।उत्तर प्रदेश की राजनीति में किंग मेकर के तौर पर पहचाने जाने वाले पूर्व सांसद और मंत्री नरेश अग्रवाल अपनी सीट को बरकरार रखने में 11 वीं बार फिर सफल रहे,बीते 45 साल से इस सीट पर उनके परिवार का कब्जा है। इस बार वह अपने बेटे नितिन अग्रवाल को इस सीट से तीसरी बार चुनाव जीता कर इतिहास रच दिया हैं
नरेश अग्रवाल ने कांग्रेस में अपना करियर शुरू किया और 1997 में कांग्रेस को विभाजित होने के बाद कल्याण सिंह सरकार में मंत्री बने। वह बसपा और फिर सपा में चले गए।
उनके बेटे नितिन अग्रवाल ने 2012 में अपनी राजनीतिक शुरूआत की और तब से दो बार हरदोई सीट जीत चुके हैं। नितिन 2017 में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। ,नितिन ने इस सीट पर हैट्रिक लगाई, चुनावी चक्रव्यूह में उनके पिता नरेश अग्रवाल ने उनका बखूबी मार्गदर्शन किया,बीजेपी कभी ये सीट जीती नही थी इस बार नरेश अग्रवाल के जरिये सदर सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की, 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने हरदोई से आठ सीटों में से सात विधानसभा सीटे जीत ली थी लेकिन सदर सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इस बार 2022 के चुनाव में आठो विधानसभा सभाओं पर बीजेपी का कब्जा हो गया विपक्ष का सूफड़ा साफ हो गया, नितिन अग्रवाल को 1 लाख 25 हजार 785 वोट मिले वही सपा प्रत्याशी अनिल वर्मा को 82 हजार 637 वोट मिले,नितिन अग्रवाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अनिल वर्मा को 43 हजार 148 वोटो से बड़े अंतर से हराते हुए रेस से बाहर निकाला,अनिल वर्मा ने मीडिया के माध्यम से बयान दिया था की वो कभी चुनाव नही हारे इस बार वो सदर का इतिहास बदलेगें जिस नरेश अग्रवाल को कभी कोई नही हरा पाया उसे अनिल वर्मा डंके की चोट पर हराने आये थे बिना किसी उपलब्धि बगैर किसी काम के लेकिन जनता ने एक फिर नरेश अग्रवाल का भरोसा कायम रखा उनका साथ दिया,अनिल वर्मा को एजेंट और ठेकेदारो के बल पर नरेश अग्रवाल को चुनाव हराने का सपना देख बैठे थे, वही बसपा के प्रत्याशी जो इतने बड़े बोल रहे थे उनका तो दूर दूर तक कोई अता पता नही चला, मतदान के बाद जनता उनकी तलाश करती रही
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