फिरोजाबाद : . *” ऋषि दधिची “*

पंडित श्याम शर्मा मंडल प्रभारी
*═══❀((“ॐ”))❀═══*
*🕉️ दधिची ऋषि ने धर्म की रक्षा के लिए अस्थि दान किया था !*
*उनकी अस्थियों से तीन धनुष बने-*
*१. गांडीव धनुष , २. पिनाक धनुष ३. सारंग धनुष !*
*🔆 जिसमे से गांडीव धनुष अर्जुन को मिला था जिसके बल पर अर्जुन ने महाभारत का युद्ध जीता !*
*🔆सारंग धनुष से भगवान राम ने युद्ध किया था और रावण के अत्याचारी राज्य को ध्वस्त किया था !*
*🔆 पिनाक धनुष था भगवान शिव जी के पास जिसे तपस्या के माध्यम से खुश भगवान शिव से रावण ने मांग लिया था !*
*🔆 परन्तु… वह उसका भार लम्बे समय तक नहीं उठा पाने के कारण बीच रास्ते में जनकपुरी में छोड़ आया था !*
*🔆 इसी पिनाक धनुष की नित्य सेवा माता सीताजी किया करते थे! पिनाक धनुष का भंजन करके ही भगवान राम ने माता सीता जी का वरण किया था !*
*🔆 ब्रह्मर्षि दधिची की अस्थियों से ही “एकघ्नी नामक वज्र” भी बना था … जो देवर्षि इंद्र को प्राप्त हुआ था !*
*🔆 इस एकघ्नी वज्र को इन्द्र ने कर्ण की तपस्या से खुश होकर उन्होंने कर्ण को दे दिया था!*
*🔆 इसी एकघ्नी से महाभारत के युद्ध में भीम का महाप्रतापी पुत्र घटोत्कच कर्ण के हाथों मारा गया था !*
*🔆 और भी कई अश्त्र-शस्त्रों का निर्माण हुआ था उनकी अस्थियों से ! दधिची ऋषि के इस अस्थि-दान का एक मात्र संदेश था*
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*♦️ ” हे भारतीय वीरो शस्त्र उठाओ और अन्याय , अधर्म तथा अत्याचार के विरुद्ध युद्ध करो !”*
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*” सनातन धर्म की जय हो “🚩*
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