मधेपुरा : *सावन* *महोत्सव*: *झिझिया* *गीत* *सुनाकर* *जीता* *दिल*


________________कविता कुमारी_________प्रांगण रंगमंच द्वारा आयोजित एकदिवसीय सावन महोत्सव में इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष की छात्रा सह गायिका मधुबाला भारती ने बिखेरा अपने सुरों का जादू। उन्होंने देशभक्ति गीत सहित कई सुप्रसिद्ध लोकगीत भी अलग अलग भाषाओं जैसे हिन्दी, मैथिली, बंगला, मराठी, अवधि, भोजपुरी में गाए। उन्होंने सबसे पहले “ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन” गाकर सबकी आंखें नम कर दीं। उसके बाद उन्होंने भोजपुरी लोकगीत “लुक छिप बदरा में चमके जैसे चंदवा, मोरा मुख दमके” गाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। अंत में उन्होंने बिहार के सुप्रसिद्ध लोकगीत झिझिया की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी।उनके साथ जो संगतकार थे वह भी बखूबी उनका साथ दे रहे थे जिनमेंकी हारमोनियम पर रौशन कुमार, पेड पर संतोष राजा जी, तबला पर दीपू शर्मा व मुकेश कुमार, नाल पर विनोद केशरी थे। आशीष कुमार सत्यार्थी और शिवानी अग्रवाल ने मंच संचालन किया। मालूम हो कि भेलाही ग्राम की रहने वाली मधुबाला न केवल संगीत बल्कि नृत्य में भी उतनी हीं निपुण हैं। साथ हीं उन्हें कई भाषाओं का भी ज्ञान है। मधुबाला ने संगीत की शिक्षा अपने पिता बिजेंद्र प्रसाद एवं प्रोफेसर नरेंद्र प्रसाद से ली हैं। मधुबाला कई बार अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता की विजेता भी रह चुकीं हैं। आयोजक सह अध्यक्ष श्री संजय परमार ने उन्हें प्रांगण के मंच पर सम्मानित किया और धन्यवाद कहते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें सुभकामनाएं दीं।
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