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सुपौल : बिहार में बाहर बा। नीतीश बाबू की सरकार बा। पदाधिकारी एवं ठेकेदार के हो रहल खेल बा।

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रिपोर्ट:-बलराम कुमार सुपौल बिहार।

एंकर:-मामला सुपौल जिला के बीरपुर अनुमंडलीय मुख्यालय अंतर्गत चम्पानगर पंचायत के मतनाजा वार्ड नं0-12-में मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना की है।
एक तरफ सरकार जनता की सुविधा के लिए करोड़ों अरबों रुपए खर्च कर सड़क बनवाती है।
तो वहीं दूसरी तरफ पदाधिकारियों एवं ठेकेदारों की वजह से जनता परेशानियां झेल रही है।
आए दिन कई जगहों पर देखा गया है की सड़क योजना में पदाधिकारियों एवं ठेकेदारों की मनमानी से जनता काफी आहत होती आ रही है।
क्योंकि ठेकेदारों एवं पदाधिकारियों की मिली भगत से जनता का कोई सुनने वाला नहीं मिलता है।
अगर जनता कहीं हो रही गलती पर आवाज उठाती है।
तो कुछ जनता को न्याय मिल जाती है।
लेकिन कुछ ऐसे जनता भी हैं जिसे न्याय नहीं मिल पाता है।
क्योंकि पदाधिकारी एवं ठेकेदारों की मिली भगत से बात को दबा दिया जाता है।
जनता को बाद में न्याय नहीं मिलने पर थक हार कर परेशानी के वजह से घर बैठना पड़ता है।
ताजा मामला चम्पानगर पंचायत के मतनाजा वार्ड नं0-11-में देखा जा रहा है।
जनता ने बताया की हमलोगों की बस्ती में हज्जारों की जनसंख्या में लोग रहते हैं।
आज भी हमलोग कच्ची सड़क होकर लगे पानी कीचड़ होकर गुजरते हैं।
बारिस के समय में अगर कोई बीमार पड़ जाए तो काफ़ी परेशानी झेलनी पड़ती है।
सड़क पर बने गढ़े में पानी लगा रहने से कींचड़ में वाहन फंस जाने की वजह से बस्ती तक नहीं जा पाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है की हमलोगों की बस्ती का जो सड़क है वो पूर्व में हीं पदाधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण कर मापी कर ले गए।
बाद मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना के तहत सड़क निर्माण करने की मंजूरी भी मिल गई।
योजना में भाया राम टोला से लेकर मतनाजा तक सड़क बननी थी।
लेकिन ठेकेदारों एवं पदाधिकारियों द्वारा मनमानी करते हुए बेंगा नदी से पूरब सटे बस्ती की सड़क नहीं बनाकर धार से पश्चिम जाकर सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है।
जो सरासर गलत है।
जहां अभी सड़क बनाया जा रहा है वहां एक भी बस्ती का घर नहीं है।
वहां पर सिर्फ खेती होती है या फिर लोग गाय भैंस चराते हैं।
ग्रामीणों ने बताया की इस योजना के बारे में जानकारी तब मिली जब ठेकेदारों द्वारा बेंगा नदी से पश्चिम करीब चार महीनों से सड़क बनाया जा रहा था लेकिन योजना बोर्ड नहीं लगा था।
करीब-75% सड़क का कार्य हो जाने के बाद जब योजना बोर्ड लगाया तब जाके पता चला की ये मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना हमलोगों के बस्ती पर जाने वाला सड़क का योजना है।
जो ठेकेदारों एवं पदाधिकारियों की गलती के कारण पलार पर सड़क बनाया जा रहा है।
जिस सड़क की अभी जरूरत नहीं है।
यही सड़क बस्ती में जाकर बनता तो आज हज्जारों की संख्या में रह रहे लोगों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।
वहीं मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना के स्कूटी से दुरभाष -8986915453,- पर सम्पर्क कर योजना के बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने विभागीय जेई मुरारी जी पर ठीकरा फोरते हुए उनका दुरभाष नम्बर-8877647889- देते हुए बताया की इस बात की जानकारी उनसे ले लें।
बाद जेई मुरारी जी से दुरभाष पर सम्पर्क कर इस योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने गोल मटोल बातें करने लगा।
साथ हीं बताया की वहां भी सड़क बाद में बनेगी।
इसी सड़क को बेंगा नदी से जोड़ते हुए नदी में पुल बनाकर बस्ती से जोड़ देने की बात बताई।
वहीं सनशाइन बिल्डिंग कॉन्ट्रेक्टर प्रोप्राइटर अजय कुमार, से बात करने के बारे में बताया गया।
इससे साफ जाहिर होता है की एक पदाधिकारी दूसरे पदाधिकारी पर ठीकरा फोरने से बाज नहीं आते हैं।
अंदाजा लगाया जा सकता है की पदाधिकारी अपने कार्य के प्रति कितने सजग दिख रहे हैं।
आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है।
गलती ठेकेदार एवं पदाधिकारी करते हैं।
परेशानी जनता को झेलनी पड़ती है।
लेकिन जनता सरकार को दोषी ठहराती है।
जनता तो यही कहती है की ये गलती नहीं है।
सारा किया धरा सरकार की है।
जनता ठेकेदार या पदाधिकारी को नहीं जानती है।
जानती है तो सिर्फ सरकार को गलती कोई और करता है।
लेकिन उंगली सरकार पड़ उठती है।
आखिर सरकार हो रही गलती पर कब तक नकेल कसने कामयाब होती है।
अब देखना लाजमी होगा की सुशासन बाबू की सरकार में गलती कर रहे ठेकेदारों एवं पदाधिकारियों पर कब तक ओर क्या कार्यवाही करती है।
जनता का सवाल है की आखिर गुनाहगार कोन।
गलती किसकी ठेकेदारों की या पदाधिकारी, या फिर सरकार की।

बाईट:-पीड़ित ग्रामीण।

anupam

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