अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की मांग तेज, बार एसोसिएशन ने डीएम के जरिए राष्ट्रपति को भेजा 14 सूत्रीय ज्ञापन
अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की मांग तेज, बार एसोसिएशन ने डीएम के जरिए राष्ट्रपति को भेजा 14 सूत्रीय ज्ञापन

बांदा: अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की मांग तेज, बार एसोसिएशन ने डीएम के जरिए राष्ट्रपति को भेजा 14 सूत्रीय ज्ञापन
योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी बांदा 
कॉलेजियम सिस्टम पर रोक और न्यायिक जवाबदेही कानून लाने की भी उठी जोरदार मांग, जानें अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
बांदा:
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अधिवक्ताओं ने अपनी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर हुंकार भर दी है। बांदा जिला अधिवक्ता संघ ने ‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’ (Advocate Protection Act) को तत्काल लागू करने और ‘न्यायिक जवाबदेही कानून’ लाने की मांग करते हुए एक 14 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को भेजा है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल कुमार सिंह और महासचिव राजेश कुमार त्रिपाठी ‘सोनू’ के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने यह ज्ञापन सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि बीते 14 और 16 सितंबर को आयोजित बार एसोसिएशन की आमसभा में इन ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी, जिसके बाद सर्वसम्मति से यह 14 सूत्रीय प्रस्ताव पास किया गया।
राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में शामिल हैं ये प्रमुख 14 मांगें:
सुरक्षा कानून: यूपी में अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम का प्रारूप जल्द से जल्द लागू किया जाए।
अंडरटेकिंग का विरोध: अधिवक्ताओं पर हड़ताल न करने की ‘अंडरटेकिंग’ (लिखित सहमति) देने के दबाव का कड़ा विरोध किया जाए।
न्यायिक जवाबदेही: संसद में ‘न्यायिक जवाबदेही अधिनियम’ लाया जाए।
कॉलेजियम सिस्टम: जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा ‘कॉलेजियम सिस्टम’ पर तत्काल प्रभाव से रोक लगे और ‘न्यायिक नियुक्ति आयोग’ का गठन हो।
टोल टैक्स छूट: पूरे देश/प्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए टोल टैक्स पूरी तरह माफ किया जाए।
आयोग की रिपोर्ट: बहुप्रतीक्षित ‘जसवंत सिंह आयोग’ की रिपोर्ट लागू की जाए।
भत्ता व्यवस्था: नए और युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन भत्ता तथा 70 वर्ष की आयु पूरी कर चुके वरिष्ठ वकीलों को सम्मानजनक मानक भत्ता दिया जाए।
कल्याण निधि: अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की जाए।
बैठने की व्यवस्था: प्रदेश के सभी न्यायिक परिसरों में अधिवक्ताओं के बैठने की समुचित व्यवस्था के लिए सरकार अलग से बजट का प्रावधान करे।
गोरखपुर घटना पर मुआवजा: गोरखपुर में मृत दो अधिवक्ताओं के शोक संतप्त परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
चुनाव नियम: बार काउंसिल चुनाव में पदाधिकारियों के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा तय की जाए।
दीवानी न्यायालय के अधिकार: यूपी रेंट कंट्रोल एक्ट (UP Rent Control Act) से जुड़े मामले सुनने का अधिकार एक बार फिर से दीवानी न्यायालयों को वापस दिया जाए।
(अन्य दो स्थानीय और विभागीय मांगें भी ज्ञापन का हिस्सा हैं।)
सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील
ज्ञापन सौंपते हुए बांदा बार एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार से इन सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि न्याय प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने और अधिवक्ताओं की सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करने के लिए इन मांगों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई होना अत्यंत आवश्यक है।
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