8 दिन बाद झुका प्रशासन, शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन जूस पिलाकर कराया गया समाप्त।
8 दिन बाद झुका प्रशासन, शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन जूस पिलाकर कराया गया समाप्त।

बांदा: 8 दिन बाद झुका प्रशासन, शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन जूस पिलाकर कराया गया समाप्त।
योगेन्द्र प्रताप सिंह प्रभारी बांदा 
बांदा। स्वास्थ्य सेवाओं में बदहाली और जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर पिछले आठ दिनों से चल रहा शालिनी सिंह पटेल का आमरण अनशन आखिरकार जिला प्रशासन के ठोस आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। आठवें दिन प्रशासन और अनशनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद अधिकारियों ने जूस पिलाकर शालिनी सिंह पटेल का अनशन तुड़वाया।
डीएम कार्यालय के घेराव के बाद हरकत में आया प्रशासन
जानकारी के अनुसार, अनशन के आठवें दिन तक जब कोई प्रशासनिक अधिकारी अनशन स्थल पर नहीं पहुंचा, तो जनता दल (यूनाइटेड) महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष पिंकी प्रजापति के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं, कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय का घेराव कर दिया। घंटों चले इस जोरदार विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी (बांदा), मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, सीओ सिटी और उपजिलाधिकारी सहित कई आला अधिकारी अनशन स्थल पर पहुंचे।
इन प्रमुख मांगों पर बनी सहमति:
अधिकारियों और शालिनी सिंह पटेल के बीच हुई लंबी वार्ता में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी:
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था: मेडिकल कॉलेज की बदहाल व्यवस्थाओं को 7 दिनों के भीतर दुरुस्त करने का आश्वासन दिया गया।
300 बेड का अस्पताल: 300 बेड वाले मंडलीय अस्पताल में आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति कर उसे 4 महीने के भीतर पूरी तरह से चालू करने का समय मांगा गया है।
कोरोना योद्धाओं की बहाली: कोरोना काल में सेवाएं देने वाले और बाद में हटाए गए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को पुनः ड्यूटी पर जॉइन कराने का सीएमओ ने आश्वासन दिया।
दिव्यांगजनों के लिए सुविधा: अस्पताल में दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए एक अलग काउंटर बनाए जाने की मांग भी मान ली गई है।
“यह मेरा नहीं, बांदा की जनता का संघर्ष था”
आश्वासन मिलने के बाद जूस पीकर अनशन समाप्त करने वालीं शालिनी सिंह पटेल समर्थकों का प्यार देखकर भावुक हो गईं। उन्होंने इस आंदोलन में दिन-रात साथ खड़े रहने वाले साथियों का आभार जताया।
शालिनी ने विशेष रूप से दृष्टिबाधित दिव्यांग साथी बिहारीलाल अनुरागी (जिन्होंने टेंट और माइक की व्यवस्था संभाली), रविंद्र गुप्ता, पिंकी प्रजापति, ज्योति मौर्या, रामप्यारी, और अपने वाहन चालक धर्मेंद्र की मेहनत को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व जिलाध्यक्ष उमाकांत सविता, जुगुल पटेल, प्रेम सागर दीक्षित सहित उन तमाम नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम जनता का धन्यवाद किया जो 24 से 28 सितंबर के बीच अनशन स्थल पर समर्थन देने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा, “यह संघर्ष मेरा अकेले का नहीं था, यह बांदा की जनता और जनहित की आवाज का संघर्ष था। जनता के प्यार, विश्वास और आशीर्वाद ने ही मुझे आठ दिनों तक मजबूती से डटे रहने की शक्ति दी।”।
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