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सुपौल : स्वास्थ्य उपकेंद्र बसुली की बदहाली। गोशाला के साथ जंगल में तब्दील।

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रिपोर्ट:-बलराम कुमार सुपौल बिहार।

एंकर:-मामला सुपौल जिला के पिपरा थानाक्षेत्र अन्तर्गत दुब्याही पंचायत स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र वसूली की है। ग्रामीणों ने बताया की स्वास्थ्य उपकेंद्र वसूली, का निर्माण वर्षों पूर्व हीं हुआ है।
तब से अभी तक यहाँ पर एक भी डॉक्टर नहीं आते हैं।
ना हीं एएनएम रहती है।
जबकि मेडिकल स्टाफ के लिए स्थायी आवास भी बना हुआ है। कोरोना जैसे महामारी में भी डॉक्टर नहीं आते हैं।
नाही नर्स रहती है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई वर्ष पूर्व में डॉक्टर आते थे,नर्स भी आती थी, लेकिन वर्षों बीतने को चला है।
लेकिन अब एक भी डॉक्टर नहीं आते हैं।
नर्स भी कभी कभार आती है।
पोलियो की दवा आदि देकर एक आध घंटे में चली जाती है।
यहाँ से डिलीवरी हो या अन्य बीमारी का इलाज कराने के लिए सात किलोमीटर दूर पिपरा पीएचसी जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए बताया की हम गरीब लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह है की पिपरा जाने वाली सड़क की ऐसी स्थिति बनी हुई है कि पिपरा जाते वक्त गर्भवती महिला को रास्ते में ही प्रसव हो जाता है।
स्वास्थ्य समिति में भी जो रुपया आता है वह खर्च होता भी है या नहीं कोई देखने वाला नहीं है।
यहाँ एक सोलर लाइट लगी हुई थी उसे भी नर्स यहाँ से लेकर चली गई।
डॉक्टर एवं नर्स के नहीं रहने से स्वास्थ्य उपकेन्द्र में गंदगी का अंबार लगा रहता है।
काफी जंगल भी उग आए है।
जिसमें विषैले सांपों का बसेरा हो गया है।
कुछ लोगों ने स्थायी मवेशी,बकरी,का आशियाना बना लिया है।
यहाँ हमेशा ताला लगा रहता है।
इसमें दो कमरे का ताला तो आजतक कभी खुला ही नहीं।
जिसे अब जंग भी खा चुका है।
बतादें कि एक ए एन एम की स्थायी
आवासीय पोस्टिंग भी है।
साथ हीं एक डॉक्टर की भी जो सप्ताह में कम -से-कम दो दिन या एक दिन रहना अनिवार्य है।
लेकिन इसमें बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या ग्रामीणों की बदकिस्मती।
पता हीं नहीं चलता।
सारा खाना पूर्ति कागज पर हीं हो जाता है।
अब देखना लाजमी होगा की सुशासन बाबू की सरकार में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली में कब सुधार आती है।
या फिर ऐसे हीं स्वास्थ्य विभाग की बदहाली का खामियाजना ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा।

बाईट:-ग्रामीण।

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