April 22, 2021

फिरोजाबाद : अप्रैल माह 2021🌞 प्रमुख व्रत एवं त्योहार*📯

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फिरोजाबाद

पंडित श्याम शर्मा मंडल प्रभारी

*हिंदू पंचांग का अगला माह चैत्र मास है। जो होली के दिन से शुरू हो जाता है। चैत्र माह हिंदू धर्म के लिए काफी खास होता है क्योंकि इस माह नवरात्र और राम नवमी पड़ती है। अप्रैल माह में शीतला अष्टमी, पापमोचिनी एकादशी, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, राम नवमी आदि महत्वपूर्ण त्योहार पड़ने वाले है।*

*2 अप्रैल, शुक्रवार:*  रंग पंचमी

*3 अप्रैल शनिवार :* एकनाथ षष्ठी

*04 अप्रैल: शीतला अष्टमी*- शीतला अष्टमी  हिन्दु ओं का एक त्योहार है जिसमें शीतला माता के व्रत और पूजन किये जाते हैं.

*07 अप्रैल: पापमोचिनी एकादशी-* पुराणों के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पाप मोचिनी है अर्थात पाप को नष्ट करने वाली.

*09 अप्रैल: प्रदोष व्रत, वारुणी योग, हिंगलाज माता जयंती* ,-मान्यता है कि प्रदोष के समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में इस समय नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं. जो भी लोग अपना कल्याण चाहते हों यह व्रत रख सकते हैं. प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है.

*10 अप्रैल: मासिक शिवरात्रि*- मासिक शिवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाएगी. मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

*11 अप्रैल, रविवार:  श्राद्ध अमावस्या।*

*12 अप्रैल, सोमवार: सोमवती अमावस्या ,  हरिद्वार कुंभ मेला शाही स्नान*

*13 अप्रैल: घटस्थापना, चैत्र नवरात्रि प्रारंभ- होली के बाद हिन्दू धर्म का एक मुख्य त्योहार आने वाला है और यह त्योहार चैत्र नवरात्रि  है. मां नवदुर्गे का यह त्योहार बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है. नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है. 🚩इसी दिन गुड़ी पड़वा और नया विक्रम संवत् 2078 शुरू होगा।🚩*

*14 अप्रैल:  चेटी चंड, मेष संक्रांति, बैशाखी, शाही स्नान, खरमास -* वैसाखी एक ऐसा त्योहार है जो मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा के साथ उत्तरी भारत में मनाया जाता है.

*15 अप्रैल गुरुवार सौभाग्य सुंदरी व्रत, मनोरथ तृतीया, गणगोर तीज*

*16 अप्रैल: विनायक चतुर्थी*- शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं.

*21 अप्रैल: राम नवमी*- रामनवमी हिन्दू धर्म का एक पावन पर्व है. यह त्योहार भगवान श्रीराम को समर्पित है. इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ था.

*22 अप्रैल: चैत्र नवरात्रि पारण*- चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण 22 अप्रैल गुरुवार को किया जाएगा. इस दिन विधि पूर्वक व्रत का पारण करना चाहिए.

*23 अप्रैल: कामदा एकादशी*- इस दिन पाप से मुक्ति के लिए उपवास रखा जाता है. दरअसल चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कामदा एकादशी कहते हैं.

*24 अप्रैल: शनि प्रदोष-* शनि को मनाने के लिए शनि प्रदोष व्रत बहुत फलदायी है. यह व्रत करने वाले पर शनिदेव की असीम कृपा होती है. शनि प्रदोष व्रत शनि के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए उत्तम होता है. यह व्रत करने वाले को शनि प्रदोष के दिन प्रात:काल में भगवान शिवशंकर की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, तत्पश्चात शनिदेव का पूजन करना चाहिए.

*25 अप्रैल, रविवार: महावीर जयंती*

*26 अप्रैल: चैत्र पूर्णिमा-* इस दिन उपवास रखा जाता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार यह चैत्र माह की अंतिम तिथि होती है. चंद्रमा इस दिन अपने पूर्ण रूप में होता है.

*27 अप्रैल, मंगलवार: चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जयंती व्रत, हरिद्वार चतुर्थ शाही स्नान*

*28 अप्रैल बुधवार : आसों दोज, कच्छपावतार, पोडषकारण व्रत पूर्ण आशा द्वितीया, वैशाख स्ना. प्रा.*

*30 अप्रैल 2021 संकष्टी चतुर्थी*

*🔥चैत्र नवरात्रि 2021🔥*

*🎈हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. वैसे तो साल में नवरात्रि 4 बार आती है लेकिन इनमें से 2 नवरात्रि गुप्त नवरात्रि  होती है जो माघ महीने में और आषाढ़ महीने में आती है. तो वहीं बाकी 2 नवरात्रि यानी चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का महत्व सबसे अधिक होता है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की आराधना की जाती है. चैत्र नवरात्रि का महत्व इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि हिंदू पंचांग  के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से हिंदू नव वर्ष यानी कि नव सम्वत्सर की शुरुआत होती है.*

*पंचांग के अनुसार नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 13 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस दिन चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. इस दिन अश्विनी नक्षत्र और विश्कुंभ योग बन रहा है. इसी दिन घटस्थापना की जाएगी. चैत्र नवरात्रि का समापन 22 अप्रैल 2021 को किया जाएगा.*

*🌞चैत्र नवरात्रि शुभ मुहूर्त*

*चैत्र घटस्थापना मंगलवार, अप्रैल 13, 2021 को*

घटस्थापना मुहूर्त – 05:58 ए एम से 10:14 ए एम
अवधि – 04 घण्टे 16 मिनट्स

घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
अवधि – 00 घण्टे 51 मिनट्स

*घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है.*

*प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ –* अप्रैल 12, 2021 को 08:00 ए एम बजे

*प्रतिपदा तिथि समाप्त –* अप्रैल 13, 2021 को 10:16 ए एम बजे

*🌹चैत्र नवरात्रि की तिथियां* 🌹

*पहला दिन- 13 अप्रैल 2021- शैलपुत्री*

*दूसरा दिन- 14 अप्रैल 2021- ब्रह्मचारिणी*

*तीसरा दिन- 15 अप्रैल 2021- चंद्रघंटा*

*चौथा दिन- 16 अप्रैल 2021- कूष्मांडा*

*पांचवां दिन- 17 अप्रैल 2021- स्कंदमाता*

*छठा दिन- 18 अप्रैल 2021- कात्यायनी*

*सातवां दिन- 19 अप्रैल 2021- कालरात्रि*

*आठवां दिन- 20 अप्रैल 2021- महागौरी , दुर्गा अष्टमी, महाष्टमी*

*नौवां दिन- 21 अप्रैल 2021- सिद्धिदात्री , नवमी हवन*

*🙏चैत्र महीने में सूर्य और देवी की उपासना लाभदायक होती है. नाम यश और पद प्रतिष्ठा के लिए सूर्य की उपासना करें. शक्ति और ऊर्जा के लिए देवी की उपासना करें.*
[06/04, 12:10 PM] Savitanandmishra: अक्षौहिणी सेना….
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अक्षौहिणी प्राचीन भारत में सेना का माप हुआ करता था जिसका संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है। किसी भी अक्षौहिणी सेना के चार विभाग होते थे:
गज (हाँथी सवार)
रथ (रथी)
घोड़े (घुड़सवार)
सैनिक (पैदल सिपाही)
इसके प्रत्येक भाग की संख्या के अंकों का कुल जमा १८ आता है। एक घोडे पर एक सवार बैठा होगा, हाथी पर कम से कम दो व्यक्तियों का होना आवश्यक है, एक पीलवान और दूसरा लडने वाला योद्धा। इसी प्रकार एक रथ में दो मनुष्य और चार घोडे रहे होंगें।
एक अक्षौहिणी सेना ९ भागों में बटी होती थी:
पत्ती: १ गज + १ रथ + ३ घोड़े + ५ पैदल सिपाही
सेनामुख (3 x पत्ती): ३ गज + ३ रथ + ९ घोड़े + १५ पैदल सिपाही
गुल्म (3 x सेनामुख): ९ गज + ९ रथ + २७ घोड़े + ४५ पैदल सिपाही
गण (3 x गुल्म): २७ गज + २७ रथ + ८१ घोड़े + १३५ पैदल सिपाही
वाहिनी (3 x गण): ८१ गज + ८१ रथ + २४३ घोड़े + ४०५ पैदल सिपाही
पृतना (3 x वाहिनी): २४३ गज + २४३ रथ + ७२९ घोड़े + १२१५ पैदल सिपाही
चमू (3 x पृतना): ७२९ गज + ७२९ रथ + २१८७ घोड़े + ३६४५ पैदल सिपाही
अनीकिनी (3 x चमू): २१८७ गज + २१८७ रथ + ६५६१ घोड़े + १०९३५ पैदल सिपाही
अक्षौहिणी (10 x अनीकिनी): २१८७० गज + २१८७० रथ + ६५६१० घोड़े + १०९३५० पैदल सिपाही
इस प्रकार एक अक्षौहिणी सेना में गज, रथ, घुड़सवार तथा सिपाही की सेना निम्नलिखित होती थी:
गज: २१८७०
रथ: २१८७०
घुड़सवार: ६५६१०
पैदल सिपाही: १०९३५०
इसमें चारों अंगों के २१८७०० सैनिक बराबर-बराबर बंटे हुए होते थे। प्रत्येक इकाई का एक प्रमुख होता था।
पत्ती, सेनामुख, गुल्म और गण के नायक सामान्यतः एक अर्धरथी हुआ करता था।
वाहिनी, पृतना और चमु के नायक सामान्यतः एक रथी हुआ करता था।
अनीकिनी का संचालन सामान्यतः एक अतिरथी करता था।
एक अक्षौहिणी सेना की कमान सामान्यतः एक महारथी के हाथ में होती थी।
एक से अधिक अक्षौहिणी सेना का नायक कोई बहुत ही उत्कृष्ट योद्धा होता था, जो महारथी के भी ऊपर का योद्धा होता था। जैसे भीष्म, अर्जुन और कर्ण।
पांडवों के पास (७ अक्षौहिणी सेना):
१५३०९० रथ
१५३०९० गज
४५९२७० अश्व
७६५२७० पैदल सैनिक
कौरवों के पास (११ अक्षौहिणी सेना):
२४०५७० रथ
२४०५७० गज
७२१७१० घोड़े
१२०२८५० पैदल सैनिक
इस प्रकार महाभारत की सेना के मनुष्यों की संख्या कम से कम ४६८१९२०, घोडों की संख्या (रथ में जुते हुओं को लगा कर) कम से कम २७१५६२० और इसी अनुपात में गजों की संख्या थी। इससे आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं कि महाभारत का युद्ध कितना विनाशकारी था।

– साभार
[06/04, 12:10 PM] Savitanandmishra: एकादशी विशेष
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संस्कृत शब्द एकादशी का शाब्दिक अर्थ ग्यारह होता है। एकादशी पंद्रह दिवसीय पक्ष (चन्द्र मास) के ग्यारहवें दिन आती है। एक चन्द्र मास (शुक्ल पक्ष) में चन्द्रमा अमावस्या से बढ़कर पूर्णिमा तक जाता है, और उसके अगले पक्ष में (कृष्ण पक्ष) वह पूर्णिमा के पूर्ण चन्द्र से घटते हुए अमावस्या तक जाता है। इसलिए हर कैलंडर महीने (सूर्या) में एकादशी दो बार आती है, शुक्ल एकादशी जो कि बढ़ते हुए चन्द्रमा के ग्यारहवें दिन आती है, और कृष्ण एकादशी जो कि घटते हुए चन्द्रमा के ग्यारहवें दिन आती हैं। ऐसा निर्देश हैं कि हर वैष्णव को एकादशी के दिन व्रत करना चाहिये, इस प्रकार की गई तपस्या भक्तिमयी जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

एकादशी का उद्गम
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पद्मा पुराण के चतुर्दश अध्याय में, क्रिया-सागर सार नामक भाग में, श्रील व्यासदेव एकादशी के उद्गम की व्याख्या जैमिनी ऋषि को इस प्रकार करते हैं :

इस भौतिक जगत् की उत्पत्ति के समय, परम पुरुष भगवान् ने, पापियों को दण्डित करने के लिए पाप का मूर्तिमान रूप लिए एक व्यक्तित्व की रचना की (पापपुरुष)। इस व्यक्ति के चारों हाथ पाँव की रचना अनेकों पाप-कर्मों से की गयी थी। इस पापपुरुष को नियंत्रित करने के लिए यमराज की उत्पत्ति अनेकों नरकीय ग्रह प्रणालियों की रचना के साथ हुई। वे जीवात्माएं जो अत्यंत पापी होती हैं, उन्हें मृत्युपर्यंत यमराज के पास भेज दिया जाता है, यमराज ,जीव को उसके पापों के भोगों के अनुसार नरक में पीड़ित होने के लिए भेज देते हैं।

इस प्रकार जीवात्मा अपने कर्मों के अनुसार सुख और दुःख भोगने लगी। इतने सारी जीवात्माओं को नरकों में कष्ट भोगते देख परम कृपालु भगवान् को उनके लिए बुरा लगने लगा। उनकी सहायतावश भगवान् ने अपने स्वयं के स्वरुप से, पाक्षिक एकादशी के रूप को अवतरित किया। इस कारण, एकादशी एक चन्द्र पक्ष के पन्द्रवें दिन उपवास करने के व्रत का ही व्यक्तिकरण है। इस कारण एकादशी और भगवान् श्री विष्णु अभिन्न नहीं हैं। श्रीएकादशी व्रत अत्यधिक पुण्य कर्म हैं, जो कि हर लिए गए संकल्पों में शीर्ष स्थान पर स्थित है।

तदुपरांत विभिन्न पाप कर्मी जीवात्माएं एकादशी व्रत का नियम पालन करने लगीं और उस कारण उन्हें तुरंत ही वैकुण्ठ-धाम की प्राप्ति होने लगी। श्रीएकादशी के पालन से हुए अधिरोहण से , पापपुरुष (पाप का मूर्तिमान स्वरुप) को धीरे धीरे दृश्य होने लगा कि अब उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ने लगा है। वह भगवान् श्रीविष्णु के पास प्रार्थना करते हुए पहुँचा, “हे प्रभु, मैं आपके द्वारा निर्मित आपकी ही कृति हूँ और मेरे माध्यम से ही आप घोर पाप कर्मों वाले जीवों को अपनी इच्छा से पीड़ित करते हैं। परन्तु अब श्रीएकादशी के प्रभाव से अब मेरा ह्रास हो रहा है। आप कृपा करके मेरी रक्षा एकादशी के भय से करें। कोई भी पुण्य कर्म मुझे नहीं बाँध सकता है, परन्तु आपके ही स्वरुप में एकादशी मुझे प्रतिरोधित कर रही है। मुझे ऐसा कोई स्थान ज्ञात नहीं जहाँ मैं श्रीएकादशी के भय से मुक्त रह सकूं। हे मेरे स्वामी! मैं आपकी ही कृति से उत्पन्न हूँ, इसलिए कृपा करके मुझे ऐसे स्थान का पता बताईये जहाँ मैं निर्भीक होकर निवास कर सकूँ।”

तदुपरांत, पापपुरुष की स्थिति पर अवलोकन करते हुए श्रीभगवान् विष्णु ने कहा, “हे पापपुरुष! उठो! अब और शोकाकुल मत हो। केवल सुनो, और मैं तुम्हे बताता हूँ कि तुम एकादशी के पवित्र दिन पर कहाँ निवास कर सकते हो। एकादशी का दिन जो त्रिलोक में लाभ देने वाला है, उस दिन तुम अन्न जैसे खाद्य पदार्थ की शरण में जा सकते हो। अब तुम्हारे पास शोकाकुल होने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि मेरे ही स्वरुप में श्रीएकादशी देवी अब तुम्हे अवरोधित नहीं करेगी।” पापपुरुष को आश्वाशन देने के बाद भगवान् श्रीविष्णु अंतर्ध्यान हो गए और पापपुरुष पुनः अपने कर्मों को पूरा करने में लग गया। भगवान विष्णु के इस निर्देश के अनुसार, संसार भर में जितने भी पाप कर्म पाए जा सकते हैं वे सब इन खाद्य पदार्थ (अनाज) में निवास करते हैं। इसलिए वे मनुष्य गण जो कि जीवात्मा के आधारभूत लाभ के प्रति सजग होते हैं, वे कभी एकादशी के दिन अन्न नहीं ग्रहण करते हैं।

एकादशी व्रत धारण करना
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सभी वैदिक शास्त्र एकादशी के दिन पूर्ण रूप से उपवास (निर्जल) करने की दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं। आध्यात्मिक प्रगति के लिए आयु आठ से अस्सी तक के हर किसी को वर्ण आश्रम, लिंग भेद या और किसी भौतिक वैचारिकता की अपेक्षा कर के एकादशी के दिन व्रत करने की अनुशंसा की गयी है।

वे लोग जो पूर्ण रूप से उपवास नहीं कर सकते उनके लिए मध्याह्न या संध्या काल में एक बार भोजन करके एकादशी व्रत करने की भी अनुशंसा की गयी हैं। परन्तु इस दिन किसी भी रूप में, किसी को भी, किसी भी स्थिति में अन्न नहीं ग्रहण करना चाहिये।

एकादशी पर भक्तिमयी सेवा
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एकादशी को उसके सभी लाभों के साथ ऐसा उपाय या साधन समझना चाहिये जो सभी जीवों के परम लक्ष्य, भगवद्-भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक हैं । भगवान् की कृपा से यह दिन भगवान् की भक्तिमयी सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक बन गया है। पापमयी इच्छाओं से मुक्त हो, एक भक्त विशुद्ध भक्तिमयी सेवा कर सकता है और परमेश्वर का कृपापात्र बन सकता है।

इसलिए, भक्तों के लिए, एकादशी के दिन व्रत करना साधना-भक्ति के मार्ग में प्रगति करने का सशक्त माध्यम है। व्रत करने की क्रिया चेतना का शुद्धिकरण करती है और भक्त को कितने ही भौतिक विचारों से मुक्त करती है। क्योंकि इस दिन की गई भक्तिमयी सेवा का लाभ किसी और दिन की गई सेवा से कई गुना अधिक होता है, इसलिए भक्त जितना अधिक से अधिक हो सके आज के दिन जप, कीर्तन, भगवान् की लीला-संस्मरण पर चर्चाएँ आदि अन्य भक्तिमयी सेवाएं किया करते हैं।

श्रील् प्रभुपाद ने भक्तों के लिए इस दिन कम से कम पच्चीस जप माला संख्या पूरी करने, भगवान् के लीला-संस्मरणों को पढ़ने एवं भौतिक कार्यकलापों में न्यूनतम संलग्न होने की अनुशंसा की है। हालाँकि, वे भक्त जो पहले से ही भगवान् की भक्ति की सेवाओं (जैसे पुस्तक वितरण, प्रवचन आदि) में सक्रियता से लगे हुए हैं, उनके लिए उन्होंने कुछ छूट दी हैं, जैसे उन खाद्यों को वे इस दिन भी खा या पी सकते है जिनमें अन्न नहीं हैं।

एकादशी का महात्म्य
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श्रील जीव गोस्वामी द्वारा रचित, भक्ति-सन्दर्भ में स्कन्द पुराण में से लिया हुआ एक श्लोक भर्त्सना करते हुए बताता है कि जो मनुष्य एकादशी के दिन अन्न ग्रहण करते हैं, वे मनुष्य अपने माता, पिता, भाइयों एवं अपने गुरु की मृत्यु के दोषी होते हैं। वैसे मनुष्य अगर वैकुंठ धाम तक भी पहुँच जाएँ तो भी वे वहाँ से नीचे गिर जाते हैं। इस दिन किसी भी तरह के अन्न को ग्रहण करना सर्वथा वर्जित है, चाहे वह भगवान् विष्णु को ही क्यों न अर्पित हो।

ब्रह्म-वैवर्त पुराण में कहा गया है कि जो कोई भी एकादशी के दिन व्रत करता है वो सभी पाप कर्मों के दोषों से मुक्त हो जाता हैं और आध्यात्मिक जीवन में प्रगति करता है। मूल सिद्धान्त केवल उस दिन भूखे रहना नहीं है, बल्कि अपनी निष्ठा और प्रेम को गोविन्द, या कृष्ण पर और भी सुदृढ़ करना है। एकादशी के दिन व्रत का मुख्य कारण है अपनी शरीर की जरूरतों को घटाना और अपने समय का भगवान् की सेवा में जप या किसी और सेवा के रूप में व्यय करना है। उपवास के दिन सर्वश्रेष्ठ कार्य तो भगवान् श्रीगोविन्द की मंगलमय लीलाओं का ध्यान करना और उनके पावन नामों को निरंतर सुनते रहना है।

एकादशी के महत्त्व के बारे में शास्त्र-प्रमाण
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नमो नमस्ते गोविन्द बुधश्रवणसंज्ञक ॥
अघौघसंक्षयं कृत्वा सर्वसौख्यप्रदो भव ।
भुक्तिमुक्तिप्रदश्चैव लोकानां सुखदायकः ॥

मन में भौतिक इच्छा रखने वाले लोगों ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए अथवा अपनी उद्देश्य-पूर्ति के लिए प्रत्येक एकादशी को उपवास रखना चाहिए। परंतु एकादशी का सच्चा उद्देश्य हैं भगवान्‌ को आनंद प्रदान करना।

शुक्ल पक्ष हो या कृष्ण पक्ष हो, भरणी नक्षत्र हो या अन्य कोई भी कारण हो, भगवान्‌ श्री हरि का प्रेम और उनके धाम की प्राप्ति करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए एकादशी को उपवास रखना आवश्यक हैं।

हज़ारों अश्वमेध यज्ञ करके और सैकडों वाजपेय यज्ञ करके जो पुण्य प्राप्त होता है, उस पुण्य की तुलना एकादशी के उपवास द्वारा प्राप्त होनेवाले पुण्य के सोलहवे हिस्से के साथ भी नहीं हो सकती।

इस पृथ्वी पर भगवान्‌ पद्मनाभ के दिन के समान (अर्थात्‌ एकादशी के समान) शुद्धि प्रदान करने वाला और पाप दूर कर सकने में समर्थ अन्य कोई भी दिन नहीं हैं।

ग्यारह इन्द्रियों के द्वारा (आँखें, कान, नाक, जीभ और त्वचा यह पाँच ज्ञानेंद्रिय; मुँह, हाथों , पैर, गुदद्वार और जननेंद्रिय यह पाँच कर्मेद्रिय और मन–इन के द्वारा) किये गये सर्व पाप कर्म हर एक पक्ष की ग्यारहवे दिन को (एकादशी को) उपवास करने से नष्ट हो जाते हैं।

अपना पाप नष्ट करने के लिए एकादशी के समान प्रभावी उपाय दूसरा कोई नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति केवल दिखावे के लिए एकादशी करता है, तो भी उस व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत यम का दर्शन नहीं होता हैं।

भगवान्‌ श्रीकृष्ण के अवतार महर्षि वेद व्यास ने कहा है–”मेरे दिन (एकादशी को) यदि कोई व्यक्ति मुझे थोड़ा भी अन्न अर्पण करता है, तो वह नरक में जायेगा। तो कोई व्यक्ति स्वयं अन्न खाने से उस की क्या गति होगी, ये कहने की आवश्यकता नहीं हैं।”

ब्राह्मण की हत्या करना, शराब पीना–ये सब पाप एकादशी को अन्न खाने के पापों से क्षुद्र हैं।

जो मनुष्य एकादशी के पवित्र दिन अन्न खाता हैं तो वह सब मनुष्यों में हीन हैं। यदि कोई ऐसे मनुष्यों का अशुभ चेहरा देखता हैं, उसने सूर्य के तरफ़ देखकर अपने आप को पवित्र कर लेना चाहिए।

एकादशी के दिन (श्री हरि के दिन) इस पृथ्वी के उपर की सब बडे बडे पाप जैसे ब्रह्म-हत्या (ब्राह्मण को मारने का पाप) अन्न का आश्रय लेते है आनी वहाँ रहते हैं।

यदि अपने पिता, पुत्र, पत्नी या मित्र भी भगवान्‌ पद्मनाभ के दिन यदि अन्न खायेंगे तो भी वे बडे पापियों में गिने जायेंगे।

दशमी के दिन एक ही बार खाना खायें। एकादशी के दिन पूर्ण उपवास रखना चाहिए। एकादशी के दिन श्राद्ध, तिलोदक, पिंड-प्रदान, जल-तर्पण इत्यादि कार्य नहीं करना चाहिए।

कोई भी महिला मासिक धर्म के समय भी (रजस्वला अवस्था में भी) एकादशी के दिन अन्न न खायें।

विधवा स्त्री यदि एकादशी के दिन अन्न भोजन करती हैं तो वह सब पुण्यों से रहित होती है आनी प्रति दिन एक गर्भपात करने का पाप उसे लगता हैं।

द्वादशी को तुलसी-पत्तों का चयन वर्जित
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न छिन्द्यात्‌ तुलसीं विप्र
द्वादश्यां वैष्णवः क्वचित्।

(हरिभक्तिविलास, 7/354, विष्णु-धर्मोत्तर पुराण)

हे ब्राह्मणों! एक वैष्णव द्वादशी के दिन कभी भी तुलसी पत्तों का चयन नहीं करना।

भानुवारं विना दुर्वां
तुलसीं द्वादशीं विना।
जिवितस्य अविनाशाय न
विचिन्वित धर्मवित्‌॥
(हरिभक्तिविलास, 7/355, गरुड-पुराण)

शास्त्र का भली भाँति अध्ययन किया हुए व्यक्ति यदि अपनी आयु को कम नहीं करना चाहता हो तो उसे रविवार के दिन दुर्वा घास और द्वादशी के दिन तुलसी के पत्तों का चयन नहीं करना चाहिए।

द्वादश्यां तुलसी पत्रं
धात्री पत्रश्च कार्त्तिके।
लुनति स नरो गच्छेत्‌
निरयं अति गर्हितम्‌॥
(हरिभक्तिविलास 7/356, पद्म-पुराण, कृष्ण और सत्यभामा के बीच का संवाद)

यदि कोई मनुष्य द्वादशी के दिन तुलसी-पत्तों का चयन करता है या कार्तिक महीने में आंवले के वृक्ष के पत्तों का चयन करता है तो उसे अत्यंत गर्हित नरक-लोक की प्राप्ति होकर दुःख का अनुभव करना पड़ता है।

आचार्य डॉ0 विजय शंकर मिश्र
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[06/04, 9:43 PM] Savitanandmishra: गायत्री और ब्रम्ह की एकता
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गायत्री कोई स्वतन्त्र देवी- देवता नहीं है। यह तो परब्रह्म परमात्मा का क्रिया भाग है। ब्रह्म निर्विकार है, अचिन्त्य है, बुद्धि से परे है, साक्षी रूप है, परन्तु अपनी क्रियाशील चेतना शक्ति रूप होने के कारण उपासनीय है और उस उपासना का अभीष्ट परिणाम भी प्राप्त होता है। ईश्वर- भक्ति, ईश्वर- उपासना, ब्रह्म- साधना, आत्म- साक्षात्कार, ब्रह्म- दर्शन, प्रभुपरायणता आदि पुरुषवाची शब्दों का जो तात्पर्य और उद्देश्य है, वही ‘गायत्री उपासना’ आदि स्त्री वाची शब्दों का मन्तव्य है।
गायत्री उपासना वस्तुत: ईश्वर उपासना का एक अत्युत्तम सरल और शीघ्र सफल होने वाला मार्ग है। इस मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति एक सुरम्य उद्यान से होते हुए जीवन के चरम लक्ष्य ‘ईश्वर प्राप्ति’ तक पहुँचते हैं। ब्रह्म और गायत्री में केवल शब्दों का अन्तर है, वैसे दोनों ही एक हैं। इस एकता के कुछ प्रमाण नीचे देखिए—

गायत्री छन्दसामहम्। —श्रीमद् भगवद् गीता अ० १०.३५
छन्दों में मैं गायत्री हूँ।

भूर्भुव: स्वरिति चैव चतुर्विंशाक्षरा तथा।
गायत्री चतुरोवेदा ओंकार: सर्वमेव तु॥ —बृ० यो० याज्ञ० २/६६
भूर्भुव: स्व: यह तीन महाव्याहृतियाँ, चौबीस अक्षर वाली गायत्री तथा चारों वेद निस्सन्देह ओंकार (ब्रह्म) स्वरूप हैं।

देवस्य सवितुर्यस्य धियो यो न: प्रचोदयात्।
भर्गो वरेण्यं तद्ब्रह्म धीमहीत्यथ उच्यते॥ —विश्वामित्र
उस दिव्य तेजस्वी ब्रह्म का हम ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करता है।

अथो वदामि गायत्रीं तत्त्वरूपां त्रयीमयीम्।
यया प्रकाश्यते ब्रह्म सच्चिदानन्दलक्षणम्॥ —गायत्री तत्त्व० श्लोक १
त्रिवेदमयी (वेदत्रयी) तत्त्व स्वरूपिणी गायत्री को मैं कहता हूँ, जिससे सच्चिदानन्द लक्षण वाला ब्रह्म प्रकाशित होता है अर्थात् ज्ञात होता है।

गायत्री वा इदं सर्वम्। —नृसिंहपूर्वतापनीयोप० ४/३
यह समस्त जो कुछ है, गायत्री स्वरूप है।
गायत्री परमात्मा। —गायत्रीतत्त्व०

गायत्री (ही) परमात्मा है।
ब्रह्म गायत्रीति- ब्रह्म वै गायत्री। —शतपथ ब्राह्मण ८/५/३/७ -ऐतरेय ब्रा० अ० १७ खं० ५

ब्रह्म गायत्री है, गायत्री ही ब्रह्म है।
सप्रभं सत्यमानन्दं हृदये मण्डलेऽपि च।
ध्यायञ्जपेत्तदित्येतन्निष्कामो मुच्यतेऽचिरात्॥ —विश्वामित्र
प्रकाश सहित सत्यानन्द स्वरूप ब्रह्म को हृदय में और सूर्य मण्डल में ध्यान करता हुआ, कामना रहित हो गायत्री मन्त्र को यदि जपे, तो अविलम्ब संसार के आवागमन से छूट जाता है।

ओंकारस्तत्परं ब्रह्म सावित्री स्यात्तदक्षरम्। —कूर्म पुराण उ० विभा० अ० १४/५७
ओंकार परब्रह्म स्वरूप है और गायत्री भी अविनाशी ब्रह्म है।

गायत्री तु परं तत्त्वं गायत्री परमागति:। —बृहत्पाराशर गायत्री मन्त्र पुरश्चरण वर्णनम् ४/४
गायत्री परम तत्त्व है, गायत्री परम गति है।

सर्वात्मा हि सा देवी सर्वभूतेषु संस्थिता।
गायत्री मोक्षहेतुश्च मोक्षस्थानमसंशयम्॥ —ऋषि शृंग
यह गायत्री देवी समस्त प्राणियों में आत्मा रूप में विद्यमान है, गायत्री मोक्ष का मूल कारण तथा सन्देह रहित मुक्ति का स्थान है।

गायत्र्येव परो विष्णुर्गायत्र्येव पर: शिव:।
गायत्र्येव परो ब्रह्म गायत्र्येव त्रयी तत:॥ —स्कन्द पुराण काशीखण्ड ४/९/५८, वृहत्सन्ध्या भाष्य
गायत्री ही दूसरे विष्णु हैं और शंकर जी दूसरे गायत्री ही हैं। ब्रह्माजी भी गायत्री में परायण हैं, क्योंकि गायत्री तीनों देवों का स्वरूप है।

गायत्री परदेवतेति गदिता ब्रह्मवै चिद्रूपिणी॥ ३॥ —गायत्री पुरश्चरण प०
गायत्री परम श्रेष्ठ देवता और चित्त रूपी ब्रह्म है, ऐसा कहा गया है।

गायत्री वा इदं सर्वं भूतं यदिदं किंच। —छान्दोग्योपनिषद् ३/१२/१
यह विश्व जो कुछ भी है, वह समस्त गायत्रीमय है।
नभिन्नां प्रतिपद्येत गायत्रीं ब्रह्मणा सह।
सोऽहमस्मीत्युपासीत विधिना येन केनचित् —व्यास
गायत्री और ब्रह्म में भिन्नता नहीं है। अत: चाहे जिस किसी भी प्रकार से ब्रह्म स्वरूपी गायत्री की उपासना करे।

गायत्री प्रत्यग्ब्रह्मौक्यबोधिका। —शकंर भाष्य
गायत्री प्रत्यक्ष अद्वैत ब्रह्म की बोधिका है।

परब्रह्मस्वरूपा च निर्वाणपददायिनी।
ब्रह्मतेजोमयी शक्तिस्तदधिष्ठतृ देवता —— देवी भागवत स्कन्ध ९ अ.१/४२
गायत्री मोक्ष देने वाली, परमात्मस्वरूप और ब्रह्मतेज से युक्त शक्ति है और मन्त्रों की अधिष्ठात्री है।

गायत्र्याख्यं ब्रह्म गायत्र्यनुगतं गायत्री मुखेनोक्तम्॥ —छान्दोग्य० शकंर भाष्य ३/१२/१५
गायत्री स्वरूप एवं गायत्री से प्रकाशित होने वाला ब्रह्म गायत्री नाम से वर्णित है।

प्रणवव्याहृतिभ्याञ्च गायत्र्या त्रितयेन च।
उपास्यं परमं ब्रह्म आत्मा यत्र प्रतिष्ठित —— तारानाथ कृ० गाय० व्या० पृ० २५
प्रणव, व्याहृति और गायत्री इन तीनों से परम ब्रह्म की उपासना करनी चाहिए, उस ब्रह्म में आत्मा स्थित है।

ते वा एते पचं ब्रह्मपुरुषा: स्वर्गस्य लोकस्य द्वारपा: स य एतानेवं पचं ब्रह्मपुरुषान् स्वर्गस्य लोकस्य द्वारपान् वेदास्य कुले वीरो जायते प्रतिपद्यते स्वर्गलोकम्। —— छा० ३/१३/६

हृदय चैतन्य ज्योति गायत्री रूप ब्रह्म के प्राप्ति स्थान के प्राण, व्यान, अपान, समान, उदान ये पाँच द्वारपाल हैं। इन्हीं को वश में करे, जिससे हृदयस्थित गायत्री स्वरूप ब्रह्म की प्राप्ति हो। उपासना करने वाला स्वर्गलोक को प्राप्त होता है और उसके कुल में वीर पुत्र या शिष्य उत्पन्न होता है।

भूमिरन्तरिक्षं द्यौरित्यष्टवक्षराण्यष्टक्षरं ह वा एकं गायत्र्यै पदमेतदु हैवास्या एतत्स यावदेषु त्रिषु लोकेषु तावद्ध जयति योऽस्या एतदेवं पदं वेद। —बृह० ५/१४/१
भूमि, अन्तरिक्ष, द्यौ- ये तीनों गायत्री के प्रथम पाद के आठ अक्षरों के बराबर हैं। अत: जो गायत्री के प्रथम पद को भी जान लेता है, वह त्रिलोक विजयी होता है।

स वै नैव रेमे, तस्मादेकाकी न रमते, सद्वितीयमैच्छत्। सहैतावानास। यथा स्त्रीपुमान्सौ संपरिष्वक्तौ स। इममेवात्मानं द्वेधा पातयत्तत: पतिश्च पत्नी चाभवताम्। —बृह० १/४/३

वह ब्रह्म रमण न कर सका, क्योंकि अकेला था। अकेला कोई भी रमण नहीं कर सकता। उसका स्वरूप संयुक्त स्त्री- पुरुष की भाँति था। उसने दूसरे की इच्छा की तथा अपने संयुक्त रूप को द्विधा विभक्त किया, तब दोनों रूप पत्नी और पति भाव को प्राप्त हुए।

निर्गुण: परमात्मा तु त्वदाश्रयतया स्थित:।
तस्य भट्टरिकासि त्वं भुवनेश्वरि! भोगदा॥ —शक्ति दर्शन
परमात्मा निर्गुण है और तेरे ही आश्रित ठहरा हुआ है। तू ही उसकी साम्राज्ञी और भोगदा है।

शक्तिश्च शक्तिमद्रूपाद् व्यतिरेकं न वाञ्छति।
तादात्म्यमनयोर्नित्यं वह्निदाहिकयोरिव॥ — शक्ति दर्शन
शक्ति, शक्तिमान से कभी पृथक् नहीं रहती। इन दोनों का नित्य सम्बन्ध है। जैसे अग्रि और दाहक शक्ति का नित्य परस्पर सम्बन्ध है, उसी प्रकार शक्तिमान् का भी है।

सदैकत्वं न भेदोऽस्ति सर्वदैव ममास्य च।
योऽसौ साहमहं योऽसौ भेदोऽस्ति मतिविभ्रमात्॥ —देवी भागवत पु० ३/६/२
शक्ति का और उस शक्तिमान् पुरुष का सदा सम्बन्ध है, कभी भेद नहीं है। जो वह है, सो मैं हूँ और जो मैं हूँ, सो वह है। यदि भेद है, तो केवल बुद्धि का भ्रम है।

जगन्माता च प्रकृति: पुरुषश्च जगत्पिता।
गरीयसी त्रिजगतां माता शतगुणै: पितु:॥ — ब्र० वै० पु० कृ० ज० अ० ५२/३४
संसार की जन्मदात्री प्रकृति है और जगत् का पालनकर्ता या रक्षा करने वाला पुरुष है। जगत् में पिता से माता सौ गुनी अधिक श्रेष्ठ है।
इन प्रमाणों से स्पष्ट हो जाता है कि ब्रह्म ही गायत्री है और उसकी उपासना ब्रह्म प्राप्ति का सर्वोत्तम मार्ग है।
[06/04, 9:49 PM] Savitanandmishra: . *_••• ═•☆”ॐ”☆•═ •••_*
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🙏🏻 *_नमस्कार_* 🙏🏻
*_ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आपके एवं आपके पूरे परिवार के लिए हर दिन शुभ एवं मंगलमय हों।_*

👉🏼 *_07 अप्रैल 2021 चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और दिन बुधवार है। एकादशी तिथि देर रात 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक साध्य योग रहेगा। साथ ही देर रात 3 बजकर 33 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। इसके साथ ही दोपहर 3 बजे से पंचक प्रारम्भ हो रहे है और 12 अप्रैल की दोपहर पहले 11 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो जायेंगे। पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जायेगा। जानिए आचार्य श्री गोपी राम से राशिनुसार कैसा रहेगा आपका दिन।_*

🐑 *_मेष राशि पारिवारिक जीवन में चल रहे कुछ महत्वपूर्ण काम पूरे होंगे। अपना व्यवहार सकारात्मक बनाए रखें। भविष्य के लिये बनायी योजनाओं पर भी कुछ सोच-विचार कर सकते हैं। अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद भी मिलेगी। जीवन में अपने परिवार, दोस्तों और जीवनसाथी की भूमिका को पहचानेंगे। आपके स्वभाव में संयम और धीरज बना रहेगा, जिसके कारण आप अपनी सभी समस्याओं का हल आसानी से ढूंढ लेंगे। कारोबार में उम्मीद से ज्यादा मुनाफा होगा।_*

🐂 *_वृष राशि दिन व्यापार के लिए फायदेमंद रहेगा। पुराना निवेश आपके बहुत काम सकता है। योजना बनाने और फैसला लेने के लिए दिन बहुत अच्छा है। आप पूरा ध्यान अपनी जिमेदारियों पर रखें। हर काम जोश से पूरा करने की कोशिश करें। आपकी कोशिशें जल्द ही रंग ला सकती हैं। अगर किसी को प्रपोज करना चाह रहे हैं तो दिन अच्छा है। आपकी किस्मत आपका सर्पोट करेगी। साथ ही दूसरों की परेशानियों को समझने की कोशिश करेंगे।_*

👨‍❤️‍👨 *_मिथुन राशि आपका दिन खुशियों भरा रहेगा। आपका मन नये काम करने में लगेगा। बिजनेस में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। अपने कामकाज को पूरी सावधानी से करें, साथ ही दूसरों की हर संभव मदद करें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। लवमेट के लिए दिन अच्छा रहेगा। पार्टनर से प्यार और सहयोग मिलेगा। स्टूडेंट्स को कुछ सीखने के लिए समय ठीक रहेगा। बिना वजह विवादों में फंसने से बचें। समाज में मान- सम्मान बढ़ेगा।_*

🦀 *_कर्क राशि दिन ठीक- ठाक रहने वाला है।अपनी सोच को सकारात्मक रखें। ऑफिस के पुराने कामकाज निपटाने की कोशिश करेंगे जिनमें आप सफल भी रहेंगे। रूठे हुए साथी को मनाने के लिए उनका मनपसंद व्यंजन बना के उन्हे खिला सकते हैं। कोई भी फैसला सोच-समझकर लें, जल्द बाजी बिल्कुल ना करें। किसी काम को कल पर टालने से आपको नुकसान हो सकता है, इसलिए ऐसा करने से बचें। घर पर समय दें ,पारिवारिक रिश्ते और मजबूत होंगे।_*

🦁 *_सिंह राशि दिन अच्छा रहेगा। जिससे भी मिलेंगे वह व्यक्ति आपसे प्रभावित होगा। परिवार का पूरा सहयोग आपको मिलेगा। किसी से भी बात करते समय वाणी पर संयम बनाए रखें। अपने करियर को लेकर मन में दुविधा होगी, लेकिन जल्द ही वह सॉल्व भी हो जायेगी। आपका स्वास्थ्य पहले से ठीक रहेगा, ड्राई फूड खाएं। बच्चें भाई बहन के साथ गेम्स खेलने का प्लान बनेगा। दाम्पत्य जीवन में पहले से चल रहे विवाद से राहत मिलेगी। अपने खर्चों को कंट्रोल करें, नहीं तो आपको परेशानी हो सकती है।_*

👰🏻 *_कन्या राशि आपका ध्यान ऑफिस के कामों को पूरा करने में लगा रहेगा। अपने अधूरे कामों को पूरा करने के लिए भी दिन अच्छा है।आपकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। आपका आत्मबल आपके लिये सफलता की कुंजी साबित होगा। सरकार से संबंधित काम करवाने के लिए आपको थोड़े धैर्य से काम लेना होगा। बच्चों की कामयाबी पर आप गर्व महसूस करेंगे। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। भाई-बहनों का सहयोग मिलता रहेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी।_*

⚖️ *_तुला राशि आपके मन में नए-नए विचार आएंगे। आप कुछ ज्यादा ही जोश में रहेंगे। आपके बनाए प्लान में कोई बदलाव हो सकता है। बिजनेस में कुछ नया करने की इच्छा होगी। दिल की बजाय दिमाग से काम लें। व्यापार में आर्थिक लाभ होने से कर्ज से छुटकारा मिलेगा। परिवार वालों के गंभीर मुद्दे पर बात होगी। संगीत से जुड़े लोगों के लिए दिन बेहतरीन रहने वाला है। जीवन में चल रही समस्यायों का समाधान मिलेगा_*

🦂 *_वृश्चिक राशि बड़े-बुजुर्गों की सलाह आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगी। धन लाभ का योग बन रहा है। समाज कल्याण की तरफ भी आपका रुझान होगा। शत्रु आपको हराने का प्रयास करेंगे, लेकिन आपके सम्मुख ठहर नहीं सकेंगे। नौकरीपेशा लोगों तरक्कि के नये अवसर मिलेगा। ऑफिस के किसी बड़े अधिकारी का सहयोग मिलेगा। अचानक से आपके किसी पुराने मित्र का फोन आ सकता है। परिवार में सौहार्द बना रहेगा।_*

🏹 *_धनु राशि आपका रुझान अध्यात्मक की तरफ ज्यादा रहेगा। आप घर के साथ धार्मिक कार्यों में मन लगायेंगे। राजनीतिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। पड़ोसियों के बीच आपका मान- सम्मान बढ़ेगा। साइंस से जुड़े छात्रों के लिए दिन अच्छा है। माता के साथ रिश्ते मधुर रहेंगे। बिजनेस में पिता को सहयोग करेंगे। खानपान और जीवनशैली पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।_*

🐊 *_मकर राशि वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की तारीफ करेंगे। आपकी सैलरी में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है, जिससे आपका दिन अच्छा रहेगा। अपने सीनियर्स के प्रति अच्छा व्यवहार बनाए रखें। छात्रों के लिए भी दिन अनुकूल रहने वाला है। आपके अच्छे प्रदर्शन का प्रभाव आपके करियर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। आपके व्यापार में फायदे के आसार नजर आ रहे हैं। धन लाभ से आप अपने अटके हुए काम पूरे कर सकते हैं। घर के बड़ों का आशीर्वाद आपके साथ रहेगा।_*

⚱️ *_कुम्भ राशि दिन आपके लिए उत्तम रहेगा। सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देंगे। कार्यक्षेत्र में उम्मीद के अनुसार कामयाबी हासिल होगी। पारिवारिक मामलों में किसी बात को लेकर जीवनसाथी से वार्तालाप हो सकती है। दिन दूर की यात्रा करने से बचें, अपने स्वास्थ्य को राहत देने के लिये ये डिसीजन ठीक होगा। सरकारी एग्जाम की तैयारी करने वालों के लिए दिन अच्छा है। सेहत अच्छी रहेगी।_*

🐬 *_मीन राशि दिन आपके लिए उत्साहपूर्वक रहेगा। कोई भी शुभ कार्य करेंगे और साथ ही मांगलिक कार्य भी करेंगे। संतान की करियर के लिए मन में चिंताएं बनी रहेंगी। पूरा दिन एंज्वॉय से भरा रहेगा। सरकारी ऑफिस वाले बॉस आपके काम को लेकर बॉस आपकी तारीफ करेंगे। सोशल मीडिया पर नए लोगों के साथ संपर्क में आएंगे। जिसका फायदा आपको भविष्य में मिलेगा। जीवन में चल रही समस्यायों से छुटकारा मिलेगा।_*

*_(Don’t copy my page)_*

✍🏼 *_*नोट_* : *_हमारे द्वारा भेजी गई राशिफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी पंडित जी या ज्योतिषी से मिल सकते हैं।_*

🤷🏻‍♀ *_आज जिन भाई-बहनों का जन्मदिन या शादी की सालगिरह है उन सभी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ_*

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*_सम्पर्क सूत्र :-_*
*_9812224501_*
[06/04, 9:49 PM] Savitanandmishra: ╲\╭┓
╭ 🌹 ╯ *_जय श्री हरि_*
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┇ ┇ ┇ ┇ *_करूणा के सागर श्री हरि जी की_*
┇ ┇ ┇ ❁ *_असीम अनुकम्पा आप पर_*
┇ ┇ ✾ *_सदैव बनी रहे_*
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🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*_बुधवार 07 अप्रैल 2021_*

*_ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।_*

*_।। आज का दिन मंगलमय हो ।।_*

🌌 *_दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।_*
*_बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।_*
*_बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।_*
🔮 *_विक्रम संवत् 2078 आनन्द, विक्रम सम्वत संवत्सर तदुपरि खिस्ताब्द आंग्ल वर्ष 2021_*
🔯 *_शक संवत – 1943,_*
☸️ *_कलि संवत 5122_*
☣️ *_अयन – उत्तरायण_*
🌦️ *_ऋतु – सौर वसंत ऋतु_*
🌤️ *_मास – चैत्र माह_*
🌒 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष,_*
📆 *_तिथि – एकादशी – 02:28 AM, 08 अप्रैल तक द्वादशी।_*
📝 *_तिथि के स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी है। आज 7 अप्रैल को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी, पापमोचनी एकादशी है।_*
💫 *_नक्षत्र – धनिष्ठा – 03:33 AM, 08 अप्रैल तक_*
🪙 *_नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल और देवता वसु हैं।_*
🔔 *_योग – साध्य – 04:30 PM तक तत्पश्चात शुभ_*
⚡ *_प्रथम करण : – बव – 14:15 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : – बालव – 02:28 AM, 08 अप्रैल तक_*
🔥 *_गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा/हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक ।_*
🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 6.06_*
🌅 *_सूर्यास्त – सायं 18.31_*
✡️ *_विजय मुहूर्त दोपहर 02.30 पीएम से 03.20 पीएम तक_*
🗣️ *_निशिथ काल रात 12.00 एएम से 12.46 एएम तक (8 अप्रैल)_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त शाम 06.30 पीएम से 06.54 पीएम तक_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04.32 एएम से 05.18 एएम तक (8 अप्रैल)_*
💧 *_अमृत काल शाम 04:44 पीएम से 06:24 पीएम तक_*
🌌 *_साध्य योग – दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक_*
🔅 *_धनिष्ठा नक्षत्र – देर रात 3 बजकर 33 मिनट तक_*
⏯️ *_पंचक प्रारम्भ हो रहे है – दोपहर 3 बजे से_*
☝🏼 *_कब समार्त होंगे पंचक- 12 अप्रैल की दोपहर पहले 11 बजकर 29 मिनट पर_*
🚓 *_यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-बटुक को कांस्य पात्र दान करें।_*
🌴 *_वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व व त्यौहार- पापमोचनी एकादशी, व्रत वैष्णो मां कर्मा देवी जयंती, विश्व आरोग्य दिवस, पंचक प्रारंभ 14.59_*
✍🏼 *_विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।_*

*_════════ ✥.❖.✥ ════════_*

🌹 *_पापमोचनी एकादशी के दिन बन रहे ये शुभ मुहूर्त_*

🐚 *_एकादशी तिथि आरंभ: 07 अप्रैल, तड़के 2 बजकर 10 मिनट से_*
👣 *_एकादशी तिथि समापन: 08 अप्रैल, तड़के 2 बजकर 29 मिनट तक_*
💁🏻‍♂️ *_एकादशी व्रत पारण मुहूर्त: 08 अप्रैल, गुरुवार दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 04 बजकर 11 मिनट तक._*

🌷 *_Vastu tips_* 🌸

*_वास्तु शास्त्र में कल हमने बात की थी लाफिंग बुद्धा के बारे में और आज भी हम इसी बारे में आगे बात करेंगे। लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को मुख्य द्वार के सामने कम से कम 30 इंच की ऊंचाई पर लगाया जाना चाहिए। लगाये जाने के लिये आदर्श ऊंचाई 30 इंच से अधिक और साढ़े बत्तीस इंच से कम होनी चाहिए। मूर्ति की नाक ग्रह स्वामी के दोनों हाथों की उंगलियों के बराबर, यानी कम से कम आठ अंगुल का होना चाहिए और अधिकतम ऊंचाई घर की मालिकन के हाथ की नाप से सवा हाथ के बराबर होनी चाहिए।_*
*_मुख्य द्वार के सामने रखी हुई मूर्ति का चेहरा मुख्य द्वार के सामने ही होना चाहिए। जैसे ही द्वार खुले सबसे पहले वही मूर्ति दिखे। ध्यान रहे कि लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को रसोई, डायनिंग रूम या बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। साथ ही इसकी पूजा भी नहीं की जानी चाहिए।_*

*_●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●_*

🪔 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️

*_शास्त्रानुसार एकादशी व्रत करने की विधिवत विधि क्या है, कैसे एकादशी व्रत को करें? एकादशी के दिन क्या करें तथा क्या न करें?_*

*_मित्रों, एकादशी का व्रत जो लोग करते हैं, उनके लिए शास्त्रानुसार एकादशी व्रत की विधिवत विधि बताता हूँ। जो लोग इस व्रत को करते हैं, उन्हें दशमी तिथि की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग विलास से भी दूर रहना चाहिए। प्रात: एकादशी को लकड़ी का दातुन करना चाहिए तथा पेस्ट आदि का उपयोग न करें। नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें इससे भी दातुन की विधि पूर्ण हो जाती है। वैसे तो किसी भी वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, इसलिए स्वयं गिरे हुए पत्तों का ही सेवन करना चाहिए।।_*

*_यदि ये सम्भव न हो तो पानी से बारह कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें अथवा किसी श्रेष्ठ विद्वान् ब्राह्मण के मुख से श्रवण करें। प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि: ‘आज मैं चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करुँगा और न ही किसी का दिल दुखाऊँगा। गौ, ब्राह्मण आदि को फलाहार एवं अन्नादि देकर प्रसन्न करुँगा। रात्रि को यथासंभव जागरण एवं कीर्तन करुँगा।।_*

*_“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इस द्वादशाक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करुँगा। राम, कृष्ण, नारायण इत्यादि विष्णुसहस्रनाम को कण्ठ का भूषण बनाऊँगा। ऐसी प्रतिज्ञा करके श्रीविष्णु भगवान का स्मरण कर प्रार्थना करें कि “हे त्रिलोकपति! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति अवश्य दें।” मौन, जप, शास्त्रों का पठन-पाठन, कीर्तन, रात्रि जागरण एकादशी व्रत में विशेष लाभ प्रदायक उपाय हैं।।_*

*_════════ ✥.❖.✥ ════════_*

*_एकादशी के दिन अशुद्ध द्रव्य से बने पेय न पीयें। जैसे – कोल्ड ड्रिंक्स, एसिड आदि डाले हुए फलों के डिब्बाबंद रस आदि को न पीयें। फलाहार भी दो बार से ज्यादा न करें तथा आइसक्रीम एवं तली हुई चीजें जैसे फलाहारी भुंजिया और चिप्स इत्यादि न खायें। फल अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस या थोड़े दूध या जल पर रहना विशेष लाभदायक होता है। व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल आदि का सेवन तथा ज्यादा जल का भी सेवन नहीं करना चाहिए।।_*

*_व्रत के पहले दिन (दशमी को) तथा व्रत के दूसरे दिन (द्वादशी को) हविष्यान्न (जौ, गेहूँ, मूँग, सेंधा नमक, कालीमिर्च, शर्करा और गोघृत आदि) का बना भोजन सिर्फ एक बार ही ग्रहण करें। फलाहार में भी गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए। आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए। जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए एवं बैल की पीठ पर सवारी कदापि न करें।।_*

*_भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप दीप से श्रीहरि की पूजा करके क्षमा माँगनी चाहिए। एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटावाना, मधुर बोलना, अत्यधिक न बोलना क्योंकि अधिक बोलने से न बोलने योग्य वचन भी निकल जाते हैं। व्रत के दिन सत्य ही बोलना चाहिए। इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें। प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करनी चाहिए।।_*

*_एकादशी के दिन किसी सम्बन्धी की मृत्यु हो जाय तो उस दिन व्रत रखकर उसका फल संकल्प करके मृतक को देना चाहिए और श्रीगंगाजी में पुष्प (अस्थि) प्रवाहित करने पर भी एकादशी व्रत रखकर व्रत का फल प्राणी के निमित्त दे देना चाहिए। प्राणिमात्र को अन्तर्यामी का अवतार समझकर किसी से छल कपट नहीं करना चाहिए। अपना अपमान करने या कटु वचन बोलनेवाले पर भी भूलकर भी क्रोध नहीं करना चाहिए। सन्तोष का फल सर्वदा मधुर ही होता है इसलिए मन में सदैव दया का भाव रखना चाहिए। इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है।।_*

🧘🏻‍♀️ *_व्रत खोलने की विधि:- द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्टान्न, दक्षिणादि से प्रसन्न कर उनकी परिक्रमा करनी चाहिए। फिर पूजा स्थल पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए। मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हो गये इस भावना के साथ, सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत को खोलना चाहिए।।_*

*_।। नमों नारायण ।।_*

*_════════ ✥.❖.✥ ════════_*

⚜️ *_मान्यता है कि, यह एकादशी हर तरह के पाप और कष्टों को दूर करने वाली होती है। पापों को हरने वाली यह एकादशी चैत्र मास में आती है। इसी के चलते इस एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है।_*
*_शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान श्री विष्णु जी को अति प्रिय है । एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी / श्री कृष्ण जी की आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का ब्रत रखने वाला जातक भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय होता है ।_*
*_एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है।_*
*_एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।_*
*_एकादशी के दिन चावल और दूसरे का अन्न खाना मना है । एकादशी के दिन चावल खाने से रोग और पाप बढ़ते है, एकादशी के दिन दूसरे का अन्न खाने से समस्त पुण्यों का नाश हो जाता है ।_*
🤷🏻‍♀️ *_एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का आशिक से अधिक जाप करना चाहिए ।_*
*_एकादशी के दिन प्रांत: भगवान विष्णु की पूजा करते समय कुछ पैसे विष्णु भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने रख दें। फिर पूजन करने के बाद यह पैसे अपने पर्स में रख लें। अब हर एकादशी को पूजन के समय यह सिक्के भी पर्स से निकाल कर पूजा में रखा करें और पूजन के बाद फिर से अपनी जेब में रख लें । इस उपाय को करने से कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है।_*

🖌 *_””सदा मुस्कुराते रहिये””_*
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*9812224501*
[06/04, 9:52 PM] Savitanandmishra: , 6 अप्रैल 2021

👉 अन्तःकरण की आवाज सुनो और उसका अनुकरण करो
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जब मनुष्य अकेला होता है, उसके पास और आस-पास भी जब कोई नहीं होता है, तब कोई पाप करने से उसे जो भय लगता है, एक शंका रहती है, वह किसके कारण होती है? उसे बार-बार ऐसा क्यों लगता है कि कोई उसके पाप को देख रहा है? क्यों उसका शरीर पूरे उत्साह से उस पाप कर्म में उत्साहित नहीं रहता? और क्यों बाद में भी वह एक अपराधी की तरह मलीन रहता है? क्या कभी कोई इस पर विचार करता है कि जब उसके पाप को देखने वाला कोई मौजूद नहीं तब उसे भय किसका है वह किससे डर रहा है? कौन उसे ऐसा करने को निःशब्द रोकता और टोकता रहता है? कौन उसके मन, प्राण और शरीर में कंपन उत्पन्न कर देता है?

निःसंदेह यह उसका अपना अन्तःकरण है, जो उसे उस पाप से हटाने के प्रयत्न में विविध प्रकार की शंकाओं, संदेहों व कम्पनादि भयद्योतक अनुभवों से उसे वैसा न करने के लिए संकेत करता जाता है और जो मनुष्य उसकी अवहेलना करके वैसा करता है, उसका अन्तःकरण एक न एक दिन उसकी गवाही देकर उसे दण्ड का भागी बनाता है। यह हो सकता है कि किसी का पाप कर्म दुनिया से छिपा रहे, किंतु उसके अपने अन्तःकरण से कदापि नहीं छिप सकता।

वह उसकी एक-एक क्रिया और विचार का सबसे प्रबल और सच्चा साक्षी होता है। जब किसी कारणवश मनुष्य को अपने पाप का दण्ड किसी और से नहीं मिल पाता तो समय आने पर उसका अन्तःकरण उसे स्वयं दण्डित करता है। हमारे लिए उचित यही है कि अन्तःकरण में विद्यमान परमात्मा की आवाज को सुनें और उसका अनुसरण करें।

महर्षि रमण

📖 अखण्ड ज्योति अप्रैल 1965 पृष्ठ 1
[06/04, 9:52 PM] Savitanandmishra: ╲\╭┓
╭ 🌹 ╯ *_जय श्री हरि_*
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┇ ┇ ┇ ┇ *_करूणा के सागर श्री हरि जी की_*
┇ ┇ ┇ ❁ *_असीम अनुकम्पा आप पर_*
┇ ┇ ✾ *_सदैव बनी रहे_*
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♡ *✹•⁘••⁘•✹•⁘••⁘•⁘••⁘•✹•⁘••⁘•✹*
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
*_बुधवार 07 अप्रैल 2021_*

*_ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।_*

*_।। आज का दिन मंगलमय हो ।।_*

🌌 *_दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।_*
*_बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।_*
*_बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।_*
🔮 *_विक्रम संवत् 2078 आनन्द, विक्रम सम्वत संवत्सर तदुपरि खिस्ताब्द आंग्ल वर्ष 2021_*
🔯 *_शक संवत – 1943,_*
☸️ *_कलि संवत 5122_*
☣️ *_अयन – उत्तरायण_*
🌦️ *_ऋतु – सौर वसंत ऋतु_*
🌤️ *_मास – चैत्र माह_*
🌒 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष,_*
📆 *_तिथि – एकादशी – 02:28 AM, 08 अप्रैल तक द्वादशी।_*
📝 *_तिथि के स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी है। आज 7 अप्रैल को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी, पापमोचनी एकादशी है।_*
💫 *_नक्षत्र – धनिष्ठा – 03:33 AM, 08 अप्रैल तक_*
🪙 *_नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल और देवता वसु हैं।_*
🔔 *_योग – साध्य – 04:30 PM तक तत्पश्चात शुभ_*
⚡ *_प्रथम करण : – बव – 14:15 PM तक_*
✨ *_द्वितीय करण : – बालव – 02:28 AM, 08 अप्रैल तक_*
🔥 *_गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा/हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक ।_*
🌞 *_सूर्योदय – प्रातः 6.06_*
🌅 *_सूर्यास्त – सायं 18.31_*
✡️ *_विजय मुहूर्त दोपहर 02.30 पीएम से 03.20 पीएम तक_*
🗣️ *_निशिथ काल रात 12.00 एएम से 12.46 एएम तक (8 अप्रैल)_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त शाम 06.30 पीएम से 06.54 पीएम तक_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04.32 एएम से 05.18 एएम तक (8 अप्रैल)_*
💧 *_अमृत काल शाम 04:44 पीएम से 06:24 पीएम तक_*
🌌 *_साध्य योग – दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक_*
🔅 *_धनिष्ठा नक्षत्र – देर रात 3 बजकर 33 मिनट तक_*
⏯️ *_पंचक प्रारम्भ हो रहे है – दोपहर 3 बजे से_*
☝🏼 *_कब समार्त होंगे पंचक- 12 अप्रैल की दोपहर पहले 11 बजकर 29 मिनट पर_*
🚓 *_यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-बटुक को कांस्य पात्र दान करें।_*
🌴 *_वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व व त्यौहार- पापमोचनी एकादशी, व्रत वैष्णो मां कर्मा देवी जयंती, विश्व आरोग्य दिवस, पंचक प्रारंभ 14.59_*
✍🏼 *_विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।_*

*_════════ ✥.❖.✥ ════════_*

🌹 *_पापमोचनी एकादशी के दिन बन रहे ये शुभ मुहूर्त_*

🐚 *_एकादशी तिथि आरंभ: 07 अप्रैल, तड़के 2 बजकर 10 मिनट से_*
👣 *_एकादशी तिथि समापन: 08 अप्रैल, तड़के 2 बजकर 29 मिनट तक_*
💁🏻‍♂️ *_एकादशी व्रत पारण मुहूर्त: 08 अप्रैल, गुरुवार दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 04 बजकर 11 मिनट तक._*

🌷 *_Vastu tips_* 🌸

*_वास्तु शास्त्र में कल हमने बात की थी लाफिंग बुद्धा के बारे में और आज भी हम इसी बारे में आगे बात करेंगे। लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को मुख्य द्वार के सामने कम से कम 30 इंच की ऊंचाई पर लगाया जाना चाहिए। लगाये जाने के लिये आदर्श ऊंचाई 30 इंच से अधिक और साढ़े बत्तीस इंच से कम होनी चाहिए। मूर्ति की नाक ग्रह स्वामी के दोनों हाथों की उंगलियों के बराबर, यानी कम से कम आठ अंगुल का होना चाहिए और अधिकतम ऊंचाई घर की मालिकन के हाथ की नाप से सवा हाथ के बराबर होनी चाहिए।_*
*_मुख्य द्वार के सामने रखी हुई मूर्ति का चेहरा मुख्य द्वार के सामने ही होना चाहिए। जैसे ही द्वार खुले सबसे पहले वही मूर्ति दिखे। ध्यान रहे कि लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को रसोई, डायनिंग रूम या बेडरूम में नहीं रखना चाहिए। साथ ही इसकी पूजा भी नहीं की जानी चाहिए।_*

*_●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●_*

🪔 *_गुरु भक्ति योग_* 🕯️

*_शास्त्रानुसार एकादशी व्रत करने की विधिवत विधि क्या है, कैसे एकादशी व्रत को करें? एकादशी के दिन क्या करें तथा क्या न करें?_*

*_मित्रों, एकादशी का व्रत जो लोग करते हैं, उनके लिए शास्त्रानुसार एकादशी व्रत की विधिवत विधि बताता हूँ। जो लोग इस व्रत को करते हैं, उन्हें दशमी तिथि की रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग विलास से भी दूर रहना चाहिए। प्रात: एकादशी को लकड़ी का दातुन करना चाहिए तथा पेस्ट आदि का उपयोग न करें। नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें इससे भी दातुन की विधि पूर्ण हो जाती है। वैसे तो किसी भी वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, इसलिए स्वयं गिरे हुए पत्तों का ही सेवन करना चाहिए।।_*

*_यदि ये सम्भव न हो तो पानी से बारह कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें अथवा किसी श्रेष्ठ विद्वान् ब्राह्मण के मुख से श्रवण करें। प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि: ‘आज मैं चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करुँगा और न ही किसी का दिल दुखाऊँगा। गौ, ब्राह्मण आदि को फलाहार एवं अन्नादि देकर प्रसन्न करुँगा। रात्रि को यथासंभव जागरण एवं कीर्तन करुँगा।।_*

*_“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इस द्वादशाक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करुँगा। राम, कृष्ण, नारायण इत्यादि विष्णुसहस्रनाम को कण्ठ का भूषण बनाऊँगा। ऐसी प्रतिज्ञा करके श्रीविष्णु भगवान का स्मरण कर प्रार्थना करें कि “हे त्रिलोकपति! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति अवश्य दें।” मौन, जप, शास्त्रों का पठन-पाठन, कीर्तन, रात्रि जागरण एकादशी व्रत में विशेष लाभ प्रदायक उपाय हैं।।_*

*_════════ ✥.❖.✥ ════════_*

*_एकादशी के दिन अशुद्ध द्रव्य से बने पेय न पीयें। जैसे – कोल्ड ड्रिंक्स, एसिड आदि डाले हुए फलों के डिब्बाबंद रस आदि को न पीयें। फलाहार भी दो बार से ज्यादा न करें तथा आइसक्रीम एवं तली हुई चीजें जैसे फलाहारी भुंजिया और चिप्स इत्यादि न खायें। फल अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस या थोड़े दूध या जल पर रहना विशेष लाभदायक होता है। व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल आदि का सेवन तथा ज्यादा जल का भी सेवन नहीं करना चाहिए।।_*

*_व्रत के पहले दिन (दशमी को) तथा व्रत के दूसरे दिन (द्वादशी को) हविष्यान्न (जौ, गेहूँ, मूँग, सेंधा नमक, कालीमिर्च, शर्करा और गोघृत आदि) का बना भोजन सिर्फ एक बार ही ग्रहण करें। फलाहार में भी गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए। आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए। जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए एवं बैल की पीठ पर सवारी कदापि न करें।।_*

*_भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप दीप से श्रीहरि की पूजा करके क्षमा माँगनी चाहिए। एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटावाना, मधुर बोलना, अत्यधिक न बोलना क्योंकि अधिक बोलने से न बोलने योग्य वचन भी निकल जाते हैं। व्रत के दिन सत्य ही बोलना चाहिए। इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें। प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करनी चाहिए।।_*

*_एकादशी के दिन किसी सम्बन्धी की मृत्यु हो जाय तो उस दिन व्रत रखकर उसका फल संकल्प करके मृतक को देना चाहिए और श्रीगंगाजी में पुष्प (अस्थि) प्रवाहित करने पर भी एकादशी व्रत रखकर व्रत का फल प्राणी के निमित्त दे देना चाहिए। प्राणिमात्र को अन्तर्यामी का अवतार समझकर किसी से छल कपट नहीं करना चाहिए। अपना अपमान करने या कटु वचन बोलनेवाले पर भी भूलकर भी क्रोध नहीं करना चाहिए। सन्तोष का फल सर्वदा मधुर ही होता है इसलिए मन में सदैव दया का भाव रखना चाहिए। इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है।।_*

🧘🏻‍♀️ *_व्रत खोलने की विधि:- द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्टान्न, दक्षिणादि से प्रसन्न कर उनकी परिक्रमा करनी चाहिए। फिर पूजा स्थल पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए। मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हो गये इस भावना के साथ, सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत को खोलना चाहिए।।_*

*_।। नमों नारायण ।।_*

*_════════ ✥.❖.✥ ════════_*

⚜️ *_मान्यता है कि, यह एकादशी हर तरह के पाप और कष्टों को दूर करने वाली होती है। पापों को हरने वाली यह एकादशी चैत्र मास में आती है। इसी के चलते इस एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है।_*
*_शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान श्री विष्णु जी को अति प्रिय है । एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी / श्री कृष्ण जी की आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का ब्रत रखने वाला जातक भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय होता है ।_*
*_एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है।_*
*_एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।_*
*_एकादशी के दिन चावल और दूसरे का अन्न खाना मना है । एकादशी के दिन चावल खाने से रोग और पाप बढ़ते है, एकादशी के दिन दूसरे का अन्न खाने से समस्त पुण्यों का नाश हो जाता है ।_*
🤷🏻‍♀️ *_एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का आशिक से अधिक जाप करना चाहिए ।_*
*_एकादशी के दिन प्रांत: भगवान विष्णु की पूजा करते समय कुछ पैसे विष्णु भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने रख दें। फिर पूजन करने के बाद यह पैसे अपने पर्स में रख लें। अब हर एकादशी को पूजन के समय यह सिक्के भी पर्स से निकाल कर पूजा में रखा करें और पूजन के बाद फिर से अपनी जेब में रख लें । इस उपाय को करने से कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है।_*

🖌 *_””सदा मुस्कुराते रहिये””_*
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[06/04, 9:52 PM] Savitanandmishra: . *_••• ═•☆”ॐ”☆•═ •••_*
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. *༺⚜❝ जय श्री हरि ❞⚜༻*
🙏🏻 *_नमस्कार_* 🙏🏻
*_ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आपके एवं आपके पूरे परिवार के लिए हर दिन शुभ एवं मंगलमय हों।_*

👉🏼 *_07 अप्रैल 2021 चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और दिन बुधवार है। एकादशी तिथि देर रात 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक साध्य योग रहेगा। साथ ही देर रात 3 बजकर 33 मिनट तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। इसके साथ ही दोपहर 3 बजे से पंचक प्रारम्भ हो रहे है और 12 अप्रैल की दोपहर पहले 11 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो जायेंगे। पापमोचनी एकादशी का व्रत किया जायेगा। जानिए आचार्य श्री गोपी राम से राशिनुसार कैसा रहेगा आपका दिन।_*

🐑 *_मेष राशि पारिवारिक जीवन में चल रहे कुछ महत्वपूर्ण काम पूरे होंगे। अपना व्यवहार सकारात्मक बनाए रखें। भविष्य के लिये बनायी योजनाओं पर भी कुछ सोच-विचार कर सकते हैं। अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद भी मिलेगी। जीवन में अपने परिवार, दोस्तों और जीवनसाथी की भूमिका को पहचानेंगे। आपके स्वभाव में संयम और धीरज बना रहेगा, जिसके कारण आप अपनी सभी समस्याओं का हल आसानी से ढूंढ लेंगे। कारोबार में उम्मीद से ज्यादा मुनाफा होगा।_*

🐂 *_वृष राशि दिन व्यापार के लिए फायदेमंद रहेगा। पुराना निवेश आपके बहुत काम सकता है। योजना बनाने और फैसला लेने के लिए दिन बहुत अच्छा है। आप पूरा ध्यान अपनी जिमेदारियों पर रखें। हर काम जोश से पूरा करने की कोशिश करें। आपकी कोशिशें जल्द ही रंग ला सकती हैं। अगर किसी को प्रपोज करना चाह रहे हैं तो दिन अच्छा है। आपकी किस्मत आपका सर्पोट करेगी। साथ ही दूसरों की परेशानियों को समझने की कोशिश करेंगे।_*

👨‍❤️‍👨 *_मिथुन राशि आपका दिन खुशियों भरा रहेगा। आपका मन नये काम करने में लगेगा। बिजनेस में वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। अपने कामकाज को पूरी सावधानी से करें, साथ ही दूसरों की हर संभव मदद करें। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। लवमेट के लिए दिन अच्छा रहेगा। पार्टनर से प्यार और सहयोग मिलेगा। स्टूडेंट्स को कुछ सीखने के लिए समय ठीक रहेगा। बिना वजह विवादों में फंसने से बचें। समाज में मान- सम्मान बढ़ेगा।_*

🦀 *_कर्क राशि दिन ठीक- ठाक रहने वाला है।अपनी सोच को सकारात्मक रखें। ऑफिस के पुराने कामकाज निपटाने की कोशिश करेंगे जिनमें आप सफल भी रहेंगे। रूठे हुए साथी को मनाने के लिए उनका मनपसंद व्यंजन बना के उन्हे खिला सकते हैं। कोई भी फैसला सोच-समझकर लें, जल्द बाजी बिल्कुल ना करें। किसी काम को कल पर टालने से आपको नुकसान हो सकता है, इसलिए ऐसा करने से बचें। घर पर समय दें ,पारिवारिक रिश्ते और मजबूत होंगे।_*

🦁 *_सिंह राशि दिन अच्छा रहेगा। जिससे भी मिलेंगे वह व्यक्ति आपसे प्रभावित होगा। परिवार का पूरा सहयोग आपको मिलेगा। किसी से भी बात करते समय वाणी पर संयम बनाए रखें। अपने करियर को लेकर मन में दुविधा होगी, लेकिन जल्द ही वह सॉल्व भी हो जायेगी। आपका स्वास्थ्य पहले से ठीक रहेगा, ड्राई फूड खाएं। बच्चें भाई बहन के साथ गेम्स खेलने का प्लान बनेगा। दाम्पत्य जीवन में पहले से चल रहे विवाद से राहत मिलेगी। अपने खर्चों को कंट्रोल करें, नहीं तो आपको परेशानी हो सकती है।_*

👰🏻 *_कन्या राशि आपका ध्यान ऑफिस के कामों को पूरा करने में लगा रहेगा। अपने अधूरे कामों को पूरा करने के लिए भी दिन अच्छा है।आपकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। आपका आत्मबल आपके लिये सफलता की कुंजी साबित होगा। सरकार से संबंधित काम करवाने के लिए आपको थोड़े धैर्य से काम लेना होगा। बच्चों की कामयाबी पर आप गर्व महसूस करेंगे। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। भाई-बहनों का सहयोग मिलता रहेगा। मान-सम्मान में वृद्धि होगी।_*

⚖️ *_तुला राशि आपके मन में नए-नए विचार आएंगे। आप कुछ ज्यादा ही जोश में रहेंगे। आपके बनाए प्लान में कोई बदलाव हो सकता है। बिजनेस में कुछ नया करने की इच्छा होगी। दिल की बजाय दिमाग से काम लें। व्यापार में आर्थिक लाभ होने से कर्ज से छुटकारा मिलेगा। परिवार वालों के गंभीर मुद्दे पर बात होगी। संगीत से जुड़े लोगों के लिए दिन बेहतरीन रहने वाला है। जीवन में चल रही समस्यायों का समाधान मिलेगा_*

🦂 *_वृश्चिक राशि बड़े-बुजुर्गों की सलाह आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगी। धन लाभ का योग बन रहा है। समाज कल्याण की तरफ भी आपका रुझान होगा। शत्रु आपको हराने का प्रयास करेंगे, लेकिन आपके सम्मुख ठहर नहीं सकेंगे। नौकरीपेशा लोगों तरक्कि के नये अवसर मिलेगा। ऑफिस के किसी बड़े अधिकारी का सहयोग मिलेगा। अचानक से आपके किसी पुराने मित्र का फोन आ सकता है। परिवार में सौहार्द बना रहेगा।_*

🏹 *_धनु राशि आपका रुझान अध्यात्मक की तरफ ज्यादा रहेगा। आप घर के साथ धार्मिक कार्यों में मन लगायेंगे। राजनीतिक कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। पड़ोसियों के बीच आपका मान- सम्मान बढ़ेगा। साइंस से जुड़े छात्रों के लिए दिन अच्छा है। माता के साथ रिश्ते मधुर रहेंगे। बिजनेस में पिता को सहयोग करेंगे। खानपान और जीवनशैली पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।_*

🐊 *_मकर राशि वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की तारीफ करेंगे। आपकी सैलरी में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है, जिससे आपका दिन अच्छा रहेगा। अपने सीनियर्स के प्रति अच्छा व्यवहार बनाए रखें। छात्रों के लिए भी दिन अनुकूल रहने वाला है। आपके अच्छे प्रदर्शन का प्रभाव आपके करियर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। आपके व्यापार में फायदे के आसार नजर आ रहे हैं। धन लाभ से आप अपने अटके हुए काम पूरे कर सकते हैं। घर के बड़ों का आशीर्वाद आपके साथ रहेगा।_*

⚱️ *_कुम्भ राशि दिन आपके लिए उत्तम रहेगा। सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देंगे। कार्यक्षेत्र में उम्मीद के अनुसार कामयाबी हासिल होगी। पारिवारिक मामलों में किसी बात को लेकर जीवनसाथी से वार्तालाप हो सकती है। दिन दूर की यात्रा करने से बचें, अपने स्वास्थ्य को राहत देने के लिये ये डिसीजन ठीक होगा। सरकारी एग्जाम की तैयारी करने वालों के लिए दिन अच्छा है। सेहत अच्छी रहेगी।_*

🐬 *_मीन राशि दिन आपके लिए उत्साहपूर्वक रहेगा। कोई भी शुभ कार्य करेंगे और साथ ही मांगलिक कार्य भी करेंगे। संतान की करियर के लिए मन में चिंताएं बनी रहेंगी। पूरा दिन एंज्वॉय से भरा रहेगा। सरकारी ऑफिस वाले बॉस आपके काम को लेकर बॉस आपकी तारीफ करेंगे। सोशल मीडिया पर नए लोगों के साथ संपर्क में आएंगे। जिसका फायदा आपको भविष्य में मिलेगा। जीवन में चल रही समस्यायों से छुटकारा मिलेगा।_*

*_(Don’t copy my page)_*

✍🏼 *_*नोट_* : *_हमारे द्वारा भेजी गई राशिफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है। पूरी जानकारी के लिए किसी पंडित जी या ज्योतिषी से मिल सकते हैं।_*

🤷🏻‍♀ *_आज जिन भाई-बहनों का जन्मदिन या शादी की सालगिरह है उन सभी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ_*

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*_सम्पर्क सूत्र :-_*
*_9812224501_*
[06/04, 9:52 PM] Savitanandmishra: 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 07 अप्रैल 2021*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2077*
⛅ *शक संवत – 1942*
⛅ *अयन – उत्तरायण*
⛅ *ऋतु – वसंत*
⛅ *मास – चैत्र (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार – फाल्गुन)*
⛅ *पक्ष – कृष्ण*
⛅ *तिथि – एकादशी 08 अप्रैल रात्रि 02:29 तक तत्पश्चात द्वादशी*
⛅ *नक्षत्र – धनिष्ठा 08 अप्रैल रात्रि 03:33 तक तत्पश्चात शतभिषा*
⛅ *योग – साध्य दोपहर 02:30 तक तत्पश्चात शुभ*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:41 से दोपहर 02:14 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:27*
⛅ *सूर्यास्त – 18:53*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण – पापमोचनी एकादशी*
💥 *विशेष – हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l https://youtu.be/n28XhkKVKGk राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *पापमोचनी एकादशी* 🌷
➡ *07 अप्रैल 2021 बुधवार को रात्रि 02:10 से 08 अप्रैल, गुरुवार को रात्रि 02:29 तक (यानी 07 अप्रैल, बुधवार को पूरा दिन) एकादशी है ।*
💥 *विशेष – 07 अप्रैल, बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
🙏🏻 *जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।*
🙏🏻 *एकादशी महात्मय पुस्तक से*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *कलह-क्लेश, रोग व दुर्बलता मिटाने का उपाय* 🌷
🏡 *जिसको घर में कलह-क्लेश मिटाना हो, रोग या शारीरिक दुर्बलता मिटाना हो वह इस चौपाई की पुनरावृत्ति किया करे*
🌷 *बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौ पवन-कुमार |*
*बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ||*
🙏🏻 *ऋषिप्रसाद – दिसम्बर २०२० से*

📖 *हिन्दू पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर*
📒 *हिन्दू पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*
🌞 *~ हिन्दू पंचाग ~* 🌞
🙏🍀🌻🌹🌸💐🍁🌷🌺🙏
[06/04, 9:55 PM] Savitanandmishra: मरने के बाद क्या होता है

मानव जीवन से जुड़ा दुनिया का ऐसा कोई भी पहलू नहीं है, जिसका उल्लेख भारतीय वैदिक साहित्य में नहीं हो..। जन्म से लेकर मृत्यु तक के सोलह संस्कारों में व्यक्ति के अधिकार, कर्तव्य और नैतिक दायित्वों का बोध कराया गया है। मनीषियों के अनुसार सारे नियम मनुष्य के जीवन को सरल, सुगम, मर्यादित और सुखमय बनाने के लिए ही हैं। गरुण पुराण में तो जन्म से पहले और मृत्यु के बाद तक की गतिविधियों को प्रस्तुत किया गया है। इसमें यह तक बता दिया गया है कि मृत्यु के पश्चात आत्मा आखिर कहां जाती है। उसके साथ क्या-क्या होता है? उसे किन-किन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है और इस परीक्षा में फेल या पास होने के बाद उसकी क्या गति होती है? आइए आपको भी इस रहस्य से अवगत कराते हैं।

शिथिल हो जाती हैं इंद्रियां
गरुड़ पुराण में यह स्पष्ट लिखा है कि मृत्यु के बाद आत्मा का सफर कैसा होता है। पुराण में उल्लेख है कि जब मृत्यु निकट आती है तो मनुष्य की सभी इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं। वह चाहकर भी कुछ बोल नहीं पाता। प्राण निकलते ही आत्मा एक दिव्य स्वरूप में परिवर्तित हो जाती है। उसे सारा जगत ब्रम्ह स्वरूप लगने लगता है। इंद्रियां शिथिल होने की वजह से उसके मुंह से झाग जैसा निकलने लगता है। अलग-अलग कर्म करने वाले व्यक्यिों के प्राण अलग-अलग इंद्रियों से निकलते हैं। इसी के हिसाब से उनके पाप और पुण्य का निर्धारण होता है।

अंगूठे के आकार की आत्मा
ज्योतिषाचार्य अभिनव दूबे के अनुसार गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि मृत्यु के समय काल के दूत पाशदंड धारण किए हुए प्राणी के पास पहुंचते हैं। उनका स्वरूप इतना भयानक व क्रोधयुक्त होता है कि भय के कारण पापी मल-मूत्र तक कर देते हैं। मृत्यु के समय प्राणी की आत्मा “हा हा” स्वर बोलते हुए शरीर से निकलती है। आत्मा का आकार अंगूठे के बराबर रहता है। यमदूत पापात्माओं के गले में पाश बांधकर उसे यमलोक ले जाते हैं ।

पापात्माओं को भय
गरुण पुराण के अनुसार यमदूत यमलोक ले जाते समय रास्ते में पापात्माओं को भयभीत करते हैं। नर्क की यातनाओं के बारे में बताते हैं। ऐसी बातें सुनकर पापात्मा रुदन करने लगती है । इसके उपरांत पापात्मा को कुत्तों द्वारा काटा जाता है । इस समय दुखी पापात्मा अपने पापकर्मों को याद करते करता हुआ आगे बढ़ता है । इसके बाद उसे आग की लपटों से गुजरना पड़ता है । पापात्मा के भूख-प्यास से व्याकुल होने पर यमदूत उसकी पीठ पर चाबुक मारते हुए उसे आगे धकेलते हैं । पापात्मा कई बार गिरकर अचेत हो जाती है । परंतु यमदूत निरंतर पापात्मा को यतनाएं देते हुए अंधकारमय मार्ग से यमलोक की ओर ले जाते हैं ।

15 लाख किमी दूर है यमलोक
गरुण पुराण में उल्लेख है कि भूलोक से यमलोक की दूरी 99 हजार योजन यानी करीब 1584000 किलोमीटर है। पापात्मा के यमलोक पहुंचने पर तथा यमदूतों की यातना सहने के बाद यमराज उसके लिए सजा निर्धारित करते हैं। यमराज की आज्ञा के अनुसार बुरी आत्माओं को आकाश से ही गिराकर वापस उसके नगर या गांव के समीप छोड़ दिया जाता हैं। घर लौटकर पापात्मा छटपटाते हुए पुन: मृत शरीर में प्रवेश करने की चेष्टा करती है, लेकिन उसका प्रवेश कर पाना संभव नहीं हो पाता। वह भूख-प्यास से व्याकुल होकर छटपटाता और रुदन करता रहा है। परिजनों द्वारा अंत समय में किए हुए पिंडदान से भी पापात्मा की तृप्ति नहीं होती और भूख-प्यास तड़पते हुए वह फिर से यमलोक लौटती है ।

जब प्रेत बन जाती है आत्मा
जो पुण्य आत्माएं होती हैं, उनके लिए ज्यादा लोकाचार की आवश्यकता नहीं पड़ती, लेकिन पापात्माओं को काफी कष्ट भोगने पड़ते हैं। पुराण में उल्लेख है कि यदि मृतक के पुत्र-पौत्रों द्वारा पापात्मा को पिंडदान नहीं दिया जाता तो वह प्रेत रूप धारण कर दीर्धकाल तक धरती पर ही भटकती रहती है । मृत्यु के उपरांत 10 दिनों तक पिंडदान अनिवार्य बताया गया है, इसके बाद मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक पिंडदान भी होते हैं। बताया गया है कि मृत्यु के दसवें दिन तक किए गए पिंडदान के चार भाग होते हैं। पिंडदान के दो भाग मृत देह को प्राप्त होते हैं, तीसरा हिस्सा यमदूत को प्राप्त होता है तथा चौथा हिस्सा पापात्मा रूपी प्रेत का ग्रास बनता है। मृत शरीर के अंतिम संस्कार उपरांत पिंडदान से प्रेत को हाथ के बराबर शरीर प्राप्त होता है। यम मार्ग में यही प्रेत शुभाशुभ फल पाता है ।

पिंड से बनता है शरीर
गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि प्रेत को पहले दिन के पिंडदान से सिर, दूसरे दिन से गर्दन व कंधे, तीसरे दिन के पिंडदान से हृदय, चौथे दिन के पिंडदान से पीठ, पांचवें दिन के पिंडदान से नाभि, छठे व सातवें दिन के पिंडदान से कमर व नीचे का भाग, आठवें दिन के पिंडदान से पैर, नवमे दिन के पिंडदान से प्रेत का शरीर प्राप्त होता है। दसवें दिन के पिंडदान से उस शरीर को चलने की शक्ति प्राप्त होती है तथा प्रेत की भूख-प्यास उत्पन्न होती है। पिंड शरीर धारण कर भूख-प्यास से व्याकुल प्रेतरूप में ग्यारहवें व बारहवें दिन का भोजन करता है। तेरहवें दिन यमदूत प्रेत को बंदर की तरह पकड़ लेते हैं। इसके बाद वह प्रेत भूख-प्यास से तड़पता हुआ अकेला यमलोक जाता है । वैतरणी नदी से यमलोक के 86 हजार योजन के सफर पर प्रेत प्रतिदिन 200 योजन चलता हुआ 47वें दिन यमलोक पहुंचता है। यम मार्ग में सोलह पुरियों को पार करके प्रेत यमलोक पहुंचता है। पापात्माएं यमपाश में बंधी होने के कारण मार्ग में हाहाकार करते हुए रोती बिलखती हुईं यमलोक पहुंचकर अपने कर्मानुसार फल भोगती हैं।

ये पाप पहुंचाते हैं नरक
ब्राह्मण या पुजारी को मारना, किसी को नशे की हालत में छोडकऱ चले जाना, किसी पवित्र संकल्प और वादों को तोडऩा, भ्रूण की हत्या करना या फिर भ्रूण को नष्ट करना, किसी को सताना, पर स्त्री गमन, निर्दोष व्यक्ति व पशु-पक्षी की हत्या, पंच देवों का अनादर, ब्राम्हणों का अपमान, माता-पिता, पत्नी को कष्ट देना आदि को गरुड़ पुराण में बहुत बड़ा पाप माना जाता है। अगर कोई इंसान ऐसा करता है, तो निश्चित तौर पर उसे नरक में सज़ा पाने के लिए तैयार रहना चाहिए। किसी महिला की हत्या करना, महिला को प्रताडि़त करना, मूकदर्शक की तरह आंखों के सामने किसी की इज्जत लुटते देखते रहना, या फिर किसी गर्भवती महिला को मारना-पीटना आदि भी आदमी को नरक गामी बनाते हैं। किसी के विश्वास को धोखा देना और किसी की हत्या करने के लिए हथियार के रूप में ज़हर का इस्तेमाल करना भी घोर पाप है और इसका रास्ता भी सीधे नरक की ओर जाता है। पापात्माओं को नरक में अलग-अलग यातनाएं दी जाती हैं। कई वर्षों तक वे वहां ऐसी ही पड़ी, तड़पती रहती हैं।
[06/04, 9:55 PM] Savitanandmishra: *🙋🏻‍♀️मौली (कलावा) विशेष*
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राजेश जैन एस्ट्रोलॉजर वास्तुविद हस्तरेखा विषेशज्ञ मो.9416119298

मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो पहले से ही रही है, लेकिन इसको संकल्प सूत्र के साथ ही रक्षा-सूत्र के रूप में तब से बांधा जाने लगा, जबसे असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था। इसे रक्षाबंधन का भी प्रतीक माना जाता है, ‍जबकि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था। मौली को हर हिन्दू बांधता है। इसे मूलत: रक्षा सूत्र कहते हैं।

#मौली_का_अर्थ
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मौली’ का शाब्दिक अर्थ है ‘सबसे ऊपर’। मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। इसका वैदिक नाम उप मणिबंध भी है। मौली के भी प्रकार हैं। शंकर भगवान के सिर पर चन्द्रमा विराजमान है इसीलिए उन्हें चंद्रमौली भी कहा जाता है।

#कैसी_होती_है_मौली?
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मौली कच्चे धागे (सूत) से बनाई जाती है जिसमें मूलत: 3 रंग के धागे होते हैं- लाल, पीला और हरा, लेकिन कभी-कभी यह 5 धागों की भी बनती है जिसमें नीला और सफेद भी होता है। 3 और 5 का मतलब कभी त्रिदेव के नाम की, तो कभी पंचदेव।

#कहां_कहां_बांधते_हैं_मौली?
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मौली को हाथ की कलाई, गले और कमर में बांधा जाता है। इसके अलावा मन्नत के लिए किसी देवी-देवता के स्थान पर भी बांधा जाता है और जब मन्नत पूरी हो जाती है तो इसे खोल दिया जाता है। इसे घर में लाई गई नई वस्तु को भी बांधा जाता और इसे पशुओं को भी बांधा जाता है।

#मौली_बांधने_के_नियम
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शास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए। विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का नियम है।

कलावा बंधवाते समय जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों, उसकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए।

मौली कहीं पर भी बांधें, एक बात का हमेशा ध्यान रहे कि इस सूत्र को केवल 3 बार ही लपेटना चाहिए व इसके बांधने में वैदिक विधि का प्रयोग किया जाता है।

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